अध्याय 4: विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव
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कक्षा 8 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 4, "विद्युत — चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव", यह समझाता है कि धारावाही तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र कैसे उत्पन्न होता है, विद्युत चुंबक कैसे कार्य करते हैं, प्रतिरोध से विद्युत ऊष्मा कैसे उत्पन्न होती है और सेल व बैटरी रासायनिक अभिक्रियाओं से विद्युत कैसे उत्पन्न करती हैं।
- विद्युत और चुंबकत्व का संबंध — धारावाही तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है — यह ओर्स्टेड ने 1820 में खोजा था। तार को कुंडली बनाकर लौह-क्रोड के साथ लपेटें तो विद्युत चुंबक बनता है, जिसे धारा के साथ चालू या बंद किया जा सकता है।
- विद्युत चुंबक का नियंत्रण — विद्युत चुंबक की शक्ति अधिक धारा या अधिक कुंडली फेरों से बढ़ाई जा सकती है और धारा की दिशा बदलने से ध्रुव बदलते हैं। यह नियंत्रणीयता कारखानों में भारी धातु उठाने के लिए उपयोगी है।
- विद्युत धारा का तापीय प्रभाव — प्रतिरोध धारा-प्रवाह में बाधा डालता है और विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा में बदलता है। उत्पन्न ऊष्मा तार की सामग्री, मोटाई, लंबाई, धारा और समय पर निर्भर है — यही प्रेस, केतली, हीटर जैसे उपकरणों का सिद्धांत है।
- सेल और बैटरी में रसायन — सेल रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत उत्पन्न करते हैं: वोल्टाइक सेल में इलेक्ट्रोड तरल विद्युत-अपघट्य में होते हैं, शुष्क सेल में नम पेस्ट होती है और पुनर्भरण योग्य लिथियम-आयन बैटरी फोन, लैपटॉप और विद्युत वाहनों में उपयोगी है।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01जब विद्युत धारा किसी चालक में प्रवाहित होती है तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है — इसे विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं; धारा रुकते ही क्षेत्र समाप्त हो जाता है।
- 02हैन्स क्रिश्चियन ओर्स्टेड (1777–1851) ने 1820 में खोजा कि विद्युत और चुंबकत्व परस्पर संबद्ध हैं — परिपथ चालू/बंद करने पर समीपस्थ चुंबकीय दिक्सूचक सुई विक्षेपित होती है।
- 03धारावाही कुंडली जो चुंबक की भाँति कार्य करे, विद्युत चुंबक कहलाती है; लौह-क्रोड डालने से यह काफी शक्तिशाली बनती है।
- 04विद्युत चुंबक की शक्ति धारा बढ़ाने या कुंडली के फेरे बढ़ाने से बढ़ती है; धारा की दिशा बदलने से ध्रुव बदल जाते हैं।
- 05उत्थापक विद्युत चुंबक कारखानों और स्क्रैप यार्डों में धारा चालू/बंद करके भारी धातु वस्तुएँ उठाने, ले जाने और छाँटने के लिए उपयोगी हैं।
- 06जब धारा किसी चालक में प्रवाहित होती है, तो प्रतिरोध कुछ विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा में परिवर्तित करता है — यह विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहलाता है।
- 07तार में उत्पन्न ऊष्मा उसकी सामग्री, मोटाई, लंबाई, धारा के परिमाण और समय पर निर्भर करती है; समान आकार के तांबे के तार की तुलना में नाइक्रोम तार अधिक प्रतिरोध देता है।
- 08घरेलू उपकरण जैसे विद्युत हीटर, स्टोव, केतली, प्रेस, इमर्शन रॉड और हेयर ड्रायर सभी विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करते हैं।
- 09वोल्टाइक (गैल्वेनिक) सेल में दो भिन्न धातु इलेक्ट्रोड और एक तरल विद्युत-अपघट्य (सामान्यतः दुर्बल अम्ल या नमक का घोल) होते हैं; रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
- 10शुष्क सेल में तरल की जगह नम पेस्ट होती है; इसमें ऋण टर्मिनल के रूप में जस्ते का डिब्बा और धन टर्मिनल के रूप में धातु टोपी सहित कार्बन की छड़ होती है — ये एक बार उपयोग के लिए हैं।
- 11पुनर्भरण योग्य बैटरियाँ बार-बार चार्ज की जा सकती हैं; सर्वाधिक सामान्य प्रकार लिथियम-आयन (Li-ion) बैटरी है जो फोन, लैपटॉप और विद्युत वाहनों में मिलती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव क्या है?
जब विद्युत धारा किसी चालक (जैसे तार) में प्रवाहित होती है तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है — इसे विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं। धारा रुकते ही यह चुंबकीय क्षेत्र समाप्त हो जाता है।
02विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव की खोज किसने और कब की?
हैन्स क्रिश्चियन ओर्स्टेड (1777–1851), डेनमार्क के एक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, ने 1820 में यह खोज की कि विद्युत और चुंबकत्व परस्पर संबद्ध हैं। उन्होंने देखा कि जब भी विद्युत परिपथ का स्विच चालू/बंद किया जाता है, समीप रखी चुंबकीय दिक्सूचक सुई विक्षेपित होती है।
03विद्युत चुंबक क्या है?
धारावाही कुंडली जो चुंबक की भाँति व्यवहार करे, विद्युत चुंबक कहलाती है। व्यावहारिक उपयोग के लिए इसमें लौह-क्रोड डाला जाता है। जब धारा प्रवाहित होती है तभी यह चुंबक की तरह काम करती है; धारा रुकते ही चुंबकीय प्रभाव समाप्त हो जाता है।
04विद्युत चुंबक की शक्ति कैसे बढ़ाई जा सकती है?
विद्युत चुंबक की शक्ति कुंडली में प्रवाहित धारा बढ़ाकर, कुंडली के फेरों की संख्या बढ़ाकर या दोनों तरीके अपनाकर बढ़ाई जा सकती है।
05विद्युत धारा का तापीय प्रभाव क्या है?
जब विद्युत धारा किसी चालक में प्रवाहित होती है तो प्रतिरोध धारा के प्रवाह को बाधित करता है और कुछ विद्युत ऊर्जा ऊष्मा ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है — इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं।
06कौन-से घरेलू उपकरण विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करते हैं?
विद्युत हीटर, विद्युत स्टोव, विद्युत केतली, विद्युत प्रेस, इमर्शन रॉड और हेयर ड्रायर — ये सभी विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करते हैं। इन सभी में एक ऊष्मन तत्त्व (तार की छड़ या कुंडली) होता है।
07नाइक्रोम तार का उपयोग विद्युत ऊष्मन उपकरणों में क्यों होता है?
नाइक्रोम तार समान आकार और लंबाई के तांबे के तार की तुलना में अधिक प्रतिरोध देता है। इस अधिक प्रतिरोध के कारण दी गई धारा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे यह विद्युत उपकरणों में ऊष्मन तत्त्व के लिए उपयुक्त है।
08वोल्टाइक सेल क्या है और यह कैसे कार्य करता है?
वोल्टाइक (गैल्वेनिक) सेल में दो भिन्न धातुओं की छड़ें (इलेक्ट्रोड) और एक तरल विद्युत-अपघट्य (सामान्यतः दुर्बल अम्ल या नमक का घोल) होते हैं। इलेक्ट्रोड और विद्युत-अपघट्य के बीच रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत धारा उत्पन्न होती है।
09क्या एनसीईआरटी कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 4 की पीडीएफ निःशुल्क है?
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