गणित • कक्षा 6

गणित (गणित प्रकाश)

NCERT पाठ्यपुस्तक10 अध्याय

अध्याय नोट्स

गणित (गणित प्रकाश) में आप क्या सीखेंगे

गणित (गणित प्रकाश) का त्वरित रिवीज़न मैप — हर अध्याय का मूल विचार और पाँच मुख्य बातें। पूरा NCERT PDF और विस्तृत नोट्स पढ़ने के लिए किसी भी अध्याय पर टैप करें।

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गणित में पैटर्न

कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 1, "गणित में पैटर्न", पैटर्नों की खोज और उनके अस्तित्व के कारणों के स्पष्टीकरण के रूप में गणित का परिचय देता है — जिसमें त्रिभुजाकार, वर्ग, घन, विरहांक संख्याएँ और 2 तथा 3 की घातें जैसे दस संख्या अनुक्रम, तथा सम बहुभुज, संपूर्ण ग्राफ और कोच हिमकण जैसे आकार अनुक्रम शामिल हैं।

  • 1गणित, पैटर्नों की खोज तथा उनके अस्तित्व के कारणों के स्पष्टीकरण की खोज है; गणितज्ञ इसे कला और विज्ञान दोनों के रूप में देखते हैं।
  • 2संख्या सिद्धांत वह शाखा है जिसमें पूर्ण संख्याओं के पैटर्नों का अध्ययन किया जाता है; ज्यामिति आकारों के पैटर्नों का अध्ययन करती है।
  • 3सारणी 1 में 10 संख्या अनुक्रम हैं: सभी '1', गणन संख्याएँ, विषम संख्याएँ, सम संख्याएँ, त्रिभुजाकार संख्याएँ, वर्ग संख्याएँ, घन संख्याएँ, विरहांक संख्याएँ, 2 की घातें, 3 की घातें।
  • 4त्रिभुजाकार संख्याएँ (1, 3, 6, 10, 15, 21, 28, ...) क्रमागत गणन संख्याओं के योग से बनती हैं।
  • 5पहले n विषम संख्याओं का योग सदैव n² होता है — उदाहरण: 1+3+5+7+9+11=36=6²।
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रेखाएँ और कोण

कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 2, "रेखाएँ और कोण", ज्यामिति की आधारभूत अवधारणाओं — बिंदु, रेखाखंड, रेखा, किरण और कोण — का परिचय देता है, तथा विद्यार्थियों को कोणों का वर्गीकरण, तुलना और चाँदे (प्रोट्रैक्टर) से माप करना सिखाता है।

  • 1एक बिंदु की कोई लंबाई, चौड़ाई या ऊँचाई नहीं होती — वह के वल एक सटीक स्थान निर्धारित करता है, और उसे बड़े अक्षर से दर्शाया जाता है।
  • 2रेखाखंड दो बिंदुओं के बीच का सबसे छोटा मार्ग है; रेखा दोनों दिशाओं में अनंत तक विस्तारित होती है; किरण एक बिंदु से आरंभ होकर एक दिशा में अनंत तक जाती है।
  • 3किसी भी दो भिन्न बिंदुओं से होकर एक और के वल एक अद्वितीय रेखा जाती है; एक बिंदु से अनंत रेखाएँ जा सकती हैं।
  • 4एक कोण, उभयनिष्ठ प्रारंभिक बिंदु (शीर्ष) वाली दो किरणों से बनता है; दोनों किरणें कोण की भुजाएँ कहलाती हैं।
  • 5कोण का माप शीर्ष के परितः घूर्णन की मात्रा है — भुजाओं की लंबाई से कोण का माप नहीं बदलता।
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संख्याओं का खेल

कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 3, "संख्याओं का खेल", यह दिखाता है कि संख्याओं का उपयोग सूचना देने, पैटर्न खोजने, पहेलियाँ सुलझाने और खेल जीतने में कैसे किया जाता है — इसमें महाकोष्ठ, विलोमाक्षर (पैलिंड्रोम), कापरेकर स्थिरांक, कोलाट्ज़ अनुमान, अंकों का योग और आकलन शामिल हैं।

  • 1महाकोष्ठ वह संख्या है जो सारणी में अपने सभी समीपवर्ती कोष्ठों की संख्याओं से बड़ी हो; किसी भी सारणी की सबसे बड़ी संख्या सदैव महाकोष्ठ होती है।
  • 2विलोमाक्षर संख्याएँ बाएँ से दाएँ और दाएँ से बाएँ एक जैसी पढ़ी जाती हैं (उदाहरण: 575, 848, 1111); किसी भी 2-अंकीय संख्या और उसके उलटे को जोड़ते रहने पर अंततः एक विलोमाक्षर संख्या मिलती है।
  • 34-अंकीय संख्याओं के लिए कापरेकर स्थिरांक 6174 है: अंकों से सबसे बड़ी और सबसे छोटी संख्या बनाएँ, घटाएँ और दोहराएँ — हमेशा 6174 मिलेगा।
  • 43-अंकीय संख्याओं के लिए कापरेकर स्थिरांक 495 है।
  • 5कापरेकर स्थिरांक की खोज 1949 में महाराष्ट्र के देवलाली के गणित शिक्षक डी. आर. कापरेकर ने की थी।
04

