विज्ञान • कक्षा 9

विज्ञान

NCERT पाठ्यपुस्तक13 अध्याय

अध्याय नोट्स

विज्ञान में आप क्या सीखेंगे

विज्ञान का त्वरित रिवीज़न मैप — हर अध्याय का मूल विचार और पाँच मुख्य बातें। पूरा NCERT PDF और विस्तृत नोट्स पढ़ने के लिए किसी भी अध्याय पर टैप करें।

01

अन्वेषण— माध्यमिक विज्ञान के संसार में प्रवेश

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 1, "अन्वेषण— माध्यमिक विज्ञान के संसार में प्रवेश", माध्यमिक स्तर पर विज्ञान का परिचय देता है और यह स्थापित करता है कि विज्ञान केवल तथ्यों को रटना नहीं, बल्कि मॉडलों, सटीक भाषा, गणित, नियमों, सिद्धांतों और आकलन के माध्यम से गहन अन्वेषण करना है।

  • 1माध्यमिक स्तर पर विज्ञान गहन अन्वेषण पर केंद्रित होता है — यह समझना कि प्रेक्षण किस प्रकार मापन की ओर ले जाते हैं, मॉडल कैसे बनाए जाते हैं, और विचारों को कैसे परखा, संशोधित या अस्वीकार किया जाता है।
  • 2वैज्ञानिक मॉडल वास्तविकता के सरलीकृत निरूपण होते हैं जो विशेष प्रश्नों का उत्तर देने के लिए जानबूझकर कुछ विवरणों की उपेक्षा करते हैं — उदाहरण के लिए, गिरती वस्तु का अध्ययन करते समय वायु प्रतिरोध को नज़रअंदाज़ करना।
  • 3विज्ञान पदों, प्रतीकों और SI मात्रकों की एक साझा एवं सटीक भाषा का उपयोग करता है ताकि दुनिया भर के वैज्ञानिक परिणामों की तुलना कर सकें और मिलकर विचार विकसित कर सकें।
  • 4एक वैज्ञानिक नियम (Law) प्रकृति में एक नियमित प्रतिरूप का वर्णन करता है; एक सिद्धांत (Theory) साक्ष्यों के आधार पर बताता है कि वह प्रतिरूप क्यों उत्पन्न होता है; और एक प्रिंसिपल (Principle) एक व्यापक मार्गदर्शक विचार है जो किसी स्थिति में लागू होता है।
  • 5भविष्यवाणी विज्ञान का एक मूल उपकरण है — जब भविष्यवाणियाँ प्रेक्षणों से मेल खाती हैं, तो विज्ञान में विश्वास बढ़ता है; जब नहीं मेल खातीं, तो वैज्ञानिक अपनी मान्यताओं और मॉडलों की पुनः जाँच करते हैं।
02

कोशिका— जीवन की निर्माण इकाई

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 2, "कोशिका— जीवन की निर्माण इकाई", यह समझाता है कि कोशिका सभी जीवों की मूल संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है, सभी जीव कोशिकाओं से बने हैं, और सभी कोशिकाएँ पूर्ववर्ती कोशिकाओं से उत्पन्न होती हैं।

  • 1कोशिका सभी जीवों की मूल संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है; बैक्टीरिया जैसे एककोशिकीय जीव एक कोशिका से बने होते हैं, जबकि मनुष्य जैसे बहुकोशिकीय जीवों में लाखों कोशिकाएँ मिलकर कार्य करती हैं।
  • 2प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं (जैसे बैक्टीरिया) में स्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-आबद्ध कोशिकांग नहीं होते; यूकैरियोटिक कोशिकाओं (पादप और जंतु) में सच्चा केंद्रक और झिल्ली-आबद्ध कोशिकांग होते हैं।
  • 3कोशिका झिल्ली वरणात्मक पारगम्य होती है और तरल-मोज़ेक मॉडल का अनुसरण करती है — एक लिपिड द्विस्तर जिसमें प्रोटीन अंतर्निहित होते हैं जो पदार्थ परिवहन के द्वारपाल का कार्य करते हैं।
  • 4पादप कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली के बाहर मुख्यतः सेलुलोज से बनी दृढ़ कोशिका भित्ति होती है जो संरचनात्मक सहायता प्रदान करती है; जंतु कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं होती और वे आकार अधिक स्वतंत्रता से बदल सकती हैं।
  • 5माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका के ऊर्जा केंद्र हैं और कोशिकीय श्वसन द्वारा ATP उत्पन्न करते हैं; पादप कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट क्लोरोफिल द्वारा सूर्य का प्रकाश अवशोषित कर प्रकाश-संश्लेषण करते हैं।
03

