सत्ता की साझेदारी
कक्षा 10 राजनीति विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (लोकतांत्रिक राजनीति II) का अध्याय 1, "सत्ता की साझेदारी", यह जाँचता है कि लोकतंत्र में सरकारी शक्ति को विभिन्न अंगों, स्तरों और सामाजिक समूहों के बीच कैसे बाँटा जाता है ताकि निरंकुशता को रोका जा सके और स्थिरता बनाए रखी जा सके — इसके लिए बेल्जियम और श्रीलंका के विपरीत उदाहरणों का उपयोग किया गया है।
- 1बेल्जियम के संवैधानिक संशोधनों ने डच-फ्रेंच समान प्रतिनिधित्व, राज्य सरकारों और सांस्कृतिक/शैक्षिक मामलों के लिए सामुदायिक सरकारों वाली संघीय व्यवस्था बनाई।
- 2श्रीलंका की बहुसंख्यकवादी नीतियों (1956 का सिंहला-मात्र अधिनियम, तरजीही नियुक्तियाँ, बौद्ध धर्म को संरक्षण) ने तमिलों को अलग-थलग किया और गृहयुद्ध को जन्म दिया — बेल्जियम के समायोजन मॉडल के बिल्कुल विपरीत।
- 3सत्ता की साझेदारी के विवेकपूर्ण कारण: टकराव कम करना, निरंकुशता रोकना, राजनीतिक स्थिरता और एकता सुनिश्चित करना।
- 4नैतिक कारण: लोकतांत्रिक शासन में उन लोगों को भी भागीदारी चाहिए जो उससे प्रभावित हों; नागरिकों को अपने शासन के बारे में परामर्श दिए जाने का अधिकार है।
- 5सत्ता की साझेदारी के चार रूप: क्षैतिज (सरकारी अंग), ऊर्ध्वाधर (केंद्र/राज्य स्तर), सामाजिक समूहों के बीच (आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र, सामुदायिक सरकारें), और राजनीतिक दलों के बीच (गठबंधन सरकारें)।



