अनुशासन पर निबंध

Essay on Discipline in Hindi – अनुशासन पर निबंध

अनुशासन पर निबंध : Anushasan Par Nibandh. Here you will get various Paragraph and Short Essay on Discipline in Hindi Language for Students of all classes in 100, 150, 300, 500, 600, 700 and 1000 words. यहां आपको सभी कक्षाओं के छात्रों के लिए हिंदी भाषा में अनुशासन पर निबंध मिलेगा।>

Essay on Discipline in Hindi – अनुशासन पर निबंध

Short Essay on Discipline in Hindi Language – अनुशासन पर निबंध ( 100 words )

अनुशासन का अर्थ है नियमों का पालन करना और यह हमें नियंत्रण में रखता है। अनुशासन सफलता की सबसे बड़ी कुँजी है और हर व्यक्ति के जीवन में इसका विशेष महत्व है। अनुशासन हमें बड़ो की आग्या का पालन करना, समय पर हर कार्य करना और एकाग्रचित होकर कार्य करना सिखाता है। अनुशासन के बिना मनुष्य जीवन व्यर्थ है। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का विशेष महत्व है क्योंकि इस समय हमारा विकास हो रहा होता है और हम जो भी सीखते हैं हमें याद रहता है। हम सबको अपने जीवन में अनुशासन को अपना कर अपने जीवन को सफल बनाना चाहिए।

Short Essay on Discipline in Hindi Language – अनुशासन पर निबंध (150 Words) 

जीवन के सभी क्षेत्रों में अनुशासन आवश्यक है। यदि कोई शिक्षक कक्षा में अनुशासन नहीं रखता तो शिक्षक यह नहीं सिखा सकता है। , एक परिवार का टाई सिर अपने परिवार को चलाने में सक्षम नहीं होगा यदि उसके सदस्य अनुशासन नहीं बनाए रखते हैं यदि किसी भी अच्छी नौकरी करने के लिए सभा के सदस्यों को अनुशासन का पालन करना चाहिए तो कोई भी कार्यालय अनुशासन के बिना काम कर सकता है यहां तक कि किसी खेल के मैदान में खिलाड़ियों को खेल के नियमों का पालन करना पड़ता है।

उन्हें अनुशासन के तहत खेलना होगा अनुशासन के बिना, भ्रम, विकार और अराजकता होना जरूरी है। अनुशासन के बिना कोई काम या प्रगति संभव नहीं है। यह अनुशासन है जो एक राष्ट्र को प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ने में सक्षम बनाता है। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि अनुशासन केवल कानून द्वारा लागू नहीं किया जा सकता है यह मन का प्रशिक्षण है इसे भीतर से आना होगा।

Essay on Discipline in Hindi Language – अनुशासन पर निबंध ( 300 words )

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अनुशासन का बहुत महत्व है। अनुशासन के ब्ना मनुष्य का जीवन पशु के सामान है। अनुशासन दो शब्दोम से मिलकर बना है अनु और शासन। अनु का अर्थ है पालन करना और शासन का अर्थ है नियमों का यानि कि अनुशासन का अर्थ है नियमों का पालन करना। प्रकृति भी अपना हर कार्य अनुशासन में करती है। सूर्य अपने निर्धारित समय पर आता है और अपने निर्धारित समय पर ही अस्त होता है। सभी रितुओं का आगमन समय के अनुसार होता है।

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का अतियधिक महत्व है क्योंकि इस समय बच्चों को जो कुछ भी सिखाया जाता है वह उन्हें जिंदगी भर याद रहता है। बच्चों को शुरू से ही नियमों का पालन करना सिखाना चाहिए। स्कूल से ही उन्हें समय का पालन करना, नियमों का पालन करना और बहुत सी अच्छी आदतें सिखने को मिलती है। अनुशासन सफलता की कुणजी है। जो व्यक्ति अनुशासन में रहता है वह एक दिन सफलता अवश्य प्राप्त कर लेता है। हमें बड़ो की बात माननी चाहिए और उनकी आग्या का पालन करना चाहिए। अनुशासन भी दो प्रकार का होता है। पहला वह जो व्यक्ति में खुद से होता है और दुसरा वह जो किसी के डर से पैदा किया जाता है। स्व अनुशासन उच्चत्म अनुशासन होता है।

