गणित • कक्षा 3

गणित (गणित मेला)

NCERT पाठ्यपुस्तक14 अध्याय

अध्याय नोट्स

गणित (गणित मेला) में आप क्या सीखेंगे

गणित (गणित मेला) का त्वरित रिवीज़न मैप — हर अध्याय का मूल विचार और पाँच मुख्य बातें। पूरा NCERT PDF और विस्तृत नोट्स पढ़ने के लिए किसी भी अध्याय पर टैप करें।

01

नाम में क्या है?

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 1, "नाम में क्या है?", देबा और दीप की कहानी के माध्यम से बिना गिनती जाने भी वस्तुओं का हिसाब रखने के लिए मिलान-चिह्न (टैली मार्क) का उपयोग सिखाता है, तथा नामों के अक्षर गिनकर तुलना करने, संख्या-नामों के अक्षर गिनने और वस्तुओं को समूहों में बाँटने की गतिविधियाँ कराता है।

  • 1देबा और दीप दीवार पर मिलान-चिह्न लगाकर — जाते समय एक चिह्न, आते समय एक काट — बिना गिनती जाने गायों का हिसाब रखते हैं।
  • 2मित्र हेमंत के पास 36 गायें और 23 भेड़ें थीं — मिलान-चिह्न से उनका हिसाब रखने की भी गतिविधि है।
  • 3जानवरों के नाम (चमगादड़, अजगर, गिलहरी, छिपकली, कबूतर आदि) में अक्षर गिनकर पहले दल का नायक सबसे लंबे नाम वाला और दूसरे दल का नायक सबसे छोटे नाम वाला बनाया जाता है।
  • 41 से 99 के बीच संख्या-नाम शब्द-कार्डों से बनाए जाते हैं; जैसे तैंतालीस में 9 अक्षर हैं।
  • 5एक पहेली में बच्चों को 1 से 99 के बीच वे सभी संख्याएँ ढूँढनी हैं जिनके नाम में 8 अक्षर हों।
02

खिलौनों का आनंद

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 2, "खिलौनों का आनंद", बच्चों को पाँच त्रि-आयामी आकारों — घन, घनाभ, बेलन, शंकु और गोला — से परिचित कराता है; खिलौनों, डिब्बों और रोज़मर्रा की वस्तुओं के ज़रिए बच्चे इन आकारों को पहचानते, नाम देते और उनकी सतहों, किनारों व कोनों का वर्णन करते हैं।

  • 1पाँच त्रि-आयामी आकार सिखाए जाते हैं: घन, घनाभ, बेलन, शंकु और गोला।
  • 2हर आकार की सतहों (सपाट या घुमावदार), किनारों (सीधे या घुमावदार) और कोनों का वर्णन किया जाता है।
  • 3घन एक विशेष प्रकार का घनाभ है — यह महत्त्वपूर्ण तथ्य अध्याय में दिया गया है।
  • 4पासे (घन) की आमने-सामने की सतहों के बिंदुओं का योग सदा 7 होता है।
  • 5देविका के खिलौना इंजन में लाल बेलन, पीले शंकु, स्लेटी घनाभ और नीले घन हैं — बच्चे हर रंग और आकार की गिनती करते हैं।
03

दोहरा शतक

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 3, "दोहरा शतक", बच्चों को 100 से 200 तक की संख्याएँ बंडलों-लकड़ियों, संख्या-रेखा और संख्या-वाक्यों से पढ़ना-लिखना सिखाता है, साथ ही यह बताता है कि प्राचीन भारतीयों ने केवल दस प्रतीकों से बनी हमारी संख्या-प्रणाली का आविष्कार कैसे किया।

  • 1प्राचीन भारतीयों ने दस प्रतीकों (0–9) की संख्या-प्रणाली का आविष्कार किया, जो अब पूरे विश्व में प्रयोग होती है।
  • 2'0' का प्रतीक 'कुछ नहीं' दर्शाता है और यही पूरी दशमलव संख्या-प्रणाली को कार्यान्वित करता है।
  • 3100 = 10-10 की 10 गड्डियाँ — इस समूहीकरण के विचार से बड़ी संख्याएँ समझना आसान होता है।
  • 4101 से 200 तक की संख्याएँ 100 में जोड़कर बनती हैं; जैसे 100 और 7 = 107 (एक सौ सात)।
  • 5200 को 'दोहरा शतक' कहा जाता है — तालिकाओं, संख्या-रेखाओं और गतिविधियों से इसे चरण-दर-चरण बनाया जाता है।
04

