भारत के उपराष्ट्रपति की शक्तियां तथा कार्य 

भारत के उपराष्ट्रपति की शक्तियां तथा कार्य

भारत के उपराष्ट्रपति की शक्तियां तथा कार्य : संवैधानिक स्थिति: भारत के उपराष्ट्रपति  का पद देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है। 

भारत के उपराष्ट्रपति की शक्तियां तथा कार्य

  • संवैधानिक प्रावधान:भारत के उपराष्ट्रपति के पद का उल्लेख भारत के संविधान के भाग V में अध्याय I ( कार्यपालिका) के  अंतर्गत किया गया है।
    • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 में उपराष्ट्रपति के पद का उल्लेख है।
    • संविधान के अनुच्छेद 63-73 भारत के उपराष्ट्रपति की अर्हता, निर्वाचन तथा पदच्युति से संबंधित हैं।
  • संवैधानिक स्थिति:भारत के उपराष्ट्रपति  का पद देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।
  • वर्तमान उपराष्ट्रपति:मुप्पवरपु वेंकैया नायडू भारत के वर्तमान उपराष्ट्रपति तथा राज्यसभा के सभापति हैं।

भारत के उपराष्ट्रपति की प्रमुख शक्तियां तथा कार्य

  • राज्य सभा के पदेन सभापति:इस क्षमता से उनकी शक्तियां तथा कार्य लोकसभा के अध्यक्ष के समरूप होते हैं।
    • इस संबंध में, यह अमेरिकी उपराष्ट्रपति के समान है, जो सीनेट (अमेरिकी विधायिका के उच्च सदन) के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य करता है।
    • राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हुए या राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन करते हुए, उपराष्ट्रपति राज्य सभा के सभापति के पद के कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करता है।
    • इस अवधि के दौरान, उन कर्तव्यों का निर्वहन राज्यसभा के उपसभापति द्वारा किया जाता है।
  • रिक्ति की स्थिति में राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है:उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है जब राष्ट्रपति के कार्यालय में रिक्ति होती उनसे संबंधित निम्नलिखित कारणों से होती है-
    • त्यागपत्र,
    • निष्कासन,
    • मृत्यु या अन्यथा।
  • अधिकतम अवधि जिसके लिए उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर सकता है:वह  मात्र छह माह की की अधिकतम अवधि के लिए राष्ट्रपति के रूप में कार्य कर सकता है, जिसके भीतर एक नए राष्ट्रपति का  निर्वाचन कराना अनिवार्य होता है।
  • राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन:जब राष्ट्रपति अनुपस्थिति, अस्वस्थता अथवा किसी अन्य कारण से अपने कार्यों का निर्वहन करने में असमर्थ  होते हैं, तो उपराष्ट्रपति अपने कार्यों का निर्वहन तब तक करते हैं जब तक कि राष्ट्रपति अपना पदभार पुनः ग्रहण नहीं कर लेते।

उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित विवाद 

  • उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित विवादों को मात्र भारत के सर्वोच्च न्यायालय में ही चुनौती दी जा सकती है।
  • उपराष्ट्रपति के रूप में किसी व्यक्ति के निर्वाचन को इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती है कि निर्वाचक मंडल अपूर्ण था।
  • यदि किसी व्यक्ति का उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचन सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शून्य/अविधिमान्य घोषित कर दिया जाता है, तो सर्वोच्च न्यायालय की ऐसी घोषणा की तिथि से पूर्व उसके द्वारा संपादित किए गए कार्य अमान्य नहीं होते हैं।

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