अनुशासन में रहने वाले व्यक्ति को सभी पसंद करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। जो व्यक्ति हमेशा समय पर हर कार्य करता है उसे ही आसानी से नौकरी मिलती है और वह सफल हो जाता है। अनुशासन हमारे चरित्र को निखारने में सहायता करता है। अनुशासन हमें एकाग्रचित कर नियंत्रण में रखता है ताकि हम अपने कार्य पर ध्यान दे सके। यह हमारे जीवन को नियंत्रित कर हमें सफलता के मार्ग पर लेकर जाता है। हम सबको अपने जीवन में अनुशासन को अपनाना चाहिए।

अनुशासन पर निबंध – Long Essay on Discipline in Hindi 500 words

अनुशासन का अर्थ है शासन या नियमों के अनुसार चलना । मनुष्य सामाजिक प्राणी है। समाज में उसे एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना है । इसके लिए समाज में कुछ नियम बने होते हैं और उन नियमों के अनुसार चलने से शान्ति बनी रहती है। यदि लोग इन नियमों का पालन न करें तो समाज में जंगल का राज्य हो जाएगा।

अनुशासन का अर्थ बहुत विस्तृत है। इसमें बहुत सी बातें आ जाती हैं । स्कूल के नियमों का पालन करना, बड़ों की आज्ञा मानना, समय पर स्कूल जाना, स्कूल में प्रत्येक कार्य नियम के अनुसार करना, आदि अनुशासन के ही अंग हैं। वास्तव में अनुशासन का महत्त्व जीवन के हर क्षेत्र में होता है । यदि देखा जाए तो अनुशासन का आरम्भ उसी समय हो जाता है जब बच्चे का जन्म होता है। मां बच्चे को निश्चित समय पर दूध देती है, निश्चित समय पर उसका शौच आदि का कार्य करती है। समय पर सोना, समय पर उठना सिखाती है। रोज़ के काम नियमानुसार करना सिखाती है। घर में जो वस्तुएं जहां से उठाई जाएं उन्हें वहीं पर रखना सिखाती है।

वास्तव में अनुशासन एक ऐसा गुण है जिसे गुरु के उपदेशों से, पुस्तकों से या अन्य किसी साधन से उतना नहीं सीखा जा सकता जितना देखकर सीखा जाता है। बच्चा अपने बड़ों को जैसा करता हुआ देखता है, वह भी वैसा ही करने लग जाता है। अतः बच्चों को अनुशासित बनाने के लिए जरूरी है कि घर में पति-पत्नी का अपना जीवन अनुशासित हो। यदि घर में अनुशासन न होगा तो बच्चे पर उसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। जब वह स्कूल जाएगा तो स्कूल के अनुशासन में अपने आपको नहीं ढाल सकेगा। वास्तव में मानव जीवन की सफलता अनुशासन में है। व्यापार में, कार्यालयों में, कारखानों में हर स्थान पर अनुशासन में रहकर काम करने से सफलता पैरों को चूमती है।

बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आज जीवन के हर क्षेत्र में अनुशासन की बड़ी कमी है। स्कूलों-कालेजों में तो अनुशासन की बहुत कमी है । इसके लिए विद्यार्थियों को दोषी ठहराया जाता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि आज का अध्यापक, आज के माता-पिता, आज के अधिकारी कोई भी तो अपने आप को अनुशासन में नहीं रखते। जब अध्यापक समय पर क्लास में नहीं आता, परीक्षा में निरीक्षण-कार्य करने की बजाए कमरे से बाहर खड़ा होकर गप्पें हांकता है, धूम्रपान करता है, उचित मार्ग से जाने की बजाए वह लान को लांघ कर जाता है तब हम यह कैसे आशा कर सकते हैं कि छात्र अनुशासन में रहना सीखें । कार्यालयों में तो और भी बुरी दशा है। कार्यालय खुलने का समय 9 बजे है, तो अधिकारी 10 बजे घर से चलता है। दोपहर के भोजन के लिए एक बजे की बजाए 12 बजे ही चल देता है। लौट कर 2 बजे की बजाए 3 बजे आता है तो फिर वह कैसे आशा रख सकता है कि उसके अधीन लोग समय पर आएं और काम करें।