नानी माँ के साथ

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 4, "नानी माँ के साथ", चिराग और नंदिनी की नानी माँ से मिलने की कहानी के ज़रिए कंचे छुपाना, बालूशाही बाँटना, डाक-टिकट जमा करना, मूली-सेब तोड़ना जैसी रोज़मर्रा की परिस्थितियों से 200 तक की संख्याओं का जोड़-घटाव सिखाता है — संख्या-रेखा, गिनलड़ी, बंडलों-लकड़ियों, बॉक्स-आरेख और 1–100 संख्या-जाल से — तथा अनुमान, 5, 6, 9 और 10 से क्रमानुसार गिनती और जादुई-वर्ग पहेलियाँ भी सिखाता है।

  • 1जोड़-घटाव का अभ्यास 200 तक की संख्याओं के साथ असली कहानियों में होता है — बालूशाही मिठाई, डाक-टिकट, मूलियाँ और सेब।
  • 2बच्चे चार तरीकों का उपयोग करते हैं: संख्या-रेखा, गिनलड़ी, बंडलों-लकड़ियाँ और बॉक्स-आरेख।
  • 3छुपे कंचों का जादू-खेल 'कुल ज्ञात हो तो अज्ञात भाग कैसे पता करें' — यही घटाव का मूल विचार है — सिखाता है।
  • 4मेंढक और टिड्डा 1–100 के जाल पर 5, 6, 9 और 10 की छलाँग लगाते हैं — क्रमानुसार गिनती का अभ्यास होता है।
  • 5हर सवाल से पहले अनुमान लगाना अनिवार्य है — पहले अनुमान, फिर सही हिसाब।
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आकृतियों के साथ आनंद

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 5, "आकृतियों के साथ आनंद", बच्चों को आयत, वर्ग, त्रिभुज और वृत्त जैसी 2D आकृतियों से परिचित कराता है — रंगोली बनाने, डिब्बों के फलकों की रूपरेखा खींचने, कागज़ मोड़ने और माचिस की तीलियों से आकृतियाँ बनाने जैसी गतिविधियों के माध्यम से।

  • 1आयत में 4 भुजाएँ और 4 कोने होते हैं; केवल आमने-सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं — वर्ग में चारों भुजाएँ बराबर।
  • 2आयत और वर्ग दोनों में समकोण होते हैं; बच्चे कागज़ की पट्टियों से समकोण, कम और अधिक कोनों की पहचान करते हैं।
  • 3त्रिभुज में 3 भुजाएँ और 3 कोने होते हैं; बच्चे रंगोली में त्रिभुज गिनते हैं और वर्गाकार कागज़ को काटकर त्रिभुज बनाते हैं।
  • 4घनाभ के फलक आयत या वर्ग होते हैं; माचिस की डिब्बी के तीनों फलकों की रूपरेखा खींचने पर तीन अलग आयत मिलते हैं।
  • 5वृत्त का केंद्र कागज़ की थाली को दो बार मोड़कर — दोनों बार अलग दिशा में — उनके मिलने के बिंदु से ज्ञात होता है।
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सैकड़ों का घर - 1

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 6, "सैकड़ों का घर - 1", बच्चों को 200 से आगे तीन अंकों की संख्याएँ गिनना, पढ़ना, लिखना और तुलना करना सिखाता है — मेले में तोरणों में 250 त्रिभुज, 280 चूड़ियाँ और 298 टॉफियाँ जैसी वास्तविक वस्तुओं तथा संख्या-रेखा, संख्या-पट्टी, इमारत के मकान-नंबर और दीनेस-ब्लॉक जैसी गतिविधियों के द्वारा।

  • 1तोरणों में 250 त्रिभुज, 280 चूड़ियाँ और 298 टॉफियाँ — 300 तक पहुँचने और उससे आगे जाने का अभ्यास।
  • 2स्थानमान दीनेस-ब्लॉक से — H डिब्बे (100), T डिब्बे (10) और O पैकेट (1)।
  • 3संख्याएँ कई तरह से: '200 और 35 अधिक', '250 से 15 कम', 200 + 10 + 1 = 211।
  • 4संख्या-रेखा से तीन अंकों की संख्याएँ 500 तक पहचानना और उनके बीच की दूरी ज्ञात करना।
  • 5झंडे वाला अनुमान-खेल: 200 से 210 के बीच की गुप्त संख्या ऊँचे/नीचे संकेतों से खोजना।
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रक्षाबंधन

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 7, "रक्षाबंधन", रक्षाबंधन पर्व की पृष्ठभूमि में गुणन को बार-बार जोड़ के रूप में और भाग को समान बँटवारे के रूप में प्रस्तुत करता है — राखियाँ बनाना, लड्डू बाँटना, काजू कतली वितरण, संख्या-पथ पर छलाँग और तीलियाँ खींचकर पहाड़े बनाने जैसी गतिविधियों के ज़रिए 1 से 10 तक के पहाड़े सिखाता है।

