विदाई संभाषण | Vidai Sambhashan Class 11

विदाई संभाषण | Vidai Sambhashan Class 11

विदाई संभाषण | Vidai Sambhashan Class 11 : शिवशंभु के पास दो गाय थी। किसी कारणवश शिवशंभु ने अपनी बलशाली गाय को किसी पुरोहित को दे दिया किंतु इससे कमजोर गाय खुश न होकर इतनी दुखी हुई कि उसने चारा भी नहीं छुआ।

विदाई संभाषण | Vidai Sambhashan Class 11

प्रश्न 1. शिवशंभु की दो गायों की कहानी के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

शिवशंभु की दो गाय की कहानी के माध्यम से लेखक हिंदुस्तान की आपसी प्रेम, मेलजोल व अच्छे व्यवहार की ओर संकेत करना चाहता है। आपसी प्रेम-भाव के कारण विदाई का समय बहुत दुखदायी होता है। इसका दृष्टांत लेखक ने दो गायों के माध्यम से दिया है। शिवशंभु के पास दो गाय थी। किसी कारणवश शिवशंभु ने अपनी बलशाली गाय को किसी पुरोहित को दे दिया किंतु इससे कमजोर गाय खुश न होकर इतनी दुखी हुई कि उसने चारा भी नहीं छुआ। इससे हमें पता चलता है कि पशु-पक्षी भी विदाई के समय दुःखी हो जाते हैं।

प्रश्न 2. आठ करोड़ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद न करने की प्रार्थना पर आपने जरा भी ध्यान नहीं दिया- यहाँ किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?

इस कथन द्वारा लेखक ने बंगाल विभाजन की ओर संकेत किया है। लॉर्ड कर्जन के कार्यों में सबसे मुख्य कार्य बंगाल विभाजन ही था। 7 जुलाई 1905 को इस योजना की सरकारी घोषणा की गई। 6 अक्टूबर 1905 को इस योजना को लागू किया गया। ऊपरी तौर पर यह कदम प्रशासन की कुशलता की दृष्टि से उठाया गया था किंतु इसका वास्तविक उद्देश्य बंगाल में राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर बनाना तथा हिंदू मुसलमानों में फूट डालना था।

प्रश्न 3. लॉर्ड कर्जन को इस्तीफा क्यों देना पड़ा?

लॉर्ड कर्जन 1899 से 1904 तथा 1904 से 1905 तक दो बार वायसराय रहे। सारी जनता इनके शासन से दुखी थी। उन्होंने मनपसंद अंग्रेज सदस्यों को पदों पर नियुक्त करवाना चाहा। उनकी यह इच्छा पूरी न हो सकी तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

प्रश्न 4. विचारिए तो, क्या शान आपकी इस देश में थी और अब क्या हो गई! कितने ऊँचे होकर आप कितने नीचे गिरे!- आशय स्पष्ट कीजिए।

वायसराय लॉर्ड कर्जन का पद भारत देश में सम्मानित था किंतु उनके द्वारा देश में किए गए मनमानीय शासन से भारतीयों को हमेशा दुखी होना पड़ा। उन्होंने अपने शासनकाल में विकास के अनेक कार्य किए तथा नए-नए आयोग बनाए किंतु इन सभी का लाभ अंग्रेजों के हित में था। इसलिए उनके बारे में यह कहा गया है। इस पद को संभालते समय उनकी अलग शान थी किंतु ठीक कर्तव्यों का पालन न कर सकने के कारण उन्हें देश-विदेश दोनों जगह पर नीचा देखना पड़ा।

प्रश्न 5. आपके और यहाँ के निवासियों के बीच में कोई तीसरी शक्ति और भी है- यहाँ तीसरी शक्ति किसे कहा गया है?

आपके वहाँ के निवासियों के बीच तीसरे शक्ति भी है। लेखक ने इस कथन में तीसरी शक्ति ईश्वर को कहा है। यह शक्ति कभी न कभी न्याय अवश्य करती है। लॉर्ड कर्जन को भी अत्याचार का फल भुगतना पड़ा। परिणामस्वरूप अधिक समय तक वे वायसराय जैसे ऊँचे पद पर न रह सके। परमात्मा का यह न्याय ही था जो कर्जन को इस्तीफा देना पड़ा।

