विज्ञान पर वापस
अवलोकन

सारांश

कक्षा 9 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 7, "कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें", कार्य को बल गुणा विस्थापन (W = F × s) के रूप में परिभाषित करता है, गतिज और स्थितिज ऊर्जा, कार्य-ऊर्जा प्रमेय, यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण, शक्ति, और घिरनी, आनत तल तथा उत्तोलक की व्याख्या करता है।

  • कार्य और ऊर्जाकार्य तब होता है जब बल उसकी दिशा में विस्थापन उत्पन्न करे (W = F × s, जूल में)। कार्य-ऊर्जा प्रमेय बताता है कि किया गया कार्य ऊर्जा के परिवर्तन के बराबर होता है, चाहे वह गतिज (½mv²) हो या स्थितिज (mgh)।
  • ऊर्जा संरक्षणयांत्रिक ऊर्जा, जो गतिज और स्थितिज ऊर्जा का योग है, संरक्षित रहती है जब किसी वस्तु पर केवल गुरुत्वाकर्षण कार्य करे — जैसा स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु और दोलन करते सरल लोलक में दिखता है।
  • दर के रूप में शक्तिशक्ति बताती है कि कार्य कितनी तेज़ी से होता है: P = W/t, SI मात्रक वाट (W), जहाँ 1 W = 1 जूल प्रति सेकंड — यह समान कुल कार्य करने में तेज़ और धीमी गति में अंतर बताता है।
  • सरल मशीनेंघिरनी, आनत तल और उत्तोलक कुल कार्य कम किए बिना बल का परिमाण या दिशा बदलकर प्रयास को आसान बनाते हैं; इनका यांत्रिक लाभ = भार ÷ प्रयास।
मुख्य बातें

मुख्य बिंदु और सूत्र

  1. 01कार्य किसी वस्तु पर तब होता है जब बल उसकी दिशा में विस्थापन उत्पन्न करे; W = F × s (SI मात्रक: जूल, J)।
  2. 02कार्य-ऊर्जा प्रमेय बताता है कि किसी वस्तु पर किया गया कार्य उसकी ऊर्जा के परिवर्तन के बराबर होता है; गतिज ऊर्जा K = ½mv² और गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा U = mgh।
  3. 03यांत्रिक ऊर्जा (गतिज और स्थितिज ऊर्जा का योग) संरक्षित रहती है जब वस्तु पर गुरुत्वाकर्षण के अतिरिक्त कोई बाह्य बल न हो — जैसा स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु और सरल लोलक में प्रदर्शित होता है।
  4. 04शक्ति कार्य की दर है: P = W/t; SI मात्रक वाट (W), जहाँ 1 W = 1 J s⁻¹।
  5. 05सरल मशीनें (घिरनी, आनत तल, उत्तोलक) बल का परिमाण या दिशा बदलकर आवश्यक प्रयास कम करती हैं, किंतु कुल किया गया कार्य कम नहीं होता; यांत्रिक लाभ = भार ÷ प्रयास।
  6. 06स्थिर घिरनी केवल बल की दिशा बदलती है (यांत्रिक लाभ = 1); आनत तल का यांत्रिक लाभ = L/h (लंबाई ÷ ऊँचाई); उत्तोलक का यांत्रिक लाभ = प्रयास भुजा ÷ भार भुजा।
प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

01

किए गए कार्य का सूत्र क्या है और इसके SI मात्रक क्या हैं?

स्थिर बल द्वारा किया गया कार्य W = F × s है, जहाँ F लगाया गया बल और s बल की दिशा में विस्थापन है। कार्य का SI मात्रक जूल (J) है, जिसे 1 न्यूटन के बल द्वारा किसी वस्तु को बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित करने पर किए गए कार्य के रूप में परिभाषित किया गया है।

02

कार्य-ऊर्जा प्रमेय क्या है और गतिज ऊर्जा की गणना कैसे की जाती है?

कार्य-ऊर्जा प्रमेय बताता है कि किसी वस्तु पर किया गया कार्य उसकी ऊर्जा के परिवर्तन के बराबर होता है। m द्रव्यमान की v वेग से चलती वस्तु की गतिज ऊर्जा K = ½mv² है। यदि किसी वस्तु का वेग दोगुना हो जाए, तो उसकी गतिज ऊर्जा चार गुनी हो जाती है।

03

यांत्रिक ऊर्जा का संरक्षण क्या है और यह कब लागू होता है?

किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग उसकी यांत्रिक ऊर्जा है। जब किसी वस्तु पर केवल गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करे (घर्षण या अन्य बाह्य बल न हों), तो उसकी यांत्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है — गतिज और स्थितिज ऊर्जा परस्पर परिवर्तित होती रहती हैं किंतु उनका योग mgh के बराबर रहता है। दोलन करता लोलक और स्वतंत्र रूप से गिरती वस्तु दोनों इस सिद्धांत को दर्शाते हैं।

04

क्या एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 की PDF मुफ़्त में डाउनलोड की जा सकती है?

हाँ, एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 की PDF ncerthindi.com पर पूरी तरह मुफ़्त डाउनलोड की जा सकती है।

Keep learning

More chapters in विज्ञान

विज्ञान कक्षा 9 विज्ञान की NCERT पाठ्यपुस्तक (2026-27 संस्करण) — का अध्याय 7 ऑनलाइन मुफ़्त पढ़ें: NCERT द्वारा प्रकाशित पूरा अध्याय, हर चित्र, हल किए गए उदाहरण और अभ्यास के साथ, चरण-दर-चरण समाधान, उत्तर और रिवीजन नोट्स के साथ। ऊपर दी गई NCERT PDF खोलें, या सभी NCERT कक्षा 9 पाठ्यपुस्तकें देखें।