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कक्षा 11 जीव विज्ञान

अध्याय 15: शरीर द्रव तथा परिसंचरण

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अवलोकन

सारांश

कक्षा 11 जीव विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 15, "शरीर द्रव तथा परिसंचरण", रक्त एवं लसिका को परिवहन द्रव के रूप में प्रस्तुत करता है — रक्त में प्लाज़्मा और रक्त कणिकाएँ (RBC, WBC, बिम्बाणु) होती हैं, लसिका ऊतक द्रव से बनती है, और परिसंचरण तंत्र निरंतर कोशिकाओं तक ऑक्सीजन एवं पोषक पदार्थ पहुँचाता है तथा अपशिष्ट हटाता है।

  • परिवहन द्रव के रूप में रक्त और लसिकाअध्याय रक्त को प्लाज़्मा और रक्त कणिकाओं के रूप में प्रस्तुत करता है — RBC गैसों का परिवहन करती हैं, WBC रक्षा करती हैं, बिम्बाणु थक्का बनाते हैं — जबकि ऊतक द्रव से निर्मित लसिका पोषक पदार्थों, वसा और प्रतिरक्षा कोशिकाओं को ले जाती है।
  • स्व-नियमित पंपअध्याय में नोडल ऊतक द्वारा संचालित चार-कक्षीय हृदय की व्याख्या है — SA नोड पेसमेकर की तरह कार्य करता है, और हृदय चक्र का सिस्टोल-डायस्टोल वाल्वों की सहायता से रक्त को एक ही दिशा में प्रवाहित रखता है।
  • द्विपरिसंचरणअध्याय यह समझाता है कि मनुष्यों में दो पृथक परिपथ क्यों होते हैं — फुफ्फुसीय परिसंचरण अशुद्ध रक्त को फेफड़ों तक भेजता है और दैहिक परिसंचरण शुद्ध रक्त को शरीर में पहुँचाता है, जिससे दोनों रक्त धाराएँ आपस में नहीं मिलतीं।
मुख्य बातें

मुख्य बिंदु और सूत्र

  1. 01रक्त में प्लाज़्मा (55%) और रक्त कणिकाएँ होती हैं — RBC (गैस परिवहन), WBC (प्रतिरक्षा), बिम्बाणु (थक्का निर्माण) — ABO और Rh प्रतिजन समूहन आधान के लिए
  2. 02SA नोड (सायनो-अलिंद नोड) हृदय का पेसमेकर है — प्रति मिनट 70-75 विद्युत आवेग उत्पन्न करता है, सामान्य हृदय गति 72 धड़कन/मिनट
  3. 03हृदय चक्र में अलिंद व निलय का सिस्टोल (संकुचन) और डायस्टोल (शिथिलन) शामिल है; वाल्व रक्त को पीछे लौटने से रोकते हैं
  4. 04द्विपरिसंचरण: फुफ्फुसीय परिसंचरण (दायाँ निलय → फेफड़े → बायाँ अलिंद) और दैहिक परिसंचरण (बायाँ निलय → शरीर के ऊतक → दायाँ अलिंद)
  5. 05लसिका एक रंगहीन ऊतक द्रव है जिसमें लसिकाणु होते हैं — प्रतिरक्षा तथा आँतों में अवशोषित पोषक पदार्थों एवं वसा के परिवहन में सहायक
  6. 06रक्त स्कंदन एंजाइमी अभिक्रियाओं की श्रृंखला से होता है — फाइब्रिनोजेन फाइब्रिन में बदलता है और चोट के स्थान पर रक्त कणिकाओं को जाल में फँसाता है
प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

01

रक्त के मुख्य घटक कौन-से हैं और उनके क्या कार्य हैं?

रक्त में प्लाज़्मा (55%) और रक्त कणिकाएँ (45%) होती हैं। प्लाज़्मा में 90-92% जल, 6-8% प्रोटीन (फाइब्रिनोजेन — थक्का निर्माण, ग्लोब्युलिन — रक्षा, एल्ब्यूमिन — परासरणी संतुलन) तथा घुले खनिज और पोषक पदार्थ होते हैं। रक्त कणिकाओं में शामिल हैं: RBC (~5-5.5 मिलियन/mm³) — हीमोग्लोबिन द्वारा ऑक्सीजन परिवहन; WBC (6,000-8,000/mm³) — न्यूट्रोफिल, लसिकाणु, इओसिनोफिल, मोनोसाइट — प्रतिरक्षा रक्षा; और बिम्बाणु (1.5-3.5 मिलियन/mm³) — रक्त स्कंदन।

02

हृदय चक्र में सिस्टोल और डायस्टोल में क्या अंतर है?

सिस्टोल हृदय कक्षों का संकुचन चरण है — पहले अलिंद सिस्टोल (दोनों अलिंद एक साथ संकुचित होते हैं) से निलय में रक्त प्रवाह 30% बढ़ता है, फिर निलय सिस्टोल (निलय संकुचित होते हैं) से रक्त फुफ्फुसीय धमनी और महाधमनी में जाता है। डायस्टोल शिथिलन का चरण है जिसमें कक्ष रक्त से भरते हैं। 0.8 सेकंड के पूर्ण हृदय चक्र में हृदय एक बार धड़कता है (स्वस्थ वयस्कों में 72 धड़कन/मिनट)।

03

मनुष्यों में द्विपरिसंचरण कैसे कार्य करता है?

द्विपरिसंचरण में दो पृथक परिपथ होते हैं: फुफ्फुसीय परिसंचरण (दायाँ निलय फुफ्फुसीय धमनी द्वारा अशुद्ध रक्त फेफड़ों को भेजता है; शुद्ध रक्त फुफ्फुसीय शिरा द्वारा बाएँ अलिंद को लौटता है) और दैहिक परिसंचरण (बायाँ निलय महाधमनी द्वारा शुद्ध रक्त सभी शरीर-ऊतकों को भेजता है; अशुद्ध रक्त महाशिरा द्वारा दाएँ अलिंद को लौटता है)। यह पृथक्करण ऑक्सीजन का कुशल वितरण सुनिश्चित करता है और दोनों रक्त धाराओं को मिलने से रोकता है।

04

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