आँकड़ों का प्रबंधन और प्रस्तुतिकरण

कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 4, "आँकड़ों का प्रबंधन और प्रस्तुतिकरण", विद्यार्थियों को आँकड़े संग्रहित करना, मिलान चिह्नों और बारंबारता सारणियों से व्यवस्थित करना, तथा चित्रालेखों और दंड आलेखों द्वारा प्रस्तुत करना सिखाता है।

  • 1आँकड़े, तथ्यों, संख्याओं, मापनों, प्रेक्षणों या विवरणों का कोई भी ऐसा संग्रह है जो वस्तुओं के बारे में सूचना देता है।
  • 2मिलान चिह्न आँकड़ों को व्यवस्थित करते हैं: प्रत्येक चिह्न '|' एक गणना को दर्शाता है और चार चिह्नों पर एक तिरछी रेखा (||||) पाँच को दर्शाती है।
  • 3बारंबारता वह संख्या है जितनी बार आँकड़ों में कोई मान या वर्ग आता है।
  • 4चित्रालेख चित्रों या प्रतीकों द्वारा आँकड़ों को दर्शाता है; प्रत्येक प्रतीक क्या दर्शाता है, यह बताने के लिए पैमाना/कुंजी अवश्य दी जाए।
  • 5चित्रालेख में आधा प्रतीक पैमाने के मान का आधा दर्शाता है (उदाहरण: पूरा प्रतीक = 10 तो आधा = 5)।
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अभाज्य समय

कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 5, "अभाज्य समय", अभाज्य और भाज्य संख्याओं, अभाज्य गुणनखंडन, सह-अभाज्य संख्याओं और 2, 4, 5, 8 तथा 10 के लिए विभाज्यता परीक्षण को इडली-वड़ा खेल और जैकपॉट के लिए छलाँग जैसी गतिविधियों के माध्यम से सिखाता है।

  • 1अभाज्य संख्याओं के ठीक दो गुणनखंड होते हैं — 1 और वह संख्या स्वयं। प्रारंभिक अभाज्य संख्याएँ: 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19।
  • 2भाज्य संख्याओं के दो से अधिक गुणनखंड होते हैं। प्रारंभिक भाज्य संख्याएँ: 4, 6, 8, 9, 10, 12।
  • 3संख्या 1 न अभाज्य है, न भाज्य — इसका केवल एक गुणनखंड है।
  • 42 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है; अन्य सभी सम संख्याएँ भाज्य होती हैं।
  • 5इराटोस्थेनीस की छलनी — 1 काटो, फिर प्रत्येक अचिह्नित संख्या को घेरकर उसके सभी गुणजों को काटते जाओ; शेष घेरी संख्याएँ अभाज्य हैं।
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परिमाप और क्षेत्रफल

कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 6, "परिमाप और क्षेत्रफल", आयत, वर्ग, त्रिभुज और नियमित बहुभुजों का परिमाप तथा क्षेत्रफल सूत्रों और वर्गांकित कागज पर आकलन द्वारा सिखाता है।

  • 1बहुभुज का परिमाप = उसकी सभी भुजाओं की लंबाइयों का योगफल।
  • 2आयत का परिमाप = 2 × (लंबाई + चौड़ाई)।
  • 3वर्ग का परिमाप = 4 × भुजा की लंबाई।
  • 4समबाहु त्रिभुज का परिमाप = 3 × भुजा की लंबाई।
  • 5किसी भी नियमित बहुभुज का परिमाप = भुजाओं की संख्या × एक भुजा की लंबाई।
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भिन्न

कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 7, "भिन्न", समान भागों के रूप में भिन्न का अर्थ, संख्या रेखा पर निरूपण, समतुल्य भिन्न, मिश्र भिन्न, सरलतम रूप, तुलना तथा ब्रह्मगुप्त की विधि से भिन्नों का योग और व्यवकलन सिखाता है।

