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अवलोकन

सारांश

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 8, "एक यात्रा— परमाणु के भीतर", परमाणु सिद्धांत की विकास यात्रा को प्राचीन विचारकों से लेकर डाल्टन, थॉमसन, रदरफोर्ड और बोर तक का वर्णन करता है तथा उप-परमाणुक कणों, परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, संयोजकता, समस्थानिकों और समभारिकों की व्याख्या करता है।

  • परमाणु की अवधारणा का विकासपरमाणु के बारे में विचार आचार्य कणाद और यूनानी विचारकों से लेकर डाल्टन के 1808 के सिद्धांत, थॉमसन के प्लम पुडिंग मॉडल, रदरफोर्ड के नाभिकीय मॉडल और बोर के कक्षीय मॉडल तक विकसित हुए — प्रत्येक नए प्रमाण के साथ चित्र और परिष्कृत होता गया।
  • उप-परमाणुक कणों की खोजथॉमसन ने 1897 में इलेक्ट्रॉन की खोज की और चैडविक ने 1932 में न्यूट्रॉन की, जिससे स्पष्ट हुआ कि परमाणु द्रव्यमान केवल प्रोटॉन के द्रव्यमान से अधिक क्यों होता है; न्यूट्रॉन हाइड्रोजन को छोड़कर सभी नाभिकों में पाया जाता है।
  • नाभिकीय मॉडलरदरफोर्ड के स्वर्ण पत्र प्रयोग से सिद्ध हुआ कि परमाणु अधिकांशतः रिक्त स्थान है जिसके केंद्र में एक अति सूक्ष्म सघन धनावेशित नाभिक है; बोर ने प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा कोशों (K, L, M, N) में परिक्रमा करते हैं जिनमें अधिकतम 2n² इलेक्ट्रॉन समा सकते हैं।
  • परमाणुओं का वर्णनपरमाणु क्रमांक प्रोटॉन की संख्या होती है और द्रव्यमान संख्या प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन का योग; संयोजकता बंधन को नियंत्रित करती है, जबकि समस्थानिकों का परमाणु क्रमांक समान परंतु द्रव्यमान भिन्न होता है और समभारिकों की द्रव्यमान संख्या समान परंतु तत्त्व भिन्न होता है।
मुख्य बातें

मुख्य बिंदु और सूत्र

  1. 01जे. जे. थॉमसन ने 1897 में कैथोड किरण नली प्रयोग द्वारा इलेक्ट्रॉन की खोज की और परमाणु का प्लम पुडिंग (तरबूज) मॉडल प्रस्तावित किया।
  2. 02रदरफोर्ड के स्वर्ण पत्र प्रयोग (1911) से सिद्ध हुआ कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त स्थान है तथा केंद्र में एक अति सूक्ष्म, सघन, धनावेशित नाभिक है; परमाणु का व्यास लगभग 10⁻¹⁰ m और नाभिक का लगभग 10⁻¹⁵ m होता है।
  3. 03बोर के मॉडल (1913) के अनुसार इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा कोशों (K, L, M, N) में ऊर्जा का क्षय किए बिना परिक्रमा करते हैं; प्रति कोश अधिकतम इलेक्ट्रॉन की संख्या 2n² सूत्र से निर्धारित होती है।
  4. 04जेम्स चैडविक ने 1932 में न्यूट्रॉन की खोज की, जिससे स्पष्ट हुआ कि परमाणु द्रव्यमान केवल प्रोटॉन के योग से अधिक क्यों होता है; हाइड्रोजन को छोड़कर सभी नाभिकों में न्यूट्रॉन पाए जाते हैं।
  5. 05परमाणु क्रमांक (Z) = प्रोटॉन संख्या; द्रव्यमान संख्या (A) = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन; संयोजकता वह इलेक्ट्रॉन संख्या है जो बाहरी कोश के अष्टक को पूरा करने के लिए ग्रहण, त्याग या साझा की जाती है।
  6. 06समस्थानिक एक ही तत्त्व के वे परमाणु होते हैं जिनका परमाणु क्रमांक समान परंतु द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है (जैसे हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक: प्रोटियम, ड्यूटीरियम, ट्राइटियम); समभारिक विभिन्न तत्त्वों के वे परमाणु होते हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या समान परंतु परमाणु क्रमांक भिन्न होता है।
प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

01

रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल और बोर के परमाणु मॉडल में मुख्य अंतर क्या है?

रदरफोर्ड ने प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक की स्वतंत्र रूप से परिक्रमा करते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कर सके कि वे ऊर्जा क्षय करके नाभिक में क्यों नहीं गिरते। बोर ने निश्चित वृत्तीय ऊर्जा कोशों (K, L, M, N) की अवधारणा प्रस्तुत करके इसे सुलझाया, जिनमें इलेक्ट्रॉन बिना ऊर्जा खोए परिक्रमा करते हैं। ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन केवल तभी होता है जब इलेक्ट्रॉन एक कोश से दूसरे कोश में कूदता है और दोनों ऊर्जा स्तरों का अंतर ऊर्जा के रूप में प्रकट होता है।

02

रदरफोर्ड ने स्वर्ण पत्र प्रयोग से क्या निष्कर्ष निकाला?

रदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का धनावेश और अधिकांश द्रव्यमान एक अत्यंत सूक्ष्म और सघन क्षेत्र में केंद्रित है जिसे नाभिक कहते हैं। अधिकांश अल्फा कण पन्नी में से बिना विक्षेपित हुए सीधे निकल गए क्योंकि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है, जबकि कुछ कण तीव्र रूप से विक्षेपित हुए या वापस लौट आए क्योंकि वे सघन नाभिक के समीप आए। इससे थॉमसन का प्लम पुडिंग मॉडल अमान्य हो गया।

03

समस्थानिक क्या होते हैं और उनके रासायनिक गुण समान क्यों होते हैं?

समस्थानिक एक ही तत्त्व के वे परमाणु होते हैं जिनका परमाणु क्रमांक (प्रोटॉन संख्या) समान परंतु न्यूट्रॉन संख्या भिन्न होने के कारण द्रव्यमान संख्या अलग होती है। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं: प्रोटियम (कोई न्यूट्रॉन नहीं), ड्यूटीरियम (एक न्यूट्रॉन) और ट्राइटियम (दो न्यूट्रॉन)। समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान होते हैं क्योंकि रासायनिक व्यवहार संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करता है, जो किसी तत्त्व के सभी समस्थानिकों में एकसमान होती है।

04

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