क्रियाशील ऊतक

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 3, "क्रियाशील ऊतक", पादप और जंतु ऊतकों को कवर करता है — यह बताता है कि समान कोशिकाओं के समूह मिलकर विशिष्ट कार्य कैसे करते हैं, जिससे श्रम विभाजन और जटिल जीवन प्रक्रियाएँ संभव होती हैं।

  • 1पादप विभज्योतक ऊतक (शीर्षस्थ, पार्श्विक, अंतर्वेशी) क्रमशः लंबाई वृद्धि, मोटाई वृद्धि और कटाई के बाद पुनर्जनन में सहायक होते हैं; इनकी कोशिकाओं में पतली भित्ति, सघन कोशिकाद्रव्य, बड़ा केंद्रक और रसधानियाँ नहीं होतीं।
  • 2स्थायी पादप ऊतक सरल (मृदूतक — खाद्य संचय/प्रकाश-संश्लेषण; स्थूलकोण ऊतक — लचीलापन; दृढ़ोतक — लिग्निन द्वारा दृढ़ता) या जटिल (जाइलम — जल/खनिज परिवहन; फ्लोएम — चालनी नलिकाओं द्वारा खाद्य परिवहन) होते हैं।
  • 3मोमी क्यूटिकल से ढकी बाह्यत्वचा पादपों की सबसे बाहरी सुरक्षात्मक परत बनाती है; पत्तियों में रंध्र गैस विनिमय और वाष्पोत्सर्जन को सक्षम बनाते हैं।
  • 4जंतु ऊतक चार मुख्य प्रकार के होते हैं: उपकला (शरीर का आवरण और अस्तर), संयोजी (रक्त, अस्थि, उपास्थि, कंडराएँ, स्नायुबंध), पेशी (कंकालीय, चिकनी, हृदय) और तंत्रिका (आवेग ग्रहण और संचारित करने वाले न्यूरॉन्स)।
  • 5कंकालीय पेशियाँ ऐच्छिक होती हैं (रेखित, बहुनाभिकीय, बेलनाकार तंतु); चिकनी पेशियाँ अनैच्छिक होती हैं (तर्कु आकार, एकल केंद्रक, अरेखित); हृदय पेशियाँ अनैच्छिक, शाखित होती हैं और बिना थके कार्य करती हैं।
04

अपने परिवेश में गति का वर्णन

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 4, "अपने परिवेश में गति का वर्णन", विस्थापन, औसत चाल, औसत वेग, औसत त्वरण, गतिकी समीकरणों और एकसमान वृत्तीय गति द्वारा गति का वर्णन करना सिखाता है, जिसके लिए स्थिति-समय और वेग-समय आलेखों का उपयोग किया जाता है।

  • 1विस्थापन दो क्षणों के बीच स्थिति का शुद्ध परिवर्तन है, जिसके लिए परिमाण और दिशा दोनों आवश्यक हैं; यह शून्य हो सकता है जबकि तय की गई कुल दूरी शून्य न हो (जैसे कोई धावक दौड़कर आरंभिक स्थान पर वापस आ जाए)।
  • 2औसत चाल = कुल दूरी ÷ समय अंतराल; औसत वेग = विस्थापन ÷ समय अंतराल (v_av = s/t), SI मात्रक m s⁻¹।
  • 3औसत त्वरण = वेग परिवर्तन ÷ समय अंतराल (a = (v − u)/t), SI मात्रक m s⁻²; त्वरण तब भी हो सकता है जब चाल स्थिर हो, यदि दिशा बदले।
  • 4स्थिर त्वरण सहित सरल रेखीय गति के तीन गतिकी समीकरण हैं: v = u + at, s = ut + ½at², और v² = u² + 2as।
  • 5स्थिति-समय आलेख पर रेखा की ढाल वेग का परिमाण देती है; सरल रेखा स्थिर वेग और वक्र परिवर्ती (त्वरित) वेग दर्शाता है।
05

मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 5, "मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण", मिश्रणों और उनके पृथक्करण को कवर करता है — उन्हें विलयन, निलंबन या कोलाइड के रूप में वर्गीकृत करता है और क्रिस्टलीकरण, आसवन, पेपर क्रोमैटोग्राफी, उर्ध्वपातन, अपकेंद्रण और स्कंदन जैसी तकनीकें सिखाता है।

  • 1मिश्रणों को समांगी (विलयन) या विषमांगी (निलंबन, कोलाइड) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है; कण-आकार से पहचान: विलयन < 1 nm, कोलाइड 1–1000 nm, निलंबन > 1000 nm।
  • 2विलयन की सांद्रता को द्रव्यमान/द्रव्यमान (% m/m), द्रव्यमान/आयतन (% m/v), या आयतन/आयतन (% v/v) प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है।
  • 3ठोस विलेयों की विलेयता सामान्यतः तापमान बढ़ने पर बढ़ती है, जबकि द्रवों में गैसों की विलेयता तापमान बढ़ने पर घटती है।
  • 4क्रिस्टलीकरण संतृप्त विलयनों से ठोसों को अलग या शुद्ध करता है; आसवन कम से कम 25 °C के क्वथनांक-अंतर वाले मिश्रणीय द्रवों को अलग करता है।
  • 5उर्ध्वपातन उन पदार्थों को अलग करता है जो सीधे ठोस से वाष्प में बदल जाते हैं (जैसे कपूर) बिना द्रव अवस्था से गुजरे; अमिश्रणीय द्रवों को पृथक्करण कीप से अलग किया जाता है।
06

गति पर बलों का प्रभाव

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 6, "गति पर बलों का प्रभाव", यह बताता है कि बल न्यूटन के तीन गति के नियमों, संतुलित और असंतुलित बलों तथा घर्षण बल के माध्यम से गति को किस प्रकार प्रभावित करते हैं; बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है।

  • 1बल एक सदिश राशि है जिसके परिमाण और दिशा दोनों होते हैं; SI मात्रक न्यूटन (N) है, जिसे 1 kg द्रव्यमान पर 1 m/s² त्वरण उत्पन्न करने वाले बल के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • 2संतुलित बल परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते हैं और गति में कोई परिवर्तन नहीं करते; असंतुलित बल एक परिणामी बल उत्पन्न करते हैं जो त्वरण का कारण बनता है।
  • 3घर्षण बल गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है और संपर्क में आने वाली सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है; चिकनी सतहें कम घर्षण उत्पन्न करती हैं और वस्तुओं को रुकने से पहले अधिक दूर तक जाने देती हैं।
  • 4न्यूटन का प्रथम नियम: विराम में रखी वस्तु विराम में रहती है और गतिशील वस्तु स्थिर वेग से चलती रहती है जब तक उस पर कोई परिणामी बल न लगे।
  • 5न्यूटन का द्वितीय नियम: F = ma — परिणामी बल = द्रव्यमान × त्वरण; अधिक बल से त्वरण बढ़ता है और अधिक द्रव्यमान से घटता है।
07

कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 7, "कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें", कार्य को बल गुणा विस्थापन (W = F × s) के रूप में परिभाषित करता है, गतिज और स्थितिज ऊर्जा, कार्य-ऊर्जा प्रमेय, यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण, शक्ति, और घिरनी, आनत तल तथा उत्तोलक की व्याख्या करता है।

  • 1कार्य किसी वस्तु पर तब होता है जब बल उसकी दिशा में विस्थापन उत्पन्न करे; W = F × s (SI मात्रक: जूल, J)।
  • 2कार्य-ऊर्जा प्रमेय बताता है कि किसी वस्तु पर किया गया कार्य उसकी ऊर्जा के परिवर्तन के बराबर होता है; गतिज ऊर्जा K = ½mv² और गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा U = mgh।
  • 3यांत्रिक ऊर्जा (गतिज और स्थितिज ऊर्जा का योग) संरक्षित रहती है जब वस्तु पर गुरुत्वाकर्षण के अतिरिक्त कोई बाह्य बल न हो — जैसा स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु और सरल लोलक में प्रदर्शित होता है।
  • 4शक्ति कार्य की दर है: P = W/t; SI मात्रक वाट (W), जहाँ 1 W = 1 J s⁻¹।
  • 5सरल मशीनें (घिरनी, आनत तल, उत्तोलक) बल का परिमाण या दिशा बदलकर आवश्यक प्रयास कम करती हैं, किंतु कुल किया गया कार्य कम नहीं होता; यांत्रिक लाभ = भार ÷ प्रयास।
08

