नाटक के तत्व

नाटक के तत्त्व

नाटक के तत्व | Natak ke tattav नाटक के तत्व – नाटक साहित्य की प्राचीनतम विधा है। नाटक का अभिनय रंगमंच पर होता है, उसे देखने से दर्शक के हृदय में यथा भाव जाग्रत होते हैं, इसलिए इसे संस्कृत में दृश्य काव्य की संज्ञा दी गई है। परन्तु यहाँ हमें नाटक को साहित्य की विधा … Read more

आशा का अंत : बालमुकुंद गुप्त

आशा का अंत : बालमुकुंद गुप्त

आशा का अंत : बालमुकुंद गुप्त ( Asha Ka Ant : Balmukund Gupt )  ‘आशा का अंत’ बालमुकुंद गुप्त द्वारा लिखित एक व्यंग्य लेख है जो ब्रिटिश सरकार की शोषणकारी नीतियों व कुशासन पर तीखा प्रहार करता है । आशा का अंत : बालमुकुंद गुप्त ( Asha Ka Ant : Balmukund Gupt ) माई लार्ड! … Read more

गद्यांश की व्याख्या कैसे करें 

गद्यांश की व्याख्या कैसे करें

गद्यांश की व्याख्या कैसे करें गद्यांश की व्याख्या : अधिकांश बच्चे इस प्रश्न को छोड़ देते हैं या आधा – अधूरा हल करते हैं।  यह प्रश्न कठिन होते हुए भी सरल है , बच्चों को यह पता नहीं होता कि गद्यांश किस पाठ से लिया गया है, इसके रचनाकार या लेखक कौन हैं इसलिए उनके … Read more

लोक साहित्य की विशेषताएँ

लोक साहित्य की विशेषताएँ

लोक साहित्य की विशेषताएँ लोक साहित्य की विशेषताएँ: लोक साहित्य वह साहित्य है जो जनमानस की चित्तवृत्तियों से संबंधित है।  यह मानव मन की उपज है। लोक साहित्य शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है  लोक और साहित्य।  लोक का अर्थ है जन सामान्य वर्ग और साहित्य का अर्थ है उस जन सामान्य वर्ग की संपूर्ण … Read more

चंद्रगुप्त का चरित्र चित्रण

चंद्रगुप्त का चरित्र चित्रण

चंद्रगुप्त का चरित्र चित्रण ( ध्रुवस्वामिनी ) चंद्रगुप्त का चरित्र चित्रण:  ‘ध्रुवस्वामिनी’ जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक ऐतिहासिक नाटक है । नाटक के शीर्षक से ही पता चलता है कि नाटक का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पात्र ध्रुवस्वामिनी है । नाटक के पुरुष पात्रों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण पात्र चंद्रगुप्त, रामगुप्त,  शिखर स्वामी और शकराज हैं । नाटक में … Read more

ध्रुवस्वामिनी का चरित्र चित्रण

ध्रुवस्वामिनी का चरित्र चित्रण

ध्रुवस्वामिनी का चरित्र चित्रण ध्रुवस्वामिनी का चरित्र चित्रण : ध्रुवस्वामिनी जयशंकर प्रसाद कृत ध्रुवस्वामिनी नाटक का सबसे प्रमुख तथा केंद्रीय पात्र है । ध्रुवस्वामिनी का चरित्र चित्रण | dhruvswamini ka charitr chtran संपूर्ण नाटक की कथा ध्रुवस्वामिनी के इर्द-गिर्द घूमती है । वह चंद्रगुप्त की वाग्दत्ता पत्नी है लेकिन रामगुप्त शिखर स्वामी के षड्यंत्र से … Read more

लोक साहित्य का अर्थ एवं परिभाषाएँ

लोक साहित्य का अर्थ एवं परिभाषाएँ

लोक साहित्य का अर्थ एवं परिभाषाएँ। लोक साहित्य का अर्थ एवं परिभाषाएँ: साहित्य मानव मन की प्रतिछवि है।  यह मानव मन में आने वाले भाव,  उतार-चढ़ाव,  सामाजिक स्थितियों तथा विभिन्न परिस्थितियों का उद्घाटन करने का माध्यम है। साहित्य को दो वर्गों में विभाजित किया गया है, शिष्ट साहित्य और लोक साहित्य।  लोक साहित्य वास्तव में एक … Read more

Swami Vivekananda Speech

Swami Vivekananda Speech

Swami Vivekananda Speech : स्वामी विवेकानंद के शिकागो में दिए गए भाषण Swami Vivekananda Speech : स्वामी विवेकानंद के शिकागो में दिए गए भाषण Swami Vivekananda Speech : अमेरिका के बहनो और भाइयो, आपके इस स्नेहपूर्ण और जोरदार स्वागत से मेरा हृदय अपार हर्ष से भर गया है। मैं आपको दुनिया की सबसे प्राचीन संत … Read more

स्नेह निर्झर बह गया है कविता

स्नेह निर्झर बह गया है कविता

स्नेह निर्झर बह गया है कविता का भावार्थ सारांश प्रश्न उत्तर स्नेह निर्झर बह गया है निराला कविता का सारांश मूल भाव प्रश्न उत्तर sneh nirjhar bah gya hai nirala स्नेह निर्झर बह गया है कविता का भावार्थ व्याख्या स्नेह निर्झर बह गया है कविता निराला स्नेह निर्झर बह गया है कविता का भावार्थ स्नेह … Read more

छंद किसे कहते हैं

छंद किसे कहते हैं?

छंद किसे कहते हैं? || मात्रिक – छप्पय एवं वार्णिक छंद – कवित्त, सवैया || Chhand – Chhappay, Kavitta, Savaiya छंद किसे कहते हैं : कविता के रचना-विधान को ‘छंद‘ कहते हैं। छंद कविता की गीतात्मकता में वृद्धि करते हैं। छंद किसे कहते हैं किसी निश्चित क्रम में गति और यति का निर्वाह करते हुए संगीतमय … Read more

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