अध्याय 5: लंबाई एवं गति का मापन
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कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 5, "लंबाई एवं गति का मापन", SI मानक मात्रकों (मीटर, सेंटीमीटर, मिलीमीटर, किलोमीटर) का उपयोग करके लंबाई मापने की विधि और संदर्भ बिंदु की अवधारणा के साथ तीन प्रकार की गतियों — रैखिक, वृत्तीय और दोलनी — का परिचय देता है।
- मानक मात्रकों की आवश्यकता — बालिश्त, हाथ या कदम जैसे शारीरिक अंगों से मापी गई लंबाई अलग-अलग व्यक्तियों में भिन्न-भिन्न होती है, इसलिए विश्व ने SI मात्रक प्रणाली अपनाई। लंबाई का SI मात्रक मीटर (m) है: 1 km = 1000 m, 1 m = 100 cm, 1 cm = 10 mm।
- लंबाई मापने की सही विधि — पैमाने को वस्तु की लंबाई के अनुदिश स्पर्श में रखें और आँख को मापन-बिंदु के ठीक ऊपर रखें — इससे लंबन त्रुटि नहीं होती। यदि पैमाने का शून्यांक टूटा हो तो किसी अन्य पूर्णांक से प्रारंभ करके दोनों सिरों के पाठ्यांकों का अंतर लें। वक्र-रेखा मापने के लिए लचीले मापन-फीते या धागे का उपयोग करें।
- संदर्भ बिंदु, विराम और गति — किसी वस्तु की स्थिति किसी नियत संदर्भ बिंदु के सापेक्ष बताई जाती है। यदि समय के साथ संदर्भ बिंदु के सापेक्ष वस्तु की स्थिति बदलती है तो वस्तु गतिशील है, अन्यथा वह विराम में है।
- गति के प्रकार — गति तीन प्रकार की होती है: रैखिक (सीधी रेखा में, जैसे — गिरता इरेजर), वृत्तीय (वृत्ताकार पथ पर, जैसे — मेरी-गो-राउंड) और दोलनी (एक नियत स्थिति के आगे-पीछे, जैसे — झूला)। वृत्तीय और दोलनी दोनों आवधिक गतियाँ हैं — ये एक नियत समयांतराल के बाद दोहराई जाती हैं।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01लंबाई का SI मात्रक मीटर (m) है; अन्य मात्रक: किलोमीटर (1 km = 1000 m), सेंटीमीटर (1 m = 100 cm), मिलीमीटर (1 cm = 10 mm)।
- 02बालिश्त जैसे शारीरिक मात्रक अमानक हैं क्योंकि ये अलग-अलग व्यक्तियों में भिन्न होते हैं — इसीलिए SI मात्रक प्रणाली अपनाई गई।
- 03प्राचीन भारतीय मापन मात्रकों में अँगुल (अँगुली की चौड़ाई), धनुष और योजन सम्मिलित हैं; अँगुल का प्रयोग परंपरागत शिल्पकार आज भी करते हैं।
- 04पैमाने से मापते समय: पैमाने को वस्तु के संपर्क में अनुदिश रखें; लंबन त्रुटि से बचने के लिए आँख मापन-बिंदु के ठीक ऊपर रखें।
- 05यदि पैमाने का शून्य-सिरा टूटा हो तो किसी स्पष्ट अंक (जैसे 1.0 cm) से मापन शुरू करें और दूसरे सिरे के पाठ्यांक में से उसे घटाएँ।
- 06वक्र-रेखा की लंबाई लचीले मापन-फीते या धागे को वक्र के अनुदिश रखकर मापें, फिर धागे को सीधा कर मीटर पैमाने से मापें।
- 07संदर्भ बिंदु वह नियत वस्तु या बिंदु है जिसके सापेक्ष किसी अन्य वस्तु की स्थिति या दूरी बताई जाती है।
- 08जब कोई वस्तु समय के साथ संदर्भ बिंदु के सापेक्ष अपनी स्थिति बदलती है तो वह गतिशील है; अन्यथा विराम में है।
- 09रैखिक गति: सीधी रेखा में गति (जैसे — गिरता इरेजर, सीधी सड़क पर दौड़ती कार)।
- 10वृत्तीय गति: वृत्ताकार पथ पर गति (जैसे — मेरी-गो-राउंड, धागे से घुमाया गया इरेजर)।
- 11दोलनी गति: एक नियत स्थिति के आगे-पीछे गति (जैसे — झूला, लोलक, कंपित धातु की पट्टी)।
- 12वृत्तीय और दोलनी गतियाँ दोनों आवधिक हैं — एक नियत समयांतराल के बाद उसी पथ को दोहराती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01कक्षा 6 विज्ञान (जिज्ञासा) का अध्याय 5 किस बारे में है?