प्रश्न यह है कि अनुशासन कैसे स्थापित किया जाए। वास्तव में इसका आरम्भ ऊपर से होना चाहिए। स्कूलों-कालेजों में अध्यापक, मुख्याध्यापक, प्रिंसीपल, दफतरों में अधिकारी, घरों में माता-पिता स्वयं अनुशासन में रहकर आदर्श स्थापित करें तो कोई कारण नहीं कि अनुशासन का अभाव हो।

Essay on Discipline in Hindi Language 600 words : अनुशासन पर निबंध 

अनुशासन ही एक ऐसा गुण है जिसकी जीवन के हर क्षेत्र में कदम-कदम पर परम आवश्यकता रहती है। अतः इसका प्रारंभ उस समय से ही मानव जीवन पर होना चाहिए जिस समय वह मधुर तोतली भाषा में अपने स्वजनों का मन लुभाया करता है। इसके द्वारा ही मानव का चरित्र निर्माण हो सकता है। अनुशासनप्रियता | ही उसे सुनागरिक बनने के लिए प्रोत्साहित करती है। प्राय: देखा गया है कि बहत से अभिभावक बच्चे को इसकी शिक्षा बचपन में इसलिए नहीं देना चाहते कि वह विद्यालय में जाकर स्वयं सीख लेगा। उनकी दृष्टि में विद्यालय ही अनुशासन का सबसे अच्छा केंद्र है। वास्तव में वे भूल जाते हैं कि ऐसे बच्चे ही उद्दंड, आलसी और आज्ञा को भंग करने वाले बन जाते हैं।

उन्हें अनुशासन एक विषैले तीर के समान लगने लगता है। वे विद्यालयों में जाकर अध्यापकों की और घर में अभिभावकों की आज्ञा का उल्लंघन ही नहीं करते अपितु घिनौने शब्दों का प्रयोग भी करते हैं। वैसे तो अनुशासन-शिक्षा के लिए विद्यालय ही सर्वोच्च स्थान है, उन्हें वहाँ पर अनुशासन की शिक्षा अवश्य मिलनी चाहिए। उन्हें गुरुजनों की आज्ञा का कभी भी उल्लंघन नहीं करना चाहिए। अनुशासनप्रिय बच्चे शिक्षा को पूर्ण रूप से समझते हैं; क्योंकि वे कक्षा में शोरगुल नहीं करते, किसी के साथ संघर्ष मोल नहीं लेते, वे तो आदर्श विद्यार्थी के समान बैठे हुए अध्यापक द्वारा पढ़ाए गए पाठ का ध्यानपूर्वक अध्ययन करते हैं। ऐसा जीवन बिताने से आनंद और सम्मान अपने सहचर बन जाते हैं, जिनके द्वारा हम अपने जीवन को महान एवं उन्नतिशील बना सकते हैं।

अन्य राष्ट्रों में शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य जीवन को अनुशासनप्रिय बनाना है। वहाँ के शिक्षक विद्यालयों में इसी बात का विशेष ध्यान रखते हैं। वे अपने समय का अधिकांश भाग अनुशासन में ही व्यतीत करते हैं, किंतु हम उनसे बहत पीछे हैं। हमारे देश भारत का नाम विदेशों में बहुत ऊँचा है, इतना होते हुए भी हमें आत्मिक शांति नहीं मिल पाती है।

