जैन दर्शन में ज्ञान मीमांसा

जैन दर्शन में ज्ञान मीमांसा

जैन दर्शन में ज्ञान मीमांसा (Epistemology in Jain Philosophy) जैन दर्शन में ज्ञान मीमांसा : व्यवहार की दृष्टि से ज्ञान का अर्थ जानना, समझना या परिचित होना होता है। प्रत्येक प्राणी अपने इंद्रियों के द्वारा ज्ञान प्राप्त करता है। अध्यात्म की दृष्टि से ज्ञान का अर्थ परमज्ञान है, जिसके द्वारा मनुष्य वस्तु की प्रकृति या … Read more

यूरोप में पुनर्जागरण

यूरोप में पुनर्जागरण

यूरोप में पुनर्जागरण (Renaissance in Europe) यूरोप में पुनर्जागरण: पुनर्जागरण (Renaissance) का शब्दिक अर्थ होता हैः पुनर्जीवित होना, पुनर्जागृत होना इत्यादि। इस रूप में पुनर्जागरण शब्द का अर्थ, महत्व और प्रयोग मध्यकाल से आधुनिक काल के बीच संकक्रमण के दौरान व्यक्त होनेवाला बौद्धिक, कलात्मक, सांस्कृतिक आदि क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। यूरोप में पुनर्जागरण पुनर्जागरण … Read more

भारत में राष्ट्रवाद का उदय

भारत में राष्ट्रवाद का उदय

भारत में राष्ट्रवाद का उदय – एक समीक्षा भारत में राष्ट्रवाद का उदय : 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारतीयों में राष्ट्रीय राजनीतिक चेतना का विकास बहुत तीव्र गति से हुआ. फलस्वरूप भारत में एक संगठित राष्ट्रीय आन्दोलन का सूत्रपात हुआ. भारतीय राष्ट्रवाद कुछ सीमा तक उपनिवेशवादी नीतियों तथा उन नीतियों से उत्पन्न भारतीय प्रतिक्रिया … Read more

मराठा साम्राज्य

मराठा साम्राज्य

मराठा साम्राज्य मराठा साम्राज्य : मराठा राज्य का निर्माण एक क्रान्तिकारी घटना है। विजयनगर के उत्थान से भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण तत्व आया था। मराठा संघ एवं मराठा साम्राज्य एक भारतीय शक्ति थी जिन्होंने 18 वी शताब्दी में भारतीय उपमहाद्वीप पर अपना प्रभुत्व जमाया हुआ था। मराठा साम्राज्य इस साम्राज्य की शुरुआत सामान्यतः 1674 में … Read more

दक्षिण भारत का इतिहास

दक्षिण भारत का इतिहास : चोल, चेर और पांड्य राजवंश

दक्षिण भारत का इतिहास : चोल, चेर और पांड्य राजवंश | History of south India chola chera and pandya dynasties दक्षिण भारत का इतिहास : चोल, चेर और पांड्य राजवंश – संगम युग के दौरान तमिल देश (दक्षिण भारत) पर तीन प्रमुख राजवंशों चेर, चोल और पांड्यों का शासन था। चेर राजवंश ने दो अलग-अलग समय-काल में शासन … Read more

तीस वर्षीय युद्ध के कारण एवं परिणाम

तीस वर्षीय युद्ध के कारण एवं परिणाम

तीस वर्षीय युद्ध के कारण एवं परिणाम | Causes and consequences of the Thirty Years’ War तीस वर्षीय युद्ध के कारण एवं परिणाम: यूरोप के इतिहास में तीसवर्षीय युद्ध एक मील का पत्थर है जहाँ से मध्यकाल के समस्त अवशेष समाप्त हो जाते हैं और आधुनिक काल की वास्तविक यात्रा आरंभ होती है। तीस वर्षीय युद्ध के … Read more

सरोजनी नायडू | Sarojini Naidu contribution in freedom struggle

सरोजनी नायडू | Sarojini Naidu contribution in freedom struggle

सरोजनी नायडू | Sarojini Naidu contribution in freedom struggle सरोजनी नायडू | Sarojini Naidu contribution in freedom struggle : सरोजिनी नायडू सबसे प्रसिद्ध महिला स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थीं और उन्होंने भारत को ब्रिटिश साम्राज्यवाद से मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह एक महान वक्ता, समानता की योद्धा और आधुनिक भारत की कवयित्री … Read more

महाजनपद काल : प्रमुख जनपद, उनकी राजधानियां

महाजनपद काल : प्रमुख जनपद

महाजनपद काल : प्रमुख जनपद, उनकी राजधानियां, प्रमुख शासक ( Mahajanpad Kaal : Pramukh Janpad, Unki Rajdhaniyan, Pramukh Shasak ) महाजनपद काल : प्रमुख जनपद :  छठी सदी ईस्वी पूर्व में कृषि, उद्योग एवं शिल्प के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई और उत्तर वैदिक काल के जनपदों ने महाजनपदों का रूप धारण कर लिया । … Read more

गुप्त काल : भारतीय इतिहास का स्वर्णकाल

गुप्त काल : भारतीय इतिहास का स्वर्णकाल

गुप्त काल : भारतीय इतिहास का स्वर्णकाल | Gupta Era: The Golden Age of Indian History गुप्त काल : भारतीय इतिहास का स्वर्णकाल : मौर्य साम्राज्य के पतन के पश्चात गुप्त काल के शासकों ने भारत को राजनीतिक एकता के सूत्र में बांधा । यद्यपि ईस्वी की चौथी सदी के आरंभ से लेकर छठी सदी … Read more

अशोक का धम्म ( Ashoka’s Dhamma )

अशोक का धम्म ( Ashoka’s Dhamma )

अशोक का धम्म ( Ashoka’s Dhamma ) अशोक का धम्म ( Ashoka’s Dhamma ) : अशोक का निजी धर्म तो बौद्ध था, परन्तु जो लोग बौद्ध धर्म का अनुकरण नहीं कर सकते थे, उनके लिए एक नए धर्म का आविष्कार किया। महान अशोक अपनी प्रजा के भविष्य का भी सुधार करना चाहता था। उसने कुछ … Read more

close