अध्याय 5 लंबाई के मापन और गति के प्रकारों के बारे में है। इसमें SI मात्रक (मीटर, सेंटीमीटर, मिलीमीटर, किलोमीटर), पैमाने का सही उपयोग, वक्र-रेखा की लंबाई मापना, संदर्भ बिंदु की अवधारणा और तीन प्रकार की गतियाँ — रैखिक, वृत्तीय और दोलनी — समझाई गई हैं।
02लंबाई का SI मात्रक क्या है?
लंबाई का SI मात्रक मीटर है, जिसका प्रतीक m है। अन्य मात्रक: किलोमीटर (1 km = 1000 m), सेंटीमीटर (1 m = 100 cm) और मिलीमीटर (1 cm = 10 mm)।
03बालिश्त जैसे शारीरिक मापन भरोसेमंद क्यों नहीं होते?
बालिश्त, हाथ और कदम जैसे शारीरिक अंग अलग-अलग व्यक्तियों में भिन्न-भिन्न आकार के होते हैं। इसलिए एक ही वस्तु को विभिन्न लोग अलग-अलग माप देते हैं। मीटर जैसे SI मात्रक सभी के लिए समान परिणाम देते हैं।
04यदि पैमाने का शून्य-सिरा टूटा हो तो लंबाई कैसे मापें?
पैमाने के किसी स्पष्ट अंक (जैसे 1.0 cm) से वस्तु का एक सिरा संरेखित करें, दूसरे सिरे का पाठ्यांक पढ़ें और उसमें से प्रारंभिक अंक घटाएँ। उदाहरण: यदि एक सिरे का पाठ्यांक 1.0 cm और दूसरे का 10.4 cm है, तो लंबाई = 10.4 − 1.0 = 9.4 cm।
05वक्र-रेखा की लंबाई कैसे मापते हैं?
लचीले मापन-फीते या धागे को वक्र-रेखा के अनुदिश रखें, दोनों सिरों पर चिह्न लगाएँ, फिर धागे को सीधा करके मीटर पैमाने से उसकी लंबाई मापें।
06संदर्भ बिंदु क्या है और यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
संदर्भ बिंदु वह नियत वस्तु या स्थान है जिसके सापेक्ष किसी अन्य वस्तु की स्थिति या दूरी बताई जाती है। यह इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि एक ही वस्तु अलग-अलग संदर्भ बिंदुओं के सापेक्ष विराम में भी हो सकती है और गतिशील भी।
07अध्याय 5 में वर्णित तीन प्रकार की गतियाँ कौन-सी हैं?
तीन प्रकार की गतियाँ हैं: (1) रैखिक गति — सीधी रेखा में गति, जैसे गिरता इरेजर; (2) वृत्तीय गति — वृत्ताकार पथ पर गति, जैसे मेरी-गो-राउंड; (3) दोलनी गति — एक नियत स्थिति के आगे-पीछे गति, जैसे झूला या लोलक।
08वृत्तीय और दोलनी गति में क्या अंतर है?
वृत्तीय गति में वस्तु पूर्ण वृत्ताकार पथ पर चलती है (जैसे मेरी-गो-राउंड)। दोलनी गति में वस्तु एक नियत स्थिति के आगे-पीछे गति करती है, बिना पूरा वृत्त बनाए (जैसे झूला)। दोनों आवधिक हैं — एक नियत समयांतराल के बाद दोहराई जाती हैं।
09क्या एक ही वस्तु एक साथ विराम और गतिशील दोनों हो सकती है?
हाँ, यह संदर्भ बिंदु पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, बस में बैठा यात्री बस के सापेक्ष विराम में है (उसकी सीट की स्थिति नहीं बदलती), लेकिन सड़क के किनारे खड़ी इमारत के सापेक्ष गतिशील है।
10पैमाने से मापते समय आँख की सही स्थिति क्या होनी चाहिए?
आँख को मापन-बिंदु के ठीक ऊपर रखना चाहिए, न कि किसी कोण पर — अन्यथा लंबन त्रुटि के कारण गलत पाठ्यांक मिलेगा।
11अध्याय में वर्णित प्राचीन भारतीय मापन मात्रक कौन-से हैं?
अध्याय में अँगुल (अँगुली की चौड़ाई), धनुष और योजन का उल्लेख है। अँगुल का उपयोग आज भी बढ़ई और दर्जी जैसे परंपरागत शिल्पकार करते हैं। सिंधु-सरस्वती (हड़प्पा) सभ्यता के उत्खनन स्थलों से ऐसी वस्तुएँ मिली हैं जिन पर रेखांकित चिह्न हैं जो पैमाने हो सकते हैं।
12क्या कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 5 की एनसीईआरटी PDF बिना साइन-अप के मुफ़्त मिलती है?
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