  • 1भिन्नात्मक इकाई (इकाई भिन्न) वह होती है जब एक पूर्ण को समान भागों में बाँटने पर प्रत्येक भाग 1/n हो।
  • 2भिन्न 5/6 में ऊपरी संख्या 5 अंश और नीचे की संख्या 6 हर कहलाती है।
  • 3इकाई भिन्नों में जितना बड़ा हर, उतना छोटा भिन्न: 1/2 > 1/5 > 1/9।
  • 4भिन्नों को संख्या रेखा पर प्रदर्शित किया जा सकता है; 0 और 1 के बीच अनगिनत भिन्न होते हैं।
  • 5मिश्र भिन्न में एक पूर्ण संख्या और 1 से छोटा भिन्न होता है (जैसे 2 और 2/3)।
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रचनाओं के साथ खेलना

कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 8, "रचनाओं के साथ खेलना", परकार और रूलर की सहायता से वृत्त, वर्ग और आयत की सटीक रचना सिखाता है तथा इन आकृतियों के गुणधर्मों — विकर्ण और समदूरस्थ बिंदु — की खोज कराता है।

  • 1वृत्त किसी केंद्र बिंदु से निश्चित दूरी (त्रिज्या) पर स्थित सभी बिंदुओं का समुच्चय है; परकार की नोक स्थिर रखकर पेंसिल घुमाने से वृत्त खिंचता है।
  • 2गणित प्रकाश में कागज पर पेंसिल द्वारा खींची गई कोई भी आकृति 'वक्र' कहलाती है — सरल रेखाएँ, वृत्त और चाप सभी वक्र हैं।
  • 3आयत का गुणधर्म R1: सम्मुख भुजाएँ समान लंबाई की होती हैं। R2: सभी चार कोण 90° के होते हैं।
  • 4वर्ग का गुणधर्म S1: सभी चार भुजाएँ समान। S2: सभी चार कोण 90°। प्रत्येक वर्ग आयत के दोनों गुणधर्म भी पूरा करता है।
  • 5वर्ग या आयत के कोने के बिंदुओं को आकृति के चारों ओर (दक्षिणावर्त या वामावर्त) क्रम में लिखते हैं; यादृच्छिक क्रम जैसे ABDC अमान्य है।
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सममिति

कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 9, "सममिति", सममिति की रेखा (परावर्तीय सममिति) और घूर्णन सममिति की अवधारणाएँ सिखाता है — मोड़ना, काटना और घुमाना जैसी व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से सममित आकृतियों को पहचानना, बनाना और उन पर तर्क करना।

  • 1जब कोई रेखा आकृति को दो ऐसे भागों में बाँटे जो मोड़ने पर पूर्णतया एक-दूसरे को ढक लें, वह आकृति की सममिति की रेखा (या सममिति की अक्ष) कहलाती है।
  • 2एक आकृति में एक से अधिक सममिति की रेखाएँ हो सकती हैं — वर्ग में 4 (2 मध्यबिंदुओं से, 2 विकर्णों के अनुदिश), समबाहु त्रिभुज में 3।
  • 3जो आयत वर्ग नहीं है, उसका विकर्ण सममिति की रेखा नहीं होता।
  • 4सममिति की रेखाओं वाली आकृति को परावर्तीय सममिति भी कहते हैं।
  • 5जब किसी आकृति को एक निश्चित केंद्र के परितः 0° और 360° के बीच किसी कोण पर घुमाने पर वह ठीक वैसी ही दिखे, तो उसमें घूर्णन सममिति है और वह कोण सममिति का कोण कहलाता है।
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पूर्णांक

कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 10, "पूर्णांक", पूर्णांकों — धनात्मक संख्याओं, ऋणात्मक संख्याओं और शून्य — का परिचय देता है, जिसके लिए बहुमंजिला इमारत की लिफ्ट, खदान के स्तर, बैंक जमा-निकासी, समुद्र तल से ऊँचाई और तापमान जैसे वास्तविक जीवन के संदर्भों का उपयोग किया गया है।

  • 1पूर्णांक संख्याएँ हैं …, –3, –2, –1, 0, 1, 2, 3, … जो शून्य से दोनों दिशाओं में अनंत तक फैली हैं।
  • 2धनात्मक संख्याओं के आगे '+' चिह्न होता है और वे शून्य के दाईं ओर होती हैं; ऋणात्मक संख्याओं के आगे '–' चिह्न होता है और वे बाईं ओर; शून्य न धनात्मक है न ऋणात्मक।
  • 3किसी संख्या n का योज्य प्रतिलोम –n होता है; कोई संख्या और उसका योज्य प्रतिलोम मिलाकर सदैव शून्य देते हैं (जैसे, 7 + (–7) = 0)।
  • 4जोड़ का नियम: प्रारंभिक तल + गति = लक्षित तल। घटाव का नियम: लक्षित तल – प्रारंभिक तल = आवश्यक गति।
  • 5एक ऋणात्मक संख्या को घटाना, उसी संगत धनात्मक संख्या को जोड़ने के समान है (जैसे, (–1) – (–2) = (–1) + (+2) = +1)।