गत वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में बहुत परिवर्तनहरू हैं। मनोविज्ञान का आधिपत्य उस पर पूर्ण रूप से हो गया है, पर हम पुरानी लकीर के ही फकीर बने हुए हैं। जब तक हमारी शिक्षण संस्थाओं में, मनोवैज्ञानिक आधार पर शिक्षा का प्रबंध और अनुशासनप्रियता नहीं होगी तब तक भारत के भावी कर्णधार छात्र उन्नति के शिखर पर नहीं चढ़ सकते हैं, क्योंकि विद्यार्थी जीवन की अनुशासनप्रियता ही अमूल्य निधि है। इसी के भंडार में दृढ़ संकल्प, कर्तव्यपरायणता और अध्यवसाय के दर्शन होते हैं। इसे आकर ही जीवन का मार्ग खुलता है। व्यक्तिगत एवं मानसिक उन्नति के लिए प्रथम सीढी अनुशासन की ही चढ़नी पड़ती है। जो इस सीढ़ी पर चढ़ने में असमर्थ रहता है, वह जीवन में कभी सफलता प्राप्त नहीं। कर सकता है।

लोकनायक तुलसी ने भी रामचरितमानस में परशुराम-लक्ष्मण-संवाद में इसका विशद उद्धरण प्रस्तुत किया है

मिलै न कतहुँ सुभट रण गाढ़े।

विज देवता घरहिं के बाढे ।।

ये शब्द परशुराम के लिए लक्ष्मण के मुख से निकले थे। जब श्रीराम ने देखा कि लक्ष्मण अनुशासन की सीमा को भंग कर रहा है तो उन्होंने नयनों के संकेत से ही भाई को अनुचित शब्द बोलने से रोक दिया था। अतः हर बच्चे को लक्ष्मण के समान ही अनुशासनप्रिय होना चाहिए। प्राय: बहुत से अभिभावक अपने बच्चों को अनुशासनप्रिय बनाने के लिए उनके साथ कठोरता का व्यवहार करते हैं। ऐसा करना अनुचित है; क्योंकि इससे बच्चा अनुशासन को हौवा समझ बैठता है। उसकी उद्दंड मनोवृत्ति उसका सदा के लिए तिरस्कार कर देती है।

अनुशासन का पाठ वास्तव में प्रेम का पाठ है, कठोरता का नहीं। अत: इसे प्रेम के साथ ही पढ़ाना चाहिए। अनुशासनप्रिय बालक युवा होने पर राष्ट्र का नेता बन सकता है और उससे दूर भागने वाला शीघ्र ही पतन के गर्त में जा पड़ता है। अत: हर प्रकार की उन्नति के इच्छुक मानव को अनुशासनप्रिय होना चाहिए।

Anushasan Par Nibandh – Essay on Discipline in Hindi – अनुशासन पर निबंध (700 Words)

अनुशासन गतिविधि के हर क्षेत्र में सफलता की कुंजी है, यह मानवीय या दिव्य होगा। अनुशासन का अर्थ है कुछ नियमों और विनियमों के प्रति आत्म-नियंत्रण और आज्ञाकारिता की आदत को विकसित करना। कई लोगों के पास अनुशासन का गलत विचार है उनका मानना है कि अनुशासन का मतलब उनकी आजादी पर एक जांच है लेकिन यह वास्तविकता में है, बस इसके विपरीत। अनुशासन के बिना एक आदमी जहाज के समान है, जो पतवार के बिना है। बस जहाज़ के बिना जहाज के रूप में तरंगों की दया होती है, एक अनुशासनहीन व्यक्ति का जीवन दिशाहीन भी होता है। सभी प्राकृतिक बल कुछ अनुशासन का भी पालन करते हैं तारे और ग्रह अपने स्वयं के निश्चित आंदोलनों का पालन करते हैं। यदि ये स्वर्गीय निकाय अनुशासन का पालन नहीं करते हैं, तो ब्रह्मांड का कुल नाश हो जाएगा।