  • 1गुणन को राखी बनाने की सामग्री से समझाया जाता है — 5 राखियों के लिए 4-4 मोती = 5 × 4 = 20 मोती।
  • 25 राखियों में 1-1 पुष्प = 5 पुष्प; 2-2 धागे = 10 धागे; 4-4 मोती = 20 मोती — चरण-दर-चरण।
  • 3भाग: 18 लड्डू को 9 लोगों में बराबर बाँटने पर 18 ÷ 9 = 2 प्रत्येक को।
  • 4संख्या-पथ पर 0 से 3-3 या 6-6 कदम की छलाँग संबंधित पहाड़ा बनाती है।
  • 5तीलियाँ आड़ी-खड़ी खींचकर उनके मिलन-बिंदु गिनना पहाड़े बनाने का एक और तरीका है।
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उचित हिस्सा

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 8, "उचित हिस्सा", बच्चों को समान बँटवारे की अवधारणा से परिचित कराता है — आकृतियों, वस्तुओं और मात्राओं के आधे और चौथाई हिस्से पहचानना व बनाना सिखाता है, तथा आधे और दोगुने के संबंध को समझाता है।

  • 1एक पूरे को 2 लोगों में बराबर बाँटने पर प्रत्येक भाग आधा कहलाता है।
  • 2दो आधे मिलकर एक पूरा बनाते हैं।
  • 3एक पूरे को 4 लोगों में बराबर बाँटने पर प्रत्येक भाग एक-चौथाई कहलाता है।
  • 4चार चौथाई मिलकर एक पूरा बनाते हैं; दो-चौथाई = एक आधा।
  • 5आयताकार या वर्गाकार कागज़ को मोड़कर कई तरीकों से आधा और चौथाई दिखाया जा सकता है।
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सैकड़ों का घर - 2

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 9, "सैकड़ों का घर - 2", बच्चों को अकबर-बीरबल की कहानी के माध्यम से 1000 तक की तीन-अंकीय संख्याओं को टाइल्स से बनाना, संख्या-रेखा पर अंकित करना, क्रम से गिनना और विशेष संख्या-पैटर्न (पैलिंड्रोम, जुड़वाँ, भूतसंख्या) खोजना सिखाता है।

  • 1अकबर-बीरबल की कहानी: बीरबल ने शहर में 963 (नौ सौ तिरसठ) कौवे होने का बुद्धिमानी से उत्तर दिया।
  • 2बच्चे सैकड़ा-दहाई-इकाई की टाइल्स से 832, 947, 504, 620, 700 जैसी संख्याएँ बनाकर अभ्यास-पुस्तिका में लिखते हैं।
  • 3संख्या-रेखा पर 500 से 900 के बीच संख्याएँ अंकित की जाती हैं और सारस-पहेली में लक्ष्य तक पहुँचने के कदम गिने जाते हैं।
  • 4तम्बोला खेल में 570 से 630 के बीच की संख्याओं की जाली भरी जाती है और सुराग मिलाने पर संख्याएँ काटी जाती हैं।
  • 5क्रम-गणना में 10, 15, 25, 30 और 100 के अंतराल का उपयोग होता है, कुछ श्रृंखलाएँ 1000 तक पहुँचती हैं।
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कक्षा उत्सव का आनंद

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 10, "कक्षा उत्सव का आनंद", बच्चों को कक्षा-उत्सव के संदर्भ में लंबाई मापना सिखाता है — पहले बालिश्त, पग और कागज़-पट्टी जैसे अनौपचारिक साधनों से, फिर मानक इकाई मीटर (तथा आधा मीटर और पाव मीटर) से।

  • 1बच्चे बालिश्त, पग और कागज़-पट्टी जैसे अनौपचारिक साधनों से लंबाई मापते हैं।
  • 2लीना और आदि एक ही मेज़ को अपनी-अपनी बालिश्त से मापते हैं — माप अलग आता है क्योंकि बालिश्त व्यक्ति-अनुसार भिन्न होती है।
  • 3शेली और आदि धागे से मेज़ की चौड़ाई और लंबाई मापकर तय करते हैं कि मेज़ दरवाज़े से बाहर निकाली जा सकती है या नहीं।
  • 4मानक इकाई मीटर का परिचय: बच्चे मीटर-छड़ से रस्सी पर निशान लगाकर मीटर-रस्सा बनाते हैं।
  • 5मीटर-रस्से को मोड़कर आधा मीटर और पाव मीटर बनाते हैं और वस्तुओं को इनसे तुलना करते हैं।
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भरना और उठाना

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 11, "भरना और उठाना", बच्चों को रोज़मर्रा के बर्तनों — गिलास, जग, कटोरी, बोतल — के ज़रिए धारिता (किसी पात्र में कितना आता है) और भार (कोई वस्तु कितनी भारी है) की तुलना, अनुमान और मापन से परिचित कराता है।