एक यात्रा— परमाणु के भीतर

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 8, "एक यात्रा— परमाणु के भीतर", परमाणु सिद्धांत की विकास यात्रा को प्राचीन विचारकों से लेकर डाल्टन, थॉमसन, रदरफोर्ड और बोर तक का वर्णन करता है तथा उप-परमाणुक कणों, परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, संयोजकता, समस्थानिकों और समभारिकों की व्याख्या करता है।

  • 1जे. जे. थॉमसन ने 1897 में कैथोड किरण नली प्रयोग द्वारा इलेक्ट्रॉन की खोज की और परमाणु का प्लम पुडिंग (तरबूज) मॉडल प्रस्तावित किया।
  • 2रदरफोर्ड के स्वर्ण पत्र प्रयोग (1911) से सिद्ध हुआ कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त स्थान है तथा केंद्र में एक अति सूक्ष्म, सघन, धनावेशित नाभिक है; परमाणु का व्यास लगभग 10⁻¹⁰ m और नाभिक का लगभग 10⁻¹⁵ m होता है।
  • 3बोर के मॉडल (1913) के अनुसार इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा कोशों (K, L, M, N) में ऊर्जा का क्षय किए बिना परिक्रमा करते हैं; प्रति कोश अधिकतम इलेक्ट्रॉन की संख्या 2n² सूत्र से निर्धारित होती है।
  • 4जेम्स चैडविक ने 1932 में न्यूट्रॉन की खोज की, जिससे स्पष्ट हुआ कि परमाणु द्रव्यमान केवल प्रोटॉन के योग से अधिक क्यों होता है; हाइड्रोजन को छोड़कर सभी नाभिकों में न्यूट्रॉन पाए जाते हैं।
  • 5परमाणु क्रमांक (Z) = प्रोटॉन संख्या; द्रव्यमान संख्या (A) = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन; संयोजकता वह इलेक्ट्रॉन संख्या है जो बाहरी कोश के अष्टक को पूरा करने के लिए ग्रहण, त्याग या साझा की जाती है।
09

द्रव्य का परमाणिक आधार

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 9, "द्रव्य का परमाणिक आधार", द्रव्यमान संरक्षण के नियम, स्थिर अनुपात के नियम, डाल्टन के परमाणु सिद्धांत, सहसंयोजक एवं आयनिक बंध, रासायनिक सूत्रों तथा आणविक एवं सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना को समाहित करता है।

  • 1द्रव्यमान संरक्षण का नियम: किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में अभिकारकों का कुल द्रव्यमान उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है — इसे एंटोइन लेवॉयज़ियर ने 1789 में प्रतिपादित किया।
  • 2स्थिर अनुपात का नियम (प्राउस्ट का नियम): किसी यौगिक में तत्त्व सदैव एक निश्चित द्रव्यमान अनुपात में संयुक्त होते हैं, चाहे उनका स्रोत कोई भी हो — जल में सदैव हाइड्रोजन और ऑक्सीजन 1:8 के अनुपात में होते हैं।
  • 3डाल्टन के परमाणु सिद्धांत की मान्यताएँ: परमाणु अविभाज्य हैं, एक तत्त्व के सभी परमाणु एकसमान हैं, विभिन्न तत्त्वों के परमाणु भिन्न हैं, और ये सरल पूर्ण-संख्या अनुपात में संयुक्त होकर यौगिक बनाते हैं।
  • 4सहसंयोजक बंध परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉन साझा करने से बनता है (एकल बंध: एक साझा युगल; द्विबंध: दो साझा युगल); उदाहरण H₂, Cl₂, O₂, HCl और H₂O।
  • 5आयनिक बंध इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण से बनता है, जिसमें धनायन (जैसे Na⁺) और ऋणायन (जैसे Cl⁻) स्थिर वैद्युत आकर्षण से जुड़ते हैं; आयनिक यौगिकों का गलनांक सामान्यतः उच्च होता है और ये जल में घुलने पर विद्युत का संचालन करते हैं।
10