किसी व्यक्ति के साथ ही एक राष्ट्र की प्रगति के लिए अनुशासन आवश्यक है सशस्त्र बलों के लिए देश की सीमाओं की रक्षा के लिए छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है, दफ्तर जाने वालों और मजदूरों को लेने मेंसफलता के मार्ग पर देश हम बिना अनुशासन के जीवन का सपना भी नहीं देख सकते। अनुशासन एक शांतिपूर्ण और टिकाऊ जीवन सुनिश्चित करता है इसलिए ऑक्सीजन के रूप में हमारे लिए अनुशासन आवश्यक है।

शब्दकोश के अनुसार, अनुशासन का अर्थ है किसी व्यक्ति के दिमाग और चरित्र को वरिष्ठ अधिकारियों, वरिष्ठ अधिकारियों या स्थापित अधिकारियों के लिए आज्ञाकारिता की आदतों के आत्म-नियंत्रण का पालन करना। मनुष्य मुक्त पैदा होता है फिर क्यों, क्या वह खुद करते हैं और क्या नहीं करते हैं? अनुशासन बिल्कुल आवश्यक है? अगर हम खुद को अनुशासन देने से इनकार करते हैं तो क्या होगा? इन सवालों के जवाब पाने के लिए हमें अपने आस-पास की प्राकृतिक योजनाओं को देखना होगा।

संपूर्ण ब्रह्मांड, सभी स्वर्गीय निकायों और सभी प्राकृतिक वस्तुओं, अपने स्वयं के एक अनुशासन के तहत अभिनय, चलती या मौजूदा लग रहे हैं पौधों और फसलों को अनुशासित तरीके से विकसित होता है; हमारे शरीर के विभिन्न अंग एक दूसरे के साथ सहयोग करते हैं; जो भोजन हम करते हैं वह अनुशासित तरीके से लिया जाना चाहिए। जानवरों का जीवन अनुशासित जीवन शैली का भी एक मॉडल है। यह चींटियां एकल-विचार वाले ध्यान के साथ सीधी रेखा में आगे बढ़ती हैं; मधुमक्खियां एक टीम के रूप में काम करती हैं; जंगल के जानवरों का अपना स्वयं का संगठित तरीका है इसलिए, अनुशासन, जीवन की एक बुनियादी आवश्यकता है। अगर इसमें कोई अनुशासन नहीं है तो जीवन का उचित विकास असंभव है।

जीवन के हर क्षेत्र में अनुशासन आवश्यक है यह स्कूलों और कॉलेजों में आवश्यक है छात्रों को अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान करना चाहिए। शिक्षकों को प्रिंसिपल के लिए उचित सम्मान दिखाना चाहिए। यह निश्चित रूप से किसी विद्यालय या कॉलेज की प्रगति में सहायता करता है। अनुशासन जीवन सामंजस्यपूर्ण और उपयोगी बनाता है| सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन के लिए अनुशासन आवश्यक है इसमें पारस्परिक सहायता और सहयोग शामिल हैं। हमें अनुशासन से घृणा नहीं करना चाहिए कि यह स्वतंत्रता पर कुछ प्रतिबंध लगाता है। यह एक गलत विचार है प्रत्येक नागरिक को स्वयं को नियंत्रित करना सीखना चाहिए।

खेल और अध्ययन दोनों में अनुशासन महत्वपूर्ण है। हमें कक्षा के कमरे और खेल के मैदान में अनुशासन की ज़रूरत है। खेल के मैदान में खिलाड़ी को खेल के नियमों का पालन करना चाहिए। उन्हें रेफरी का पालन करना चाहिए। अनुशासन स्वयं पर लगाया जाना चाहिए इसे भीतर से आना चाहिए स्वास्थ्य और जीवन में प्रगति के लिए स्वयं-अनुशासन आवश्यक है अनुशासन देखकर, हम अपनी ज़िंदगी उज्जवल बना सकते है।

