अध्याय 3: उचित आहार— स्वस्थ शरीर का आधार
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कक्षा 6 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 3, "उचित आहार— स्वस्थ शरीर का आधार", भोजन के घटकों (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज, रुक्षांश और जल), न्यूनता-जनित रोगों, संतुलित आहार, पोषक-अनाज मिलेट्स तथा खाद्य-मील की अवधारणा को सरल प्रयोगों सहित प्रस्तुत करता है।
- आहार क्यों जरूरी है और भोजन में विविधता — 'अन्नेन जातानि जीवन्ति'—भोजन जीवन देता है। भारत के विभिन्न राज्यों का परंपरागत आहार वहाँ की स्थानीय फसलों, मृदा, जलवायु, संस्कृति और परंपराओं पर आधारित होता है।
- प्रमुख पोषक तत्व — कार्बोहाइड्रेट और वसा ऊर्जा देते हैं (वसा ऊर्जा संग्रहीत भी करती है), प्रोटीन शरीर का निर्माण और मरम्मत करते हैं, जबकि विटामिन और खनिज थोड़ी मात्रा में शरीर की रक्षा करते हैं। रुक्षांश और जल भी स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक हैं।
- न्यूनता-जनित रोग और संतुलित आहार — किसी पोषक तत्व की कमी से विशेष रोग होते हैं—स्कर्वी (विटामिन C), रिकेट्स (विटामिन D), बेरी-बेरी (विटामिन B1), घेंघा (आयोडीन), रक्ताल्पता (आयरन)। संतुलित आहार में सभी पोषक तत्व, रुक्षांश और जल उचित मात्रा में होते हैं।
- मिलेट्स, खाद्य-मील और पोषक परीक्षण — ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मिलेट्स को 'पोषक-अनाज' कहते हैं—ये विटामिन, खनिज और आहारीय रेशे से भरपूर हैं। स्थानीय भोजन खाने से खाद्य-मील, लागत और प्रदूषण कम होता है। सरल परीक्षणों से भोजन में स्टार्च, वसा और प्रोटीन की पहचान की जा सकती है।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01संस्कृत सूक्ति 'अन्नेन जातानि जीवन्ति' का अर्थ है—आहार जीवित प्राणियों को जीवन देता है।
- 02किसी राज्य का परंपरागत आहार वहाँ उगाई जाने वाली स्थानीय फसलों, मृदा, जलवायु और संस्कृति पर आधारित होता है।
- 03कार्बोहाइड्रेट (गेहूँ, चावल, आलू, केला) और वसा (घी, मेवे, बीज) ऊर्जा-प्रदायी खाद्य पदार्थ हैं; वसा ऊर्जा संग्रहीत भी करती है।
- 04प्रोटीन (दालें, पनीर, अंडा, मछली) शरीर-निर्माण करने वाले खाद्य पदार्थ हैं—वृद्धि और मरम्मत में सहायक।
- 05विटामिन और खनिज सुरक्षात्मक पोषक तत्व हैं जो थोड़ी मात्रा में आवश्यक होते हैं; कमी से विशेष रोग होते हैं।
- 06प्रमुख न्यूनता-जनित रोग: स्कर्वी (विटामिन C), रिकेट्स (विटामिन D), बेरी-बेरी (विटामिन B1), घेंघा (आयोडीन), रक्ताल्पता (आयरन)।
- 07रुक्षांश (आहारीय रेशा) पोषण नहीं देता, परंतु मल के सुगम निष्कासन में सहायता करता है।
- 08संतुलित आहार में सभी आवश्यक पोषक तत्व, रुक्षांश और जल उचित मात्रा में होते हैं।
- 09मिलेट्स (ज्वार, बाजरा, रागी, साँवा) को 'पोषक-अनाज' कहते हैं—विटामिन, खनिज और आहारीय रेशे के अच्छे स्रोत हैं।
- 10खाद्य-मील = उत्पादक से उपभोक्ता तक भोजन की यात्रा की दूरी; स्थानीय खाने से परिवहन लागत और प्रदूषण कम होता है।
- 11जंक फूड में वसा और चीनी अधिक तथा प्रोटीन, विटामिन, खनिज और रेशे बहुत कम होते हैं।
- 12सरल परीक्षण: आयोडीन विलयन (नीला-काला रंग = स्टार्च); कागज पर तैलीय धब्बा = वसा; कॉपर सल्फेट + कास्टिक सोडा से बैंगनी रंग = प्रोटीन।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01कक्षा 6 विज्ञान (जिज्ञासा) का अध्याय 3 किस बारे में है?
अध्याय 3 'उचित आहार— स्वस्थ शरीर का आधार' भोजन के घटकों (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज, रुक्षांश, जल), न्यूनता-जनित रोगों, भोजन में पोषक तत्वों की जाँच, संतुलित आहार, मिलेट्स और खाद्य-मील को समझाता है।
02भोजन के प्रमुख पोषक तत्व कौन-कौन से हैं?
पाँच प्रमुख पोषक तत्व हैं: कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज। इनके अलावा आहारीय रेशे (रुक्षांश) और जल भी आवश्यक हैं। कार्बोहाइड्रेट और वसा ऊर्जा देते हैं; प्रोटीन वृद्धि और मरम्मत में सहायक है; विटामिन और खनिज शरीर की रक्षा करते हैं।
03भोजन में स्टार्च की जाँच कैसे करते हैं?
खाद्य पदार्थ पर 2-3 बूँद पतला आयोडीन विलयन डालें। यदि नीला-काला रंग आए तो स्टार्च उपस्थित है; यदि रंग न बदले तो स्टार्च अनुपस्थित है।
04मिलेट्स को 'पोषक-अनाज' क्यों कहते हैं?
ज्वार, बाजरा, रागी और साँवा जैसे मिलेट्स विटामिन, आयरन, कैल्शियम जैसे खनिजों और आहारीय रेशे के अच्छे स्रोत हैं। ये विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में उगाए जा सकते हैं और संतुलित आहार में योगदान देते हैं।
05संतुलित आहार किसे कहते हैं?
संतुलित आहार वह है जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज), रुक्षांश और जल उचित मात्रा में हों, जिससे शरीर की उचित वृद्धि और विकास हो सके।
06खाद्य-मील क्या है और इसे कम करना क्यों जरूरी है?
खाद्य-मील वह कुल दूरी है जो भोजन उत्पादक से उपभोक्ता तक तय करता है। खाद्य-मील कम करने से परिवहन लागत और प्रदूषण घटता है, स्थानीय किसानों को सहायता मिलती है और भोजन ताजा रहता है।
071960 के दशक में भारत सरकार ने आयोडीनयुक्त नमक क्यों शुरू किया?
वैज्ञानिकों ने पाया कि हिमालयी क्षेत्र के लोगों में मृदा में आयोडीन की कमी के कारण घेंघा रोग होता था। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने सामान्य नमक में आयोडीन (आयोडीन के लवण) मिलाना शुरू किया।
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