संसाधन एवं विकास
कक्षा 10 भूगोल एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (समकालीन भारत II) का अध्याय 1, "संसाधन एवं विकास", यह बताता है कि हमारे पर्यावरण में उपलब्ध वह सब कुछ जो तकनीकी रूप से सुलभ, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य हो, मानव के प्रौद्योगिकी और संस्थाओं के साथ अंतर्क्रिया के माध्यम से संसाधन बन जाता है।
- 1संसाधनों का वर्गीकरण — उत्पत्ति (जैविक/अजैविक), समाप्यता (नवीकरणीय/अनवीकरणीय), स्वामित्व (व्यक्तिगत/सामुदायिक/राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय) और विकास की अवस्था के आधार पर
- 2संसाधन नियोजन में संसाधनों की पहचान, सूचीकरण और उनका प्रौद्योगिकी, कौशल तथा संस्थागत क्षमता से मिलान किया जाता है
- 3जलोढ़ मिट्टी उत्तरी मैदानों में प्रमुख है; काली मिट्टी दक्कन के पठार पर कपास के लिए उपयुक्त है; लेटेराइट मिट्टी उष्णकटिबंधीय जलवायु में तीव्र निक्षालन से बनती है
- 4भारत में भूमि उपयोग — शुद्ध बोया क्षेत्र 45.64%, वन 23.41%, स्थायी चारागाह 5.40%, शेष गैर-कृषि उपयोग
- 5मिट्टी का कटाव मानवीय गतिविधियों (वनोन्मूलन, अतिचारण, खनन, दोषपूर्ण कृषि) और प्राकृतिक शक्तियों (जल, वायु, हिमनद) से होता है