जीवन की छोटी सी चीज़ों में भी अनुशासन का पालन करना चाहिए। पाबंदी एक अनुशासन का रूप है अच्छा व्यवहार भी अनुशासन का निशान है| अनुशासन की आदत हमेशा खुश बनाता है यह राष्ट्र को मजबूत करता है। अनुशासन पर कुछ भी नहीं खपता है, लेकिन अमीर लाभांश देता है एक टीम या एक सेना जो दृढ़ता से अनुशासित है, वह जीत हासिल करना निश्चित है संक्षेप में, अनुशासन सभी-पूरे और अंत-सभी जीवन है यह जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता की कुंजी है यह व्यक्तियों, समूहों और राष्ट्रों को सभी शक्ति देता है उसका मूल्य कभी भी अनुमानित नहीं होना चाहिए।

Long Essay on Discipline in Hindi – अनुशासन पर निबंध (1000 Words)

अनुशासन, आज्ञाकारिता, आत्म-नियंत्रण, कौशल आदि में खुद को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया है। ऐसे प्रशिक्षण से एक नियंत्रित, आदेश दिया व्यवहार परिणाम। अनुशासन पूरे ब्रह्मांड का आधार है उदाहरण के लिए सौर मंडल, विशिष्ट सद्भाव और सुंदरता बनाए रखने के लिए कुछ कानूनों द्वारा शासित है। इस आदेश के बिना, पूर्ण गड़बड़ी होगी ‘ अनुशासन एक सभ्य समाज की बुनियादी आवश्यकता है एक अनुशासित राष्ट्र के नागरिक सहयोग और एकता की भावना के साथ काम करते हैं।

अरस्तू ने सही कहा है, “अनुशासन समाज के द्वारा बनाई गई सभी नियमों के लिए आज्ञाकारी है।” अनुशासन को ‘बहुत कम उम्र से पैदा किया जाना चाहिए। केवल प्रतिभा और प्रतिभा सफलता हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अनुशासन को खेलने के लिए समान रूप से एक महत्वपूर्ण भूमिका है। यह समन्वय को प्रभावी करने के लिए एक मानसिक संकायों का उपयोग करता है जो इष्टतम परिणाम देता है। एक अनुशासित व्यक्ति में प्रतिभा फूल ‘ स्वतंत्रता हमारे समाज में बेहद पोषित और बहुमूल्य विशेषाधिकार है। लेकिन किसी भी प्रणाली के लिए पूर्ण स्वतंत्रता व्यावहारिक नहीं है|

अनुशासन हमारे लिए कुछ प्रतिबंध लगाता है, जो कि समाज के हित में जरूरी होता है अनुशासन केवल वांछनीय नहीं बल्कि अपरिहार्य भी है जहाँ भी अनुशासन और मानवीय आचरण का विनियमन अनुपस्थित है, नैतिक और भौतिक बिगड़ता सेट होता है। अनुशासन की अनुपस्थिति का मतलब विनाश या क्षय है। क्षय को रोकने के लिए, आम हित में और आम अच्छे के लिए अनुशासन लगाया जाना चाहिए। शैक्षिक संस्थानों में अनुशासन के महत्व को अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त है।

छात्रों के प्रतिबंध और स्वतंत्रता के बीच उचित संतुलन होना चाहिए। शैक्षिक संस्थानों को छात्रों को ज्ञान प्राप्त करने में सक्षम बनाने के लिए शांतिपूर्ण और शांत वातावरण सुनिश्चित करना होगा। लेकिन छात्रों के बीच में “असंतोष बढ़ रहा है“, बड़े पैमाने पर, इस असंतोष के कारण, हमने देखा है कि हमारे स्कूलों और कॉलेजों में अनुशासन काफी कम हो गए हैं। छात्रों को अपने शिक्षकों से अपमान नहीं हुआ है। वे कक्षाओं में दुर्व्यवहार करते हैं। अपने हाथों में कानून, सरकार और साथ ही शैक्षिक अधिकारियों को शैक्षिक संस्थानों में वातावरण में सुधार करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

