सारांश
कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 1, "मिलकर साथ रहना", समुदाय को आपसी सहयोग, संवाद और सम्मान पर आधारित एक परस्पर निर्भर स्थान के रूप में प्रस्तुत करता है — चंदन के गाँव की यात्रा, वन महोत्सव के वृक्षारोपण उत्सव, और विभिन्न प्रदेशों की सामुदायिक परंपराओं के माध्यम से।
- समुदाय और परस्पर निर्भरता — अध्याय चंदन नामक बालक के गाँव के माध्यम से समुदाय को समझाता है। खेल का मैदान, बरगद का विशाल पेड़, विद्यालय, चिकित्सालय, बाजार और पुलिस — ये सभी सार्वजनिक स्थान पूरे समुदाय के काम आते हैं। विद्यार्थी समझते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति और स्थान एक-दूसरे से जुड़े हैं और इनकी देखभाल मिलकर करना सबकी जिम्मेदारी है।
- वन महोत्सव — वृक्षारोपण का उत्सव — वन महोत्सव भारत में प्रतिवर्ष 1 जुलाई से 7 जुलाई तक वर्षा ऋतु में मनाया जाता है। इसे 'वृक्षारोपण महोत्सव' भी कहते हैं। कहानी में चंदन के मित्र, परिवारजन और पड़ोसी मिलकर उद्यान की सफाई करते हैं, बेंच ठीक करते हैं, पथदीप सुधारते हैं और नर्सरी से लाए पौधे रोपते हैं — यह दर्शाता है कि पर्यावरण की रक्षा सामूहिक उत्तरदायित्व है।
- सहयोग और समूह-कार्य — ग्रामवासी अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करते हैं — कोई लकड़ी और कील लाता है, कोई पथदीप ठीक करता है, कोई पौधे लाता है। 2024 में छत्तीसगढ़ के कांकेर में समुदाय ने बाँस और पत्थरों से चिनार नदी पर दो दिन में एक पुल बना दिया ताकि विद्यार्थी और ग्रामीण बाढ़ में भी विद्यालय और अस्पताल पहुँच सकें।
- त्योहार और सामुदायिक बंधन — वन महोत्सव के बाद समुदाय केले के पत्तों पर सब्जी और अनाज मिलकर खाता है; पत्तों को मिट्टी में दबाने पर वे खाद बन जाते हैं। अध्याय असम का उरुका (माघ बिहू का पहला दिन, 14 जनवरी) और सिक्किम की खेताला परंपरा (फसल कटाई में सामुदायिक सहयोग) जैसे उदाहरणों से दिखाता है कि पूरे भारत में मिलकर काम करने की संस्कृति है।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01अध्याय 1 'मिलकर साथ रहना' — इकाई 1 'हमारा समुदाय' का भाग; मुख्य पात्र चंदन अपने गाँव की यात्रा कराता है
- 02सार्वजनिक स्थान — उद्यान, विद्यालय, चिकित्सालय, बाजार, सड़क — पूरे समुदाय की सामूहिक संपत्ति हैं
- 03वन महोत्सव (वृक्षारोपण महोत्सव) प्रतिवर्ष 1 जुलाई से 7 जुलाई तक मनाया जाता है
- 042024 में कांकेर, छत्तीसगढ़ के समुदाय ने चिनार नदी पर बाँस-पत्थर का पुल दो दिन में बनाया
- 05केले के पत्तों को गड्ढे में दबाने से खाद बनती है जो मिट्टी को उपजाऊ बनाती है
- 06उरुका (असम, माघ बिहू का पहला दिन, 14 जनवरी) — बाँस-घास की झोपड़ी बनाकर सामूहिक भोज
- 07खेताला (सिक्किम) — फसल कटाई के समय कृषि-विशेषज्ञ ग्रामवासी एक-दूसरे की मदद करते हैं
- 08चींटियों और मधुमक्खियों के समूह प्राकृतिक समुदाय के उदाहरण हैं — प्रत्येक की अलग भूमिका होती है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01कक्षा 4 'हमारी अद्भुत दुनिया' का अध्याय 1 'मिलकर साथ रहना' किस बारे में है?
