अध्याय 2: अंकगणितीय व्यंजक
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कक्षा 7 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 2, "अंकगणितीय व्यंजक", संख्याओं और चार गणितीय संक्रियाओं से बने गणितीय वाक्यांशों को पढ़ना, लिखना, तुलना करना और मान निकालना — कोष्ठक, पदों की धारणा, तथा क्रमविनिमय, साहचर्य एवं वितरण गुणधर्मों के माध्यम से — सिखाता है।
- व्यंजक एक गणितीय वाक्यांश के रूप में — अंकगणितीय व्यंजक एक ऐसा गणितीय वाक्यांश है जिसका एक निश्चित मान होता है। विद्यार्थी =, < और > से व्यंजकों की तुलना करना सीखते हैं — पूरी गणना किए बिना, केवल संरचना देखकर।
- कोष्ठक और पद अस्पष्टता दूर करते हैं — जब एक व्यंजक में एकाधिक संक्रियाएँ हों तो कोष्ठक और 'पद' की धारणा यह तय करती है कि व्यंजक का मान कैसे निकाला जाए। कोष्ठक को भाषा के विराम चिह्न जैसा समझें।
- तीन मूलभूत गुणधर्म — अध्याय क्रमविनिमय (पदों को अदला-बदला जा सकता है) और साहचर्य गुणधर्म (किसी भी क्रम में समूहबद्ध करने पर योग समान रहता है) तथा वितरण गुणधर्म (गुणन योग/अंतर पर वितरित होता है) को स्थापित करता है।
- व्यंजकों को कुशलता से सरल करना — इन गुणधर्मों से विद्यार्थी कोष्ठक खोलना, ऋण चिह्न के बाद चिह्न बदलना और पदों को पुनर्व्यवस्थित करना सीखते हैं — जिससे बड़ी गणनाएँ मानसिक रूप से की जा सकती हैं।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01अंकगणितीय व्यंजक: +, –, ×, ÷ संक्रियाओं और संख्याओं से बना गणितीय वाक्यांश; इसका मान '=' से लिखते हैं (जैसे 13 + 2 = 15)।
- 02व्यंजकों की तुलना मानों के आधार पर =, < या > से होती है; प्रायः पूरी गणना किए बिना तर्क से तुलना संभव है।
- 03कोष्ठक: कोष्ठक के अंदर की संक्रिया पहले करें (जैसे 30 + (5×4) = 50, न कि 140)।
- 04पद: व्यंजक के वे भाग जो '+' चिह्न से अलग होते हैं; सभी घटाव को ऋणात्मक संख्याओं के योग में बदलकर पद पहचाने जाते हैं।
- 05क्रमविनिमय गुणधर्म: पद1 + पद2 = पद2 + पद1 — यह ऋणात्मक संख्याओं पर भी लागू होता है।
- 06साहचर्य गुणधर्म: पदों को किसी भी क्रम में समूहबद्ध करने पर योग समान रहता है।
- 07कोष्ठक के पहले ऋण चिह्न होने पर कोष्ठक खोलते समय अंदर के प्रत्येक पद का चिह्न बदल जाता है (जैसे 200 – (40 + 3) = 200 – 40 – 3)।
- 08वितरण गुणधर्म: a × (b + c) = a×b + a×c; इसका उपयोग कठिन गुणनों को सरल बनाने में होता है (जैसे 97 × 25 = (100–3) × 25)।
- 09कोष्ठक के पहले '+' या कोई चिह्न न हो तो अंदर के पदों के चिह्न अपरिवर्तित रहते हैं।
- 10कोष्ठक के बिना व्यंजक का मान: पहले प्रत्येक पद का मान निकालें (गुणनफल/भागफल), फिर सभी पदों को जोड़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01अंकगणितीय व्यंजक क्या होता है?
संख्याओं और संक्रियाओं (+, –, ×, ÷) से बना गणितीय वाक्यांश अंकगणितीय व्यंजक कहलाता है — जैसे 13 + 2, 20 – 4, 12 × 5। प्रत्येक व्यंजक का एक मान होता है; 13 + 2 का मान 15 है।
02पद क्या होते हैं?
व्यंजक के वे भाग जो '+' चिह्न से अलग होते हैं, पद कहलाते हैं। सभी घटावों को पहले ऋणात्मक संख्याओं के योग में बदला जाता है; जैसे 83 – 14 के पद हैं 83 और –14।
03कोष्ठक क्यों उपयोग किया जाता है?
जब एक व्यंजक में कई संक्रियाएँ हों और संक्रिया का क्रम स्पष्ट न हो तो कोष्ठक अस्पष्टता दूर करता है। जैसे 30 + 5 × 4 = 50 (पहले 5×4) या (30+5)×4 = 140 — कोष्ठक बताता है क्या पहले करें।
04कोष्ठक के बिना व्यंजक का मान कैसे निकालें?
पहले '+' चिह्न से पद पहचानें (सभी घटाव ऋणात्मक योग में बदलकर)। फिर प्रत्येक पद का मान निकालें (गुणनफल/भागफल)। अंत में सभी पदों को जोड़ें। जैसे 30 + 5×4: पद हैं 30 और 5×4=20; उत्तर = 50।
05क्रमविनिमय गुणधर्म क्या है?
पदों का क्रम बदलने पर योग नहीं बदलता: पद1 + पद2 = पद2 + पद1। यह ऋणात्मक संख्याओं पर भी लागू है — जैसे (–4) + 6 = 6 + (–4) = 2।
06साहचर्य गुणधर्म क्या है?
पदों को किसी भी तरह समूहबद्ध करने पर योग समान रहता है: (A+B)+C = A+(B+C)। जैसे (–7)+10+(–11) = –8 — चाहे किन्हीं दो पदों को पहले जोड़ें।
07वितरण गुणधर्म क्या है और इसका उपयोग कैसे होता है?
a × (b + c) = a×b + a×c। इसका उपयोग मानसिक गणना में: 97 × 25 = (100–3)×25 = 2500–75 = 2425। अध्याय में यह कठिन गुणनों को सरल बनाने का मुख्य तरीका है।
08बिना पूरी गणना किए दो व्यंजकों की तुलना कैसे करें?
पदों में अंतर देखें। जैसे 1023+125 और 1022+128 की तुलना: पहले में 1 अधिक है शुरुआत में, पर दूसरे को 3 अधिक जुड़ते हैं — इसलिए 1022+128 बड़ा है। इस प्रकार के तर्क से बड़ी गणना बचती है।
09क्या अलग-अलग व्यंजकों का मान समान हो सकता है?
हाँ। जैसे 12 को इस प्रकार लिखा जा सकता है: 10+2, 15–3, 3×4, 24÷2 — चारों व्यंजकों का मान 12 है।
10क्या गणित प्रकाश कक्षा 7 अध्याय 2 का PDF ncerthindi.com पर मुफ्त है?
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