विद्यालयों में अनुशासन सुनिश्चित करना, हिंसा और बर्बरता की प्रवृत्ति को रोक सकता है और छात्रों को उनकी पढ़ाई में बेहतर ध्यान केंद्रित करने में मदद कर सकता है और भावी कॅरिअर, परिवार में भी अनुशासन महत्वपूर्ण है। माता-पिता अपने बच्चों को एक सुखद, अनुशासित माहौल में उठाना चाहिए। उन्हें सही मूल्यों को ध्यान में रखना चाहिए और उन्हें समय और व्यवस्था रखने के महत्व को सिखाना चाहिए। उन्हें स्वयं को व्यवस्थित जीवन का नेतृत्व करना चाहिए और उन भूमिका-मॉडल होने चाहिए जिनके बच्चों का अनुकरण किया जा सकता है। अनुशासित और सुखी घरों में बढ़ रहे बच्चे जिम्मेदार वयस्क बनते हैं।

लेकिन तलाकशुदा माता-पिता और टूटे हुए घरों के बच्चों को असुरक्षित महसूस होता है और आम तौर पर अनुशासनहीन होते हैं एक राष्ट्र की ताकत अनुशासन में निहित है राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय कल्याण के रीढ़ के रूप में अनुशासन को माना जाता है। अनुशासित देशों के नागरिक अधिक संगठित होते हैं, वे आसानी से काम कर सकते हैं और एकता, भाईचारे और सहयोग की भावना से परिपूर्ण हैं। अनुशासन राष्ट्र प्रगति करने, बाहरी आक्रमणों से लड़ने और एकजुट रहने में मदद करता है। देश में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार ने कानून का पालन किया। कानूनों को नागरिकों को अनुशासन के लिए लागू किया जाता है ताकि देश में शांति और सद्भाव कायम हो। इतिहास ने दिखाया है कि तानाशाह ऐसे कट्टर अनुशासनात्मक हैं क्योंकि लोगों के लिए बुनियादी अधिकारों और स्वतंत्रता के अनुदान का दृढ़तापूर्वक विरोध है। वे अपने विषयों से अंधे, आज्ञाकारी आज्ञाकारी मानना चाहते हैं।

जर्मनी में हिटलर और इटली में मुसोलिनी ने एक ही विश्वास पर सवार होकर कहा कि कड़े, अमानवीय अनुशासन एक राष्ट्र के लिए एकमात्र रास्ता है। जाहिर है, वे मानवाधिकार और स्वतंत्रता के बड़े पैमाने पर उल्लंघन की कीमत पर लागू अनुशासन के लिए बर्खास्त किए गए थे। अनुशासन व्यक्तिगत स्वार्थ की वापसी का कभी मतलब नहीं हो सकता इसे सही तरीके से अपनी आजादी का इस्तेमाल करने के लिए दिशानिर्देश प्रदान करना चाहिए। यह केवल तभी संभव है जब नागरिक न तो भूमि के कानून का पालन करते हैं। अनुशासन सैन्य संगठनों की जीवन रेखा है सशस्त्र बलों ने एक निश्चित आचार संहिता का पालन किया है जो देश को वफादारी की मांग करता है और एक के वरिष्ठ अधिकारियों के पास भी होता है।

यह एक आपात स्थिति से निपटने के लिए सहभागिता और तत्परता की भावना की मांग करता है। अपने कमांडर के आदेशों का पालन करने के लिए यह एक सैनिक का कर्तव्य है दुश्मन के खिलाफ कोई सेना एक बहादुर मोर्चा नहीं रख सकती है, अगर उसे अनुशासन का अभाव है। खेल और खेल में भी अनुशासन आवश्यक है एक खिलाड़ी को किसी विशेष गेम के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। वह नियमों के सेट के खिलाफ नहीं खेल सकते। टीम में खिलाड़ियों को एक इकाई के रूप में कार्य करना चाहिए और उनके कप्तान का पालन करना चाहिए। एक राष्ट्र की सामाजिक और राजनीतिक कल्याण के लिए अनुशासन बहुत महत्वपूर्ण है। कई सरकारी कार्यालयों में, कोई यह देख सकता है कि यह काम एक गैर-जिम्मेदार तरीके से किया जाता है।