यह अध्याय समुदाय को एक परस्पर निर्भर स्थान के रूप में समझाता है। चंदन के गाँव की यात्रा, वन महोत्सव वृक्षारोपण, और अन्य प्रदेशों की सामुदायिक परंपराओं के माध्यम से विद्यार्थी सीखते हैं कि सार्वजनिक स्थानों की देखभाल और मिलकर काम करना जीवन को बेहतर बनाता है।
02चंदन कौन है?
चंदन इस अध्याय का मुख्य पात्र है — एक बालक जो एक सुंदर गाँव में रहता है। वह पाठकों को अपने गाँव की यात्रा कराता है और दिखाता है कि खेल का मैदान, बरगद का पेड़, बाजार, और विभिन्न लोग मिलकर एक समुदाय बनाते हैं।
03वन महोत्सव क्या है और कब मनाया जाता है?
वन महोत्सव, जिसे वृक्षारोपण महोत्सव भी कहते हैं, प्रतिवर्ष 1 जुलाई से 7 जुलाई तक वर्षा ऋतु में मनाया जाता है। लोग पर्यावरण की रक्षा के लिए पेड़ लगाते हैं।
04कहानी में वन महोत्सव की तैयारी कैसे होती है?
बच्चे, परिवारजन और ग्रामवासी बरगद के पेड़ के नीचे मिलकर योजना बनाते हैं। कोई लकड़ी-कील लाकर बेंच ठीक करता है, कोई पथदीप सुधारता है, कोई नर्सरी से पौधे लाता है, और अलग-अलग समूह सफाई, रोपण, सिंचाई और भोजन का काम करते हैं।
05छत्तीसगढ़ के कांकेर का उदाहरण अध्याय में क्यों दिया गया है?
2024 में बारिश के मौसम में कांकेर, छत्तीसगढ़ के समुदाय ने मिलकर बाँस और पत्थरों से चिनार नदी पर दो दिन में एक मजबूत पुल बना दिया। इससे विद्यार्थी और ग्रामीण बाढ़ में भी विद्यालय और अस्पताल जा सकते हैं — यह सामूहिक सहयोग का वास्तविक उदाहरण है।
06सार्वजनिक स्थान क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उद्यान, विद्यालय, खेल के मैदान, बस स्टॉप और चिकित्सालय जैसे स्थान पूरे समुदाय के लिए होते हैं — खेलने, मिलने, सहायता पाने के लिए। इनकी देखभाल सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
07केले के पत्तों का भोज के बाद क्या किया जाता है?
भोज के बाद केले के पत्तों को एक गड्ढे में दबाया जाता है। अध्याय बताता है कि मिट्टी में दबे पत्ते खाद बन जाते हैं जो मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाती है।
08उरुका और खेताला क्या हैं?
उरुका असम में माघ बिहू का पहला दिन (14 जनवरी) है, जब लोग बाँस और घास की झोपड़ी (भेला घर) बनाकर सामूहिक भोज करते हैं। खेताला सिक्किम की परंपरा है जिसमें फसल कटाई के समय कृषि-विशेषज्ञ ग्रामवासी एक-दूसरे के खेतों में मिलकर काम करते हैं।
More chapters in हमारी अद्भुत दुनिया
हमारी अद्भुत दुनिया — कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन की NCERT पाठ्यपुस्तक (2026-27 संस्करण) — का अध्याय 1 ऑनलाइन मुफ़्त पढ़ें: NCERT द्वारा प्रकाशित पूरा अध्याय, हर चित्र, हल किए गए उदाहरण और अभ्यास के साथ, चरण-दर-चरण समाधान, उत्तर और रिवीजन नोट्स के साथ। ऊपर दी गई NCERT PDF खोलें, या सभी NCERT कक्षा 4 पाठ्यपुस्तकें देखें।