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अवलोकन

सारांश

कक्षा 6 गणित एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (गणित प्रकाश) का अध्याय 7, "भिन्न", समान भागों के रूप में भिन्न का अर्थ, संख्या रेखा पर निरूपण, समतुल्य भिन्न, मिश्र भिन्न, सरलतम रूप, तुलना तथा ब्रह्मगुप्त की विधि से भिन्नों का योग और व्यवकलन सिखाता है।

  • भिन्न — समान भागों की माप — भिन्न किसी संपूर्ण के समान भागों को मापता है — अंश भागों की गिनती करता है और हर भाग का आकार बताता है। इकाई भिन्नों में बड़ा हर छोटा भाग दर्शाता है, और भिन्न संख्या रेखा पर 0 और 1 के बीच स्थित होते हैं।
  • समतुल्य भिन्न और सरलतम रूप — ½, 2/4 और 3/6 जैसे भिन्न एक ही भाग को प्रकट करते हैं। अंश और हर को उनके म.स.प. से भाग देने पर सरलतम रूप मिलता है। मिश्र भिन्न एक पूर्ण भाग और 1 से कम एक भिन्न को मिलाता है।
  • भिन्नों की तुलना और योग-व्यवकलन — भिन्नों की तुलना या योग-व्यवकलन के लिए उन्हें पहले समान हर वाले समतुल्य भिन्नों में बदलते हैं — यही ब्रह्मगुप्त की विधि का सार है। भारत में भिन्न लेखन और गणना की परंपरा ऋग्वेद काल से चली आ रही है।
मुख्य बातें

मुख्य बिंदु और सूत्र

  1. 01भिन्नात्मक इकाई (इकाई भिन्न) वह होती है जब एक पूर्ण को समान भागों में बाँटने पर प्रत्येक भाग 1/n हो।
  2. 02भिन्न 5/6 में ऊपरी संख्या 5 अंश और नीचे की संख्या 6 हर कहलाती है।
  3. 03इकाई भिन्नों में जितना बड़ा हर, उतना छोटा भिन्न: 1/2 > 1/5 > 1/9।
  4. 04भिन्नों को संख्या रेखा पर प्रदर्शित किया जा सकता है; 0 और 1 के बीच अनगिनत भिन्न होते हैं।
  5. 05मिश्र भिन्न में एक पूर्ण संख्या और 1 से छोटा भिन्न होता है (जैसे 2 और 2/3)।
  6. 06समतुल्य भिन्न एक ही भाग दर्शाते हैं: 1/2 = 2/4 = 3/6 = 4/8।
  7. 07भिन्न के सरलतम रूप में अंश और हर का एकमात्र सार्व गुणनखंड 1 होता है।
  8. 08भिन्नों की तुलना के लिए उन्हें समान हर वाले समतुल्य भिन्नों में बदलकर अंशों की तुलना करते हैं।
  9. 09ब्रह्मगुप्त की विधि: भिन्नों को जोड़ने या घटाने के लिए पहले समान हर लाओ, फिर अंशों पर संक्रिया करो।
  10. 10ऋग्वेद में 3/4 को 'त्रि-पद' कहा गया है, जो आज हिंदी में 'तीन पाव' और तमिल में 'मुक्काल' के समान है।
  11. 11ब्रह्मगुप्त (628 ईस्वी) ने भिन्नों पर अंकगणितीय संक्रियाओं के नियम पहली बार औपचारिक रूप से प्रतिपादित किए।
प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

01

कक्षा 6 गणित का अध्याय 7 'भिन्न' किस बारे में है?

अध्याय 7 में भिन्न को समान भागों की माप के रूप में सिखाया जाता है। इसमें भिन्नात्मक इकाई, अंश-हर, संख्या रेखा पर भिन्न, मिश्र भिन्न, समतुल्य भिन्न, सरलतम रूप, तुलना और ब्रह्मगुप्त की विधि से योग-व्यवकलन शामिल हैं।

02

भिन्नात्मक इकाई क्या होती है?

जब एक पूर्ण को समान भागों में बाँटा जाता है, तो प्रत्येक भाग भिन्नात्मक इकाई कहलाता है। उदाहरण: 1 को 4 समान भागों में बाँटने पर प्रत्येक भाग 1/4 है। इन्हें इकाई भिन्न भी कहते हैं।

03

1/5 और 1/9 जैसी दो इकाई भिन्नों की तुलना कैसे करते हैं?

इन्हें भागों के रूप में सोचिए: 1/5 का अर्थ 1 को 5 लोगों में बाँटना और 1/9 का अर्थ 9 लोगों में बाँटना। अधिक लोगों में बाँटने पर प्रत्येक को कम मिलता है, इसलिए 1/5 > 1/9।

04

उचित और अनुचित भिन्न में क्या अंतर है?

उचित भिन्न में अंश हर से छोटा होता है (जैसे 3/5), अतः भिन्न 1 से कम होता है। अनुचित भिन्न में अंश हर से बड़ा होता है (जैसे 7/3), अतः भिन्न 1 से अधिक होता है। अनुचित भिन्न को मिश्र भिन्न के रूप में लिखा जा सकता है।

05

समतुल्य भिन्न क्या होते हैं और उन्हें कैसे ज्ञात करते हैं?

समतुल्य भिन्न एक ही मान को प्रकट करते हैं, जैसे 1/2 = 2/4 = 3/6। समतुल्य भिन्न ज्ञात करने के लिए अंश और हर दोनों को एक ही शून्येतर संख्या से गुणा या भाग करते हैं।

06

भिन्न को सरलतम रूप में कैसे लिखते हैं?

अंश और हर का म.स.प. ज्ञात कीजिए, फिर दोनों को उससे भाग दीजिए। उदाहरण: 36/60 में म.स.प. = 12, इसलिए 36÷12 = 3 और 60÷12 = 5; सरलतम रूप 3/5 है।

07

भिन्नों को ब्रह्मगुप्त की विधि से कैसे जोड़ते हैं?

ब्रह्मगुप्त की विधि: (1) हरों का एक सार्व गुणज ज्ञात करें। (2) प्रत्येक भिन्न को समान हर वाले समतुल्य भिन्न में बदलें। (3) अंशों को जोड़ें। (4) आवश्यक हो तो सरल करें। उदाहरण: 1/4 + 1/3 = 3/12 + 4/12 = 7/12।

08

ब्रह्मगुप्त कौन थे और भिन्न में उनका क्या योगदान था?

ब्रह्मगुप्त (628 ईस्वी) भारतीय गणितज्ञ थे जिन्होंने भिन्नों पर सभी अंकगणितीय संक्रियाओं के नियम पहली बार औपचारिक रूप से प्रतिपादित किए। उनकी विधि — समान हर लाकर अंशों पर संक्रिया करना — आज भी विश्वभर में उपयोग होती है।

09

क्या गणित प्रकाश कक्षा 6 अध्याय 7 की पीडीएफ निःशुल्क डाउनलोड के लिए उपलब्ध है?

हाँ, गणित प्रकाश कक्षा 6 अध्याय 7 की पीडीएफ हमारे ऐप और वेबसाइट पर बिना किसी पंजीकरण के निःशुल्क उपलब्ध है।

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