अगर कर्मचारी अपने समर्पण के साथ कर्तव्य करते हैं और एक संगठित ढंग से काम करते हैं तो हालात में सुधार होगा। यह तभी होगा जब वे ‘आत्म-अनुशासन‘ को लागू करें जीवन के हर पहलू में अनुशासन है कि जापान और चीन को आर्थिक दिग्गज बना दिया है कि वे नए विश्व व्यवस्था में हैं। लोग अपने अनुशासनहीन व्यवहार से सार्वजनिक स्थानों में अराजकता बना सकते हैं। आदेश और शिष्टाचार की कमी जबकि बोर्डिंग बसों और ट्रेनों में दुर्घटनाओं और विवादों का परिणाम होता है। ईव-टीझन हमारे युवाओं के अनुशासन या शिष्टता की कमी का एक और उदाहरण है। अनुशासन का अभाव देश में बढ़ते अपराध ग्राफ का मूल कारण है। राजनीतिक दलों के सदस्यों को नैतिकता के एक निश्चित कोड का पालन करना चाहिए। उन्हें हमेशा अनुशासित तरीके से कार्य करना चाहिए।

अतीत में, नेताओं ने विदेशी शासन से स्वतंत्रता के लिए एक साथ लड़ाई लड़ी और अब हमारे नेताओं ने विरोधाभासी रूप से अपने आप में लड़ने की स्वतंत्रता का आनंद उठाया। दूरदर्शन पर संसदीय सत्र का प्रत्यक्ष प्रसारण दिखाता है कि हमारे सम्मानित सांसदों को कितना शर्मनाक है, अवास्ट हाउस के अंदर है। आम आदमी ने राजनीतिक व्यवस्था में विश्वास खोना शुरू कर दिया, जो सकल अनुशासनहीनता का पुनर्मिलन करता है। अनुशासन के बिना कोई वैज्ञानिक उन्नति, कोई औद्योगिक या तकनीकी प्रगति, कानून का कोई भी व्यवस्थित प्रणाली, कोई अन्वेषण और कोई विकास नहीं हो सकता। निजी विकास के साथ ही राष्ट्रीय समृद्धि के लिए अनुशासन आवश्यक है इसकी अनुपस्थिति विफलता, हार और पिछड़ेपन के कारण हो सकती है।

सभी नागरिकों को कानून द्वारा निर्धारित नियमों और विनियमों का पालन करना चाहिए। अनुशासन का अर्थ है, वास्तव में, अपनी ज़िम्मेदारी का पूर्ण अहसास। स्वतंत्रता और अनुशासन के बीच उचित संतुलन होना चाहिए। अनुशासन के संयम को सामाजिक भले के लिए तैयार किया जाना चाहिए, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए, साथ ही, अत्यधिक रोकथाम अनिवार्य रूप से मानवीय आजादों के क्षरण को नहीं लेते हैं। जो लोग स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रति शत्रुता पर कानून को बांटते हैं, जाहिरा तौर पर स्वतंत्रता और अनुशासन की सच्ची अवधारणा को समझने में विफल होते हैं। राज्य केवल न्याय और सभी के लिए अवसर की समानता प्रदान करने के लिए कानूनों के माध्यम से कार्य करता है। इसलिए, इस बात का तथ्य यह है कि अनुशासन निष्पक्ष खेल सुनिश्चित करता है जो बदले में वास्तविक आजादी की गारंटी देता है।

हम आशा करते हैं कि आप इस निबंध ( Short Essay on Discipline in Hindi Language – अनुशासन पर निबंध )को पसंद करेंगे।

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