ध्वनि तरंगें— अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 10, "ध्वनि तरंगें— अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग", यह बताता है कि ध्वनि कंपायमान वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है, संपीडन और विरलन के रूप में एक अनुदैर्घ्य यांत्रिक तरंग के रूप में संचरित होती है, और प्रतिध्वनि व सोनार से लेकर पराश्रव्य चिकित्सा इमेजिंग तक विभिन्न अनुप्रयोगों में उपयोगी है।

  • 1ध्वनि कंपायमान वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है और माध्यम में संपीडन व विरलन के क्रमिक रूप में संचरित होती है; यह निर्वात में नहीं चल सकती।
  • 2ध्वनि एक अनुदैर्घ्य यांत्रिक तरंग है — माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समांतर दोलन करते हैं परंतु तरंग के साथ नहीं चलते।
  • 3मुख्य तरंग राशियाँ: तरंगदैर्घ्य (λ, SI मात्रक m), आवृत्ति (ν, SI मात्रक Hz), आवर्तकाल T, संबंध ν = 1/T और तरंग चाल v = λ × ν।
  • 4ध्वनि की चाल माध्यम पर निर्भर करती है: कमरे के तापमान पर वायु में लगभग 340 m s⁻¹, जल में लगभग 1500 m s⁻¹ और इस्पात में लगभग 5000 m s⁻¹; तापमान बढ़ने के साथ चाल बढ़ती है।
  • 5प्रतिध्वनि सुनने के लिए परावर्तक सतह से न्यूनतम दूरी 17 m होनी चाहिए (340 m s⁻¹ ध्वनि चाल पर 0.1 s न्यूनतम समयांतराल के आधार पर)।
11

जनन— जीवन की निरंतरता

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 11, "जनन— जीवन की निरंतरता", उस जैविक प्रक्रिया को समाहित करता है जिसके द्वारा जीव नए व्यक्ति उत्पन्न करते हैं — पौधों, जंतुओं और मनुष्यों में अलैंगिक जनन (कायिक प्रवर्धन, मुकुलन, बीजाणु निर्माण) और लैंगिक जनन की विवेचना करता है।

  • 1अलैंगिक जनन में एक जनक होता है और समसूत्री विभाजन द्वारा आनुवंशिक रूप से एकसमान क्लोन बनते हैं; विधियाँ हैं — कायिक प्रवर्धन (कर्तन, कलम, दाब, ऊतक संवर्धन), हाइड्रा में मुकुलन और कवकों में बीजाणु निर्माण।
  • 2लैंगिक जनन में दो जनक होते हैं; अर्धसूत्री विभाजन गुणसूत्र संख्या को आधा करके युग्मक (शुक्राणु और अंडाणु) बनाता है और अर्धसूत्री विभाजन के दौरान गुणसूत्रों का यादृच्छिक मिश्रण संतानों में आनुवंशिक विविधता उत्पन्न करता है।
  • 3पुष्पी पौधों में पुंकेसर (नर) पराग कण बनाता है और अंडप (मादा) में बीजांड युक्त अंडाशय होता है; परागण परागकोश से वर्तिकाग्र तक पराग का स्थानांतरण है (वायु, जल, कीट या पक्षी द्वारा), इसके बाद निषेचन से युग्मनज बनता है जो फल के भीतर बीज में विकसित होता है।
  • 4जंतुओं में बाह्य निषेचन शरीर के बाहर होता है (मछली, मेंढक) जिसमें अनेक अंडे और कम जीवित रहने की दर होती है, जबकि आंतरिक निषेचन मादा के भीतर होता है (सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी) जिसमें कम अंडे और अधिक जीवित रहने की दर होती है।
  • 5मनुष्यों में प्रतिमाह अंडाशय से एक परिपक्व अंडाणु मुक्त होता है (अंडोत्सर्ग); डिंबवाहिनी में शुक्राणु द्वारा निषेचित होने पर युग्मनज बनता है, गर्भाशय में आरोपित होता है और लगभग नौ महीने का गर्भकाल तीन त्रैमासिकों में विभाजित होता है; निषेचन न होने पर गर्भाशय की आंतरिक परत रजोधर्म के रूप में झड़ती है।
12

