भौतिकी पर वापस
अवलोकन

सारांश

कक्षा 12 भौतिकी एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 13, "नाभिक", परमाणु नाभिकों की संरचना, संघटन और गुणधर्मों को समाहित करता है, जिसमें नाभिकीय बल, रेडियोऐक्टिवता, बंधन ऊर्जा तथा विखंडन और संलयन के माध्यम से ऊर्जा मोचन की व्याख्या की गई है।

  • नाभिक के भीतरयह अध्याय प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों से बने नाभिक की जाँच करता है, समस्थानिक, समभारी और समन्यूट्रॉनिक का परिचय देता है, और यह आश्चर्यजनक तथ्य सामने लाता है कि आकार चाहे जो हो, नाभिकीय घनत्व लगभग नियत रहता है।
  • द्रव्यमान, ऊर्जा और बंधनआइंस्टीन का द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध द्रव्यमान दोष की व्याख्या करता है: नाभिक अपने घटकों से हल्के होते हैं, और यह लुप्त द्रव्यमान ही नाभिकीय बंधन ऊर्जा बन जाता है जो नाभिकीय कणों को एक साथ रखती है।
  • नाभिकीय बल और रेडियोऐक्टिवताएक अल्प-परासीय बल, जो विद्युत प्रतिकर्षण से बहुत अधिक प्रबल है, नाभिकीय कणों को बाँधता है, जबकि अस्थायी नाभिक α, β और γ क्षय के माध्यम से ऊर्जा का उत्सर्जन करते हैं।
  • विखंडन और संलयनभारी नाभिकों का विभाजन (विखंडन) या हल्के नाभिकों का संयोजन (संलयन) विशाल ऊर्जा मोचित करता है — क्रमशः परमाणु रिएक्टरों और सूर्य को शक्ति देता है — रासायनिक अभिक्रियाओं से लाखों गुना अधिक।
मुख्य बातें

मुख्य बिंदु और सूत्र

  1. 01परमाणु नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन (नाभिकीय कण) होते हैं; इसकी त्रिज्या R = R0A^(1/3) से मिलती है जहाँ R0 = 1.2 fm, और नाभिकीय घनत्व लगभग 2.3 × 10¹⁷ kg/m³ होता है, जो द्रव्यमान संख्या A से स्वतंत्र है।
  2. 02द्रव्यमान दोष ΔM = [Zmp + (A−Z)mn] − M से नाभिकीय बंधन ऊर्जा Eb = ΔMc² प्राप्त होती है; प्रति नाभिकीय कण बंधन ऊर्जा A = 56 (लोहा) के निकट अधिकतम लगभग 8.75 MeV होती है।
  3. 03नाभिकीय बल अल्प-परासीय है, कूलॉम बल से बहुत अधिक प्रबल है, और न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन, प्रोटॉन-न्यूट्रॉन तथा प्रोटॉन-प्रोटॉन युगलों के बीच समान रूप से कार्य करता है।
  4. 04रेडियोऐक्टिवता में तीन प्रकार के क्षय होते हैं: α-क्षय (हीलियम नाभिक उत्सर्जित), β-क्षय (इलेक्ट्रॉन या पॉज़िट्रॉन उत्सर्जित) और γ-क्षय (उच्च-ऊर्जा फोटॉन उत्सर्जित)।
  5. 05U-235 का नाभिकीय विखंडन प्रति विखंडित नाभिक लगभग 200 MeV ऊर्जा मोचित करता है — एक सामान्य रासायनिक अभिक्रिया से लगभग दस लाख गुना अधिक।
  6. 06नाभिकीय संलयन प्रोटॉन-प्रोटॉन चक्र के माध्यम से सूर्य को शक्ति देता है, जिसमें चार हाइड्रोजन नाभिक संयुक्त होकर एक हीलियम-4 नाभिक बनाते हैं और 26.7 MeV ऊर्जा मोचित होती है।
प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

01

नाभिकीय बंधन ऊर्जा क्या है और इसकी गणना कैसे की जाती है?

नाभिकीय बंधन ऊर्जा वह ऊर्जा है जो किसी नाभिक को उसके प्रत्येक प्रोटॉन और न्यूट्रॉन में पृथक करने के लिए आवश्यक होती है। यह द्रव्यमान दोष (ΔM) को c² से गुणा करने पर मिलती है, जहाँ ΔM = [Zmp + (A−Z)mn] − M। उदाहरण के लिए, ऑक्सीजन-16 नाभिक का द्रव्यमान दोष 0.13691 u है, जो लगभग 127.5 MeV की बंधन ऊर्जा से मेल खाता है।

02

नाभिकीय विखंडन और नाभिकीय संलयन में क्या अंतर है?

विखंडन में एक भारी नाभिक (जैसे U-235) न्यूट्रॉन से टकराने पर दो मध्यम-द्रव्यमान के खंडों में विभाजित हो जाता है और प्रति घटना लगभग 200 MeV ऊर्जा मोचित होती है। संलयन में दो हल्के नाभिक (जैसे हाइड्रोजन के समस्थानिक) संयुक्त होकर भारी नाभिक बनाते हैं और ऊर्जा मोचित होती है क्योंकि उत्पाद अधिक दृढ़ता से बद्ध होता है। संलयन से सूर्य सहित तारों को शक्ति मिलती है।

03

जेम्स चैडविक ने न्यूट्रॉन की खोज कैसे की?

1932 में चैडविक ने बेरीलियम नाभिकों पर α-कण बमबारी की और एक उदासीन विकिरण देखी जो हल्के नाभिकों से प्रोटॉनों को बाहर निकाल सकती थी। ऊर्जा और संवेग के संरक्षण नियमों को लागू करके उन्होंने निर्धारित किया कि ये प्रोटॉन के लगभग बराबर द्रव्यमान के उदासीन कण हैं, जिन्हें उन्होंने न्यूट्रॉन कहा। इस खोज के लिए उन्हें 1935 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया।

04

क्या कक्षा 12 भौतिकी अध्याय 13 की एनसीईआरटी PDF निःशुल्क डाउनलोड हो सकती है?

हाँ, कक्षा 12 भौतिकी भाग II अध्याय 13 (नाभिक) की एनसीईआरटी PDF ncerthindi.com पर पूर्णतः निःशुल्क डाउनलोड की जा सकती है।

Keep learning

More chapters in भौतिकी

भौतिकी कक्षा 12 भौतिक विज्ञान की NCERT पाठ्यपुस्तक (2026-27 संस्करण) — का अध्याय 13 ऑनलाइन मुफ़्त पढ़ें: NCERT द्वारा प्रकाशित पूरा अध्याय, हर चित्र, हल किए गए उदाहरण और अभ्यास के साथ, चरण-दर-चरण समाधान, उत्तर और रिवीजन नोट्स के साथ। ऊपर दी गई NCERT PDF खोलें, या सभी NCERT कक्षा 12 पाठ्यपुस्तकें देखें।