विदाई संभाषण | Vidai Sambhashan Class 11

प्रश्न 1: ‘विदाई-संभाषण’ पाठ का प्रतिपादय स्पष्ट करें।

उत्तर- विदाई संभाषण पाठ वायसराय कर्जन जो 1899-1904 व 1904-1905 तक दो बार वायसराय रहे, के शासन में भारतीयों की स्थिति का खुलासा करता है। यह अध्याय शिवशंभु के चिट्टे का अंश है। कर्जन के शासनकाल में विकास के बहुत कार्य हुए, नए नए आयोग बनाए गए, किंतु उन सबका उद्देश्य शासन में गोरों का वर्चस्व स्थापित करना तथा इस देश के संसाधनों का अंग्रेजों के हित में सर्वाधिक उपयोग करना था। कर्ज़न ने हर स्तर पर अंग्रेजों का वर्चस्व स्थापित करने की चेष्टा की। वह सरकारी निरंकुशता का पक्षधर था। लिहाजा प्रेस की स्वतंत्रता तक पर उसने प्रतिबंध लगा दिया। अंततः कौंसिल में मनपसंद अंग्रेज सदस्य नियुक्त करवाने के मुद्दे पर उसे देश विदेश दोनों जगहों पर नीचा देखना पड़ा। क्षुब्ध होकर उसने इस्तीफा दे दिया और वापस इंग्लैंड चला गया।

लेखक ने भारतीयों की बेबसी, दुख एवं लाचारी को व्यंग्यात्मक ढंग से लॉर्ड कर्जन की लाचारी से जोड़ने की कोशिश की है। साथ ही यह बताने की कोशिश की है कि शासन के आततायी रूप से हर किसी को कष्ट होता है चाहे वह सामान्य जनता हो या फिर लॉर्ड कर्जन जैसा वायसराय। यह निबंध भी उस समय लिखा गया है जब प्रेस पर पाबंदी का दौर चल रहा था। ऐसी स्थिति में विनोदप्रियता, चुलबुलापन, संजीदगी, नवीन भाषा प्रयोग एवं रवानगी के साथ यह एक साहसिक गद्य का नमूना भी है।

प्रश्न 2. कैसर, ज़ार तथा नादिरशाह पर टिप्पणियाँ लिखिए।

उत्तर- कैसर- यह शब्द रोमन तानाशाह जूलियस सीजर के नाम से बना है। यह शब्द तानाशाह जर्मन शासकों के लिए प्रयोग होता था।
जार- यह भी जूलियस सीजर से बना शब्द है जो विशेष रूप से रूस के तानाशाह शासकों (16वीं सदी से 1917 तक) के लिए प्रयुक्त होता था। इस शब्द का पहली बार बुल्गेरियाई शासक (913 में) के लिए प्रयोग हुआ था।
नादिरशाह यह 1736 से 1747 तक ईरान का शाह रहा। तानाशाही स्वरूप के कारण ‘नेपोलियन ऑफ परशिया’ के नाम से भी जाना जाता था। पानीपत के तीसरे युद्ध में अहमदशाह अब्दाली को नादिरशाह ने भी आक्रमण के लिए भेजा था।

प्रश्न 3: राजकुमार सुल्तान ने नरवरगढ़ से किन शब्दों में विदा ली थी?

उत्तर- राजकुमार सुल्तान ने नरवरगढ़ से विदा लेते समय कहा-प्यारे नरवरगढ़ मेरा प्रणाम स्वीकार ले। आज मैं तुझसे जुदा होता हैं। तू मेरा अन्नदाता है। अपनी विपद के दिन मैंने तुझमें काटे हैं। तेरे ऋण का बदला यह गरीब सिपाही नहीं दे सकता। भाई नरवरगढ़ यदि मैंने । जानबूझकर एक दिन भी अपनी सेवा में चूक की हो, यहाँ की प्रजा की शुभ चिंता न की हो, यहाँ की स्त्रियों को माता और बहन की दृष्टि से न देखा हो तो मेरा प्रणाम न ले, नहीं तो प्रसन्न होकर एक बार मेरा प्रणाम ले और मुझे जाने की आज्ञा दे।’

प्रश्न 4: ‘विदाई-संभाषण’ तत्कालीन साहसिक लेखन का नमूना है। सिदध कीजिए।

उत्तर- विदाई संभाषण व्यंग्यात्मक, विनोदपूर्ण, चुलबुला, ताजगीवाला गद्य हैं। यह गद्य आततायी को पीड़ा की चुभन का अहसास कराता है। इससे यह नहीं लगता कि कर्जन ने प्रेस पर पाबंदी लगाई थी। इसमें इतने व्यंग्य प्रहार हैं कि कठोर-से-कठोर शासक भी घायल हुए बिना नहीं रह सकता। इसे साहसिक लेखन के साथ साथ आदर्श भी कहा जा सकता है।

प्रश्न 5: कर्जन के कौन कौन से कार्य क्रूरता की सीमा में आते हैं?

