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समाधान

अवलोकन

ध्वनि तरंगें— अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग के NCERT समाधान (अध्याय 10, NCERT कक्षा 9 विज्ञान) — हर प्रश्न और उत्तर सिर्फ़ अंतिम उत्तर नहीं, बल्कि पूरी तरह चरण-दर-चरण हल किया गया। आप ध्वनि तरंगें— अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग की पाठ्यपुस्तक का अध्याय भी पढ़ सकते हैं।

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इन समाधानों में क्या है

  • ध्वनि का संचरण — ध्वनि कंपायमान वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है और संपीडन तथा विरलन की अनुदैर्घ्य यांत्रिक तरंग के रूप में संचरित होती है — इसे पदार्थिक माध्यम की आवश्यकता होती है इसलिए यह निर्वात में नहीं चल सकती; माध्यम के कण दोलन करते हैं परंतु तरंग के साथ नहीं चलते।
  • ध्वनि तरंगों के अभिलक्षण — ध्वनि तरंग को तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति, आवर्तकाल, आयाम और चाल द्वारा वर्णित किया जाता है, जो v = λ × ν और ν = 1/T से संबंधित हैं; तरंग चाल माध्यम पर निर्भर करती है और तापमान बढ़ने के साथ बढ़ती है।
  • श्रव्य और परे — मनुष्य लगभग 20 Hz से 20,000 Hz तक सुन सकते हैं; इससे कम आवृत्ति की ध्वनि अवश्रव्य और अधिक आवृत्ति की पराश्रव्य कहलाती है — दोनों के विशिष्ट स्रोत और उपयोग हैं।
  • परावर्तन और अनुप्रयोग — ध्वनि के परावर्तन से प्रतिध्वनि और अनुरणन उत्पन्न होती है — प्रतिध्वनि के लिए न्यूनतम 17 m की दूरी आवश्यक है। पराश्रव्य तरंगें सोनार, प्रतिध्वनि-स्थापन, चिकित्सा इमेजिंग और दोष-संसूचन में उपयोगी हैं; अवश्रव्य तरंगें भूकंप और तूफान का संकेत देती हैं।
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