  • 1बच्चे अलग-अलग गिलासों की सामग्री एक समान पात्र में डालकर तुलना करते हैं — जिसका स्तर सबसे ऊँचा हो, उसमें सबसे अधिक था।
  • 2लीटर को तरल मापने की मानक इकाई के रूप में प्रस्तुत किया गया; आधा लीटर और पाव लीटर भी सिखाए गए।
  • 3जग, गिलास, कटोरी, मग और बाल्टी की तुलना 1 लीटर की बोतल से होती है।
  • 4भार की तुलना हाथ में वस्तु पकड़कर और तुला पर सिक्के, रबड़ या रेत से भरी दियासलाई की डिबिया जैसे अनौपचारिक बाट रखकर होती है।
  • 5किलोग्राम को भार की मानक इकाई के रूप में प्रस्तुत किया गया; 1 किलो नमक का पैकेट सन्दर्भ है।
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लेन - देन

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 12, "लेन-देन", बच्चों को बॉक्स-आरेख, सैकड़ा-दहाई-इकाई (HTO) खंड और संख्या-रेखा के ज़रिए तीन-अंकीय संख्याओं का जोड़ और घटाना सिखाता है — किशन की पौधशाला और गाँव के दुकानदार की कमाई जैसे वास्तविक संदर्भों में।

  • 1सैकड़ा-दहाई-इकाई (HTO) खंडों से तीन-अंकीय संख्याओं का जोड़ और घटाव।
  • 2समस्या हल करने से पहले बॉक्स-आरेख से उसे दृश्य रूप में प्रस्तुत करना।
  • 3पुनर्समूहन: घटाव में 1 दहाई को 10 इकाइयों में बदलना या जोड़ में 10 दहाइयों को 1 सैकड़े में मिलाना।
  • 4संख्या-रेखा पर तीन-अंकीय जोड़-घटाव।
  • 5भारतीय रुपये के नोट और सिक्कों का मिलान, एक राशि चुकाने के अनेक तरीके।
13

समय-समय की बात

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 13, "समय-समय की बात", कैलेंडर बनाना और पढ़ना, 12 महीनों व एक वर्ष के दिनों की गिनती, एनालॉग और डिजिटल घड़ी पढ़ना, समय की अवधि मापना तथा जन्म प्रमाण-पत्र पर DD/MM/YY प्रारूप समझना सिखाता है।

  • 1सितंबर 2024 का कैलेंडर बनाओ और बताओ कि उसमें कितने रविवार हैं, गुरुवार की तारीखें कौन-सी हैं
  • 212 महीनों के नाम लिखो; बताओ किस महीने में 30 से कम दिन होते हैं और एक वर्ष में कुल कितने दिन
  • 3एनालॉग घड़ी पर सवा और साढ़े बजे के लिए सुइयाँ बनाना; दो घड़ियों के बीच बीते मिनट गिनना
  • 4डिजिटल घड़ी (अंक) और एनालॉग घड़ी (सुइयाँ) का अंतर; दोनों कहाँ-कहाँ मिलती हैं
  • 5रोज़मर्रा के कामों में लगने वाला समय — मिनट (दाँत माँजना, नहाना) से लेकर महीनों (स्वेटर बुनना, मौसम बदलना) तक
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सूरजकुंड मेला

कक्षा 3 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित मेला) का अध्याय 14, "सूरजकुंड मेला", सोनी और अवि की हरियाणा के फरीदाबाद जिले के सूरजकुंड मेले की यात्रा के माध्यम से बच्चों को सममिति, दर्पण प्रतिबिंब, टाइलिंग के पैटर्न तथा मेले के मानचित्र को पढ़ना और दिशाओं का अनुसरण करना सिखाता है।

  • 1सममिति का परिचय मोतियों की माला से: एक रंग के 4 और दूसरे रंग के 4 मोतियों से 8 मोतियों की माला बनाओ और जाँचो कि वह सममित है या नहीं
  • 2भारत की रंगोली परंपराएँ — कोलम (तमिलनाडु), पूकलम (केरल), ऐपण (उत्तराखंड) — क्या ये सममित हैं? अधूरी रंगोलियाँ पूरी करो
  • 3मुखौटा बनाने की गतिविधि: कागज़ को बीच से मोड़कर एक तरफ का आकार काटो, खोलने पर सममित मुखौटा मिलेगा
  • 4दर्पण खेल: एक तरफ काउंटर रखो, दूसरी तरफ उनका दर्पण प्रतिबिंब बनाओ; रेखा पर असली दर्पण रखकर जाँचो
  • 5टाइलिंग: रंगोमेट्री के आकारों से रास्ते बिना अंतराल और ओवरलैप के भरो — टेसेलेशन की शुरुआती समझ