उत्तर- कर्जन के निम्नलिखित कार्य क्रूरता की सीमा में आते हैं।

(क) प्रेस पर प्रतिबंध।

(ख) करोड़ों लोगों की विनती के बावजूद बंगाल का विभाजन।

(ग) देश के संसाधनों का अंग्रेजी हित में प्रयोग।

(घ) अंग्रेजों का वर्चस्व स्थापित करना।

 

विदाई संभाषण Vidai Sambhashan Class 11 Hindi MCQ Question Answer-Aroh NCERT वैकल्पिक प्रश्न

1. ‘विदाई-संभाषणपाठ के लेखक कौन हैं?

A. प्रेमचंद
B. बालमुकुंद गुप्त
C. कृष्णा सोबती
D. सत्यजित राय

ANSWER= B. बालमुकुंद गुप्त

 

2.लेखक ने यह विदाई-संभाषण किस अंग्रेज शासक की विदाई के समय लिखा था?

A. लार्ड विलियम
B. लार्ड हैस्टिग्ज़
C. लार्ड कार्नवालिस
D. लॉर्ड कर्जन

ANSWER= D. लॉर्ड कर्जन

 

3. लेखक ने तीसरी शक्ति किसे कहा है?

A. वायसराय (लॉर्ड कर्ज़न) को
B. भारतीय जनता को
C. ईश्वर को
D. अंग्रेज सरकार को

ANSWER= C. ईश्वर को

 

4. लेखक के अनुसार कौन-सा समय करुणोत्पादक होता है?

A. जन्म का
B. मृत्यु का
C. बिछुड़ने का
D. मिलन का

ANSWER= C. बिछुड़ने का

 

5. बिछुड़ने के समय मन में किस रस का आविर्भाव होता है?

A. वियोग रस
B. शांत रस
C. हास्य रस
D. रौद्र रस

ANSWER= A. वियोग रस

 

6. शिवशंभु के पास कितनी गायें थीं?

A. दो
B. तीन
C. चार
D. पाँच

ANSWER= A. दो

 

7. शिवशंभु ने अपनी कौन-सी गाय पुरोहित को दान में दे दी थी?

A. कमज़ोर
B. शक्तिशाली
C. बिना सींग वाली
D. बिना दूध देने वाली

ANSWER= B. शक्तिशाली

 

8. लॉर्ड कर्ज़न के शासनकाल रूपी नाटक का अंत कैसा था?

A. सुखांत
B. हास्यास्पद
C. दुःखांत
D. अधूरा

ANSWER= C. दुःखांत

 

9. इस पाठ में सूत्रधारशब्द किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

A. लेखक के लिए
B. लॉर्ड कर्जन के लिए
C. ईश्वर के लिए
D. इनमें से कोई नहीं

ANSWER= B. लॉर्ड कर्जन के लिए

 

10. “किंतु पर्दे के पीछे एक और ही लीलामय की लीला हो रही है” इस वाक्य में लीलामयकिसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

A. लॉर्ड कर्जन
B. लेखक
C. शिवशंभु
D. ईश्वर

ANSWER= D. ईश्वर

 

11. ‘नींद और भूख हराम करनाका अर्थ है-

A. नींद और भूख समाप्त होना
B. नींद और भूख में आराम करना
C. परेशानी में डालना
D. आराम करना

ANSWER= C. परेशानी में डालना

 

12. दिल्ली में किस राजा की प्रार्थना पर नादिरशाह ने कत्लेआम रोक दिया था?

A. अकबर
B. शाहजहाँ
C. औरंगजेब
D. आसिफ़जाह

ANSWER= D. आसिफ़जाह

 

13, बंगाल विभाजन किस वायसराय ने किया था?

A. लॉर्ड डलहौजी
B. लॉर्ड विलियम
C. लॉर्ड कर्जन
D. लॉर्ड कार्नवालिस

ANSWER= C. लॉर्ड कर्जन

 

14. लॉर्ड कर्जन का स्वभाव कैसा था?

A. मधुर
B. विनम्र
C. जिद्दी
D. उदार

ANSWER= C. जिद्दी

 

15. दिल्ली में किस राजा की प्रार्थना पर नादिरशाह ने कत्लेआम रोक दिया था?

A. अकबर
B. शाहजहाँ
C. औरंगजेब
D. आसिफ़जाह

ANSWER= D. आसिफ़जाह

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