सारांश
कक्षा 5 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 5, "हमारा जीवंत देश", भारत की विविधता और एकता को राष्ट्रीय प्रतीकों, मुद्रा नोटों, भाषाओं, वेशभूषाओं, संगीत और नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करता है।
- गणतंत्र दिवस और राष्ट्रीय ध्वज — 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान अपनाया, इसीलिए हम इस दिन गणतंत्र दिवस मनाते हैं। तिरंगे में केसरिया रंग शक्ति और साहस का, श्वेत रंग शांति और सत्य का तथा हरा रंग वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक है। मध्य में नीला अशोक चक्र कर्तव्य और धर्म को दर्शाता है।
- मुद्रा नोटों में भारत की झलक — भारतीय मुद्रा नोटों पर महात्मा गांधी का चित्र, राष्ट्रीय प्रतीक, अनेक भाषाएँ और देश के स्मारक अंकित हैं। नोटों पर छोटे गोल चश्मे का प्रतीक स्वच्छ भारत अभियान का प्रतीक है जो गांधी जी के चश्मे से प्रेरित है। MANI ऐप दृष्टिबाधित व्यक्तियों को नोट पहचानने में सहायता करता है।
- भाषाएँ, वेशभूषा और सांस्कृतिक विविधता — भारत में एक हजार से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं। विभिन्न क्षेत्रों की वेशभूषाएँ वहाँ की पहचान और परंपरा को व्यक्त करती हैं — जैसे राजस्थान का साफा या पगड़ी और हिमाचल प्रदेश की टोपी। खान-पान, पर्व और वेशभूषा मिलकर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक संपदा बनाते हैं।
- संगीत और नृत्य — जीवंत संस्कृति — भारत में तबला, मृदंग, ढोल, ढोलक, खंजीरा, पखावज जैसे अनेक वाद्ययंत्र हैं जो स्थानीय संस्कृति और परंपरा से जुड़े हैं। विभिन्न राज्यों में शास्त्रीय और लोक नृत्य की अनूठी परंपराएँ हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती हैं।
- एकता की भावना और भारत की उपलब्धियाँ — भारत की विविधता को वन के रूपक से समझाया गया है — अनेक प्रकार के पेड़-पौधे, पशु-पक्षी मिलकर वन को मजबूत बनाते हैं, उसी प्रकार विविधता भारत को शक्तिशाली बनाती है। आयुर्वेद, योग, UPI डिजिटल भुगतान और अंतरिक्ष प्रक्षेपण जैसी उपलब्धियाँ भारत की प्रगति की कहानी बताती हैं।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 0126 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते हैं क्योंकि 1950 में इसी दिन भारत ने अपना संविधान अपनाया था।
- 02तिरंगे का केसरिया = शक्ति व साहस; श्वेत = शांति व सत्य; हरा = वृद्धि व समृद्धि; नीला अशोक चक्र = कर्तव्य और धर्म।
- 03भारतीय मुद्रा नोटों पर स्वच्छ भारत अभियान का चश्मा-प्रतीक गांधी जी के चश्मे से प्रेरित है।
- 04भारत में एक हजार से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं — यह विश्व के सर्वाधिक बहुभाषी देशों में से एक है।
- 05भारत का संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है।
- 06एशियाई शेर केवल गुजरात के गिर वनों में पाए जाते हैं — लगभग 150 वर्ष पूर्व इनकी संख्या केवल कुछ दर्जन थी, संरक्षण प्रयासों से अब बढ़ी है।
- 07भारत में तबला, मृदंग, पखावज, ढोलक, ढोल, खंजीरा सहित अनेक प्रकार के ढोल वाद्ययंत्र हैं, हर एक की अपनी विशेष लय और परंपरा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01कक्षा 5 हमारी अद्भुत दुनिया के अध्याय 5 'हमारा जीवंत देश' का मुख्य विषय क्या है?
यह अध्याय राष्ट्रीय प्रतीकों, भाषाओं, वेशभूषाओं, संगीत, नृत्य और साझे मूल्यों के माध्यम से भारत की विविधता और एकता को दर्शाता है, जो इतने अलग-अलग लोगों और परंपराओं को एक सूत्र में बाँधती है।
02हम 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं?
26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान अपनाया था — नियमों की वह विशेष पुस्तक जो देश को दिशा देती है। प्रतिवर्ष इसी दिन को याद करने के लिए गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।
03भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंग क्या दर्शाते हैं?
सबसे ऊपर केसरिया रंग शक्ति और साहस का, मध्य में श्वेत रंग शांति और सत्य का (बीच में नीला अशोक चक्र कर्तव्य एवं धर्म का) और सबसे नीचे हरा रंग वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक है।
04मुद्रा नोटों पर चश्मे का प्रतीक किस अभियान को दर्शाता है?
मुद्रा नोटों पर छोटे गोल चश्मे का प्रतीक स्वच्छ भारत अभियान का प्रतीक है जो महात्मा गांधी के चश्मे से प्रेरित है — गांधी जी स्वच्छता को बहुत महत्त्व देते थे।
05भारत में कितनी भाषाएँ बोली जाती हैं?
भारत में एक हजार से अधिक भाषाएँ बोली जाती हैं, जो इसे विश्व के सर्वाधिक बहुभाषी देशों में से एक बनाती हैं।
06एशियाई शेर भारत में कहाँ पाए जाते हैं और यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
एशियाई शेर अब केवल गुजरात के गिर वनों में पाए जाते हैं। लगभग 150 वर्ष पूर्व इनकी संख्या केवल कुछ दर्जन रह गई थी, लेकिन भारत के संरक्षण प्रयासों से इनकी संख्या बढ़ी है — यह राष्ट्रीय गर्व का विषय है।
07अध्याय में वन के उदाहरण से भारत की विविधता को कैसे समझाया गया है?
अध्याय भारत की विविधता की तुलना एक वन से करता है जहाँ अनेक प्रकार के पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और कीट मिलकर वन को मजबूत और सुंदर बनाते हैं — उसी प्रकार विविधता भारत को अधिक शक्तिशाली और समृद्ध बनाती है।
08इस अध्याय में उल्लिखित कुछ भारतीय ढोल वाद्ययंत्रों के नाम बताइए।
अध्याय में तबला, मृदंग, पखावज, ढोलक, ढोल, खंजीरा, थविल, इदक्का, खोल, नगाड़ा और धमा जैसे ढोल वाद्ययंत्रों का उल्लेख है, जिनमें से प्रत्येक अपनी स्थानीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ा है।
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