जीवजगत का स्वरूप— विविधता एवं वर्गीकरण

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 12, "जीवजगत का स्वरूप— विविधता एवं वर्गीकरण", जैवविविधता और जैविक वर्गीकरण की व्याख्या करता है — वैज्ञानिक जीवन की विविधता को कोशिका प्रकार, कोशिका संरचना, संगठन स्तर और पोषण प्रकार के आधार पर पाँच-जगत प्रणाली में कैसे और क्यों वर्गीकृत करते हैं।

  • 1जैवविविधता पृथ्वी पर जीवों की अपार विविधता है; भारत एक वैश्विक जैवविविधता केंद्र है जहाँ पश्चिमी घाट, हिमालय और इंडो-बर्मा जैसे क्षेत्रों में अनेक स्थानीय प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • 2व्हिटेकर का पाँच-जगत वर्गीकरण (1969) समस्त जीवों को मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु में विभाजित करता है — आधार हैं कोशिका प्रकार (प्रोकैरियोट/यूकैरियोट), संगठन स्तर (एककोशिकीय/बहुकोशिकीय) और पोषण प्रकार (स्वपोषी/परपोषी)।
  • 3पादप जगत पाँच वर्गों में विभाजित है — थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म — जो सरल जलनिर्भर पौधों से बीज धारण करने वाले भूमि-अनुकूलित पुष्पी पौधों तक की प्रगति दर्शाते हैं।
  • 4जंतु जगत को पहले पृष्ठरज्जु की उपस्थिति या अनुपस्थिति (अकशेरुकी बनाम कशेरुकी) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है; अकशेरुकी पोरीफेरा से इकाइनोडर्मेटा तक आठ संघों में फैले हैं, जबकि कशेरुकी में मछली, उभयचर, सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी शामिल हैं।
  • 5द्विनाम नामकरण पद्धति, जो 18वीं शताब्दी में कैरोलस लिनीयस द्वारा प्रस्तुत की गई, प्रत्येक जीव को एक सार्वभौमिक दो-भागीय लैटिन वैज्ञानिक नाम (वंश + जाति) देती है जिससे विभिन्न क्षेत्रीय सामान्य नामों से उत्पन्न भ्रम दूर होता है।
13

पृथ्वी एक तंत्र— ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 13, "पृथ्वी एक तंत्र— ऊर्जा, द्रव्य और जीवन", पृथ्वी को पाँच परस्पर क्रियाशील मंडलों — भूमंडल, जलमंडल, हिममंडल, वायुमंडल और जैवमंडल — के रूप में समझाता है, जिनमें सूर्य की ऊर्जा और द्रव्य निरंतर प्रवाहित होते हुए जीवन को बनाए रखते हैं।

  • 1पृथ्वी पाँच परस्पर क्रियाशील मंडलों में विभाजित है: भूमंडल, जलमंडल, हिममंडल, वायुमंडल और जैवमंडल; एक में विक्षोभ सभी को प्रभावित करता है।
  • 2सूर्य का विद्युत-चुंबकीय विकिरण (पराबैंगनी, दृश्य और अवरक्त पट्टियों में केंद्रित) प्राथमिक ऊर्जा स्रोत है; वायुमंडल के शीर्ष पर सौर स्थिरांक लगभग 1.4 kWm⁻² है।
  • 3अक्षांश और गोलाकार आकृति के कारण पृथ्वी की सतह का असमान ताप ग्रहीय पवनों, स्थानीय बयारों (घाटी और पर्वत) और गायर तथा गल्फ स्ट्रीम जैसी महासागरीय धाराओं को जन्म देता है।
  • 4जैव-भूरासायनिक चक्र — जल, कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन — अजैविक और जैविक घटकों के बीच आवश्यक पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण करते हैं, जीवन को बनाए रखते हैं और जलवायु नियमन करते हैं।
  • 5मानवीय गतिविधियों ने 1960 से अब तक वायुमंडलीय CO₂ में लगभग 35% की वृद्धि की है (315 ppm से 420 ppm तक), जिससे हरित गृह प्रभाव तीव्र हुआ है और जल, कार्बन तथा नाइट्रोजन चक्र बाधित हुए हैं।