मात्रक एवं मापन
कक्षा 11 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 1, "मात्रक एवं मापन", SI पद्धति के सात मूल आधार राशियों — लंबाई, द्रव्यमान, समय, विद्युत धारा, ताप, पदार्थ की मात्रा और ज्योति तीव्रता — तथा उनके मानक मात्रकों का परिचय देता है, साथ ही मापन की परिशुद्धता व्यक्त करने के लिए सार्थक अंकों और भौतिक समीकरणों को सत्यापित करने हेतु विमीय विश्लेषण की अवधारणाएँ प्रस्तुत करता है।
- 1SI पद्धति में सात मूल मात्रक हैं (मीटर, किलोग्राम, सेकंड, एम्पियर, केल्विन, मोल, कैंडेला); अन्य सभी मात्रक इन्हीं के व्युत्पन्न संयोजन हैं।
- 2सार्थक अंक मापन की परिशुद्धता दर्शाते हैं; जोड़/घटाव में दशमलव स्थान मिलाने तथा गुणन/भाग में न्यूनतम परिशुद्ध मान के सार्थक अंकों की संख्या मिलाने के नियम लागू होते हैं।
- 3विमाएँ वर्गाकार कोष्ठक [L], [M], [T] आदि का उपयोग करके भौतिक राशियों की प्रकृति को परिमाण से स्वतंत्र रूप से व्यक्त करती हैं।
- 4विमीय सूत्र यह बताते हैं कि आधार राशियाँ मिलकर व्युत्पन्न राशि कैसे बनाती हैं; विमीय समीकरणें सूत्रों की संगतता जाँचती हैं।
- 5विमीय विश्लेषण भौतिक राशियों के बीच संबंध निकालने और समीकरणों को सत्यापित करने में सहायक है, किंतु यह विमाहीन नियतांक जैसे T = 2π√(l/g) में 2π का निर्धारण नहीं कर सकता।
