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अवलोकन

सारांश

कक्षा 7 विज्ञान एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (जिज्ञासा) का अध्याय 9, "जंतुओं में जैव प्रक्रम", पोषण और श्वसन जैसे जैव प्रक्रमों का विस्तृत अध्ययन करता है — मानव पाचन तंत्र की आहार नाल (मुख से गुदा तक) और श्वसन तंत्र (फेफड़े, कूपिकाएँ) को केंद्र में रखते हुए विभिन्न जंतुओं में इन प्रक्रमों की तुलना करता है।

  • आहार नाल में पाचन की यात्रा — भोजन मुख से प्रवेश कर ग्रासनली, आमाशय, क्षुद्रांत्र और बृहदांत्र से होते हुए गुदा तक की यात्रा करता है। इस यात्रा में लार, आमाशय-रस, यकृत का पित्त और अग्न्याशयी रस मिलकर जटिल भोजन को सरल रूपों में विघटित कर देते हैं।
  • लार से लेकर क्षुद्रांत्र तक — रासायनिक पाचन — मुख में लार मंड को शर्करा में तोड़ती है (इसीलिए रोटी चबाने पर मीठी लगती है)। क्षुद्रांत्र में यकृत और अग्न्याशय के स्राव वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का पूर्ण पाचन करते हैं; इसकी अंगुलीनुमा रचनाएँ पोषक तत्वों का अवशोषण करती हैं।
  • श्वसन बनाम श्वास लेना — श्वास लेना एक भौतिक क्रिया है जिसमें वक्षगुहा फैलती और सिकुड़ती है। श्वसन एक रासायनिक प्रक्रिया है: ग्लूकोज + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा। कूपिकाओं में ऑक्सीजन रक्त में और कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से कूपिकाओं में स्थानांतरित होती है।
  • विभिन्न जंतुओं में अनुकूलन — जुगाली करने वाले जंतु (गाय, भैंस) चारे को जठर में भेजकर वापस मुख में लाते हैं और लगभग 8 घंटे तक चबाते हैं। पक्षियों में पेषणी (गिज़र्ड) भोजन को पीसती है। मछलियाँ क्लोम (गिल्स) से, मेंढक वयस्कावस्था में फेफड़े और त्वचा दोनों से, तथा केंचुआ नम त्वचा से गैस-विनिमय करता है।
मुख्य बातें

मुख्य बिंदु और सूत्र

  1. 01जैव प्रक्रम (पोषण, श्वसन, उत्सर्जन, जनन) सजीवों की उत्तरजीविता के लिए आवश्यक हैं; इस अध्याय में मुख्यतः पोषण और श्वसन का अध्ययन है।
  2. 02मानव आहार नाल मुख से आरंभ होकर गुदा पर समाप्त होती है; इसके अंग हैं — मुख, ग्रासनली, आमाशय, क्षुद्रांत्र, बृहदांत्र, मलाशय और गुदा।
  3. 03लार में पाचक रस होता है जो मंड (स्टार्च) को शर्करा में बदलता है — आयोडीन परीक्षण से पुष्टि होती है: बिना चबाए चावल में नीला-काला रंग, चबाए चावल में परिवर्तन नहीं।
  4. 04आमाशय पाचक रस, अम्ल और श्लेष्म स्रावित करता है; अम्ल प्रोटीन पाचन में सहायता करता है और हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है; श्लेष्म आमाशय की भित्ति की रक्षा करता है।
  5. 05क्षुद्रांत्र (लगभग 6 मीटर लंबी, आहार नाल का सबसे लंबा भाग) में यकृत से पित्त (वसा को तोड़ता है, अम्ल को उदासीन करता है) और अग्न्याशय से अग्न्याशयी रस (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा का पाचन) पहुँचता है; इसकी आंतरिक भित्ति पर अंगुलीनुमा उभार पोषक अवशोषण की सतह बढ़ाते हैं।
  6. 06बृहदांत्र (लगभग 1.5 मीटर, क्षुद्रांत्र से चौड़ी) अपचित भोजन से जल और कुछ लवण अवशोषित करती है; अर्धठोस मल मलाशय में संचित होकर गुदा से बाहर निकाला जाता है।
  7. 07जुगाली करने वाले जंतु (गाय, भैंस) घास को आंशिक रूप से चबाकर आमाशय में भेजते हैं, फिर इसे वापस मुख में लाकर पुनः चबाते हैं (जुगाली); गाय लगभग 8 घंटे प्रतिदिन चबाती है। पक्षियों में दाँत नहीं होते; पेषणी की भित्तियाँ सिकुड़-फैलकर कंकड़ों की सहायता से भोजन को पीसती हैं।
  8. 08श्वास लेना एक भौतिक प्रक्रम है: श्वास लेते समय पसलियाँ बाहर और डायाफ्राम नीचे जाता है जिससे वक्ष-गुहा फैलती है; श्वास छोड़ते समय विपरीत होता है।
  9. 09गैस-विनिमय फेफड़ों की कूपिकाओं (पतली भित्ति वाली गुब्बारेनुमा थैलियाँ) में होता है — ऑक्सीजन कूपिकाओं से रक्त में और कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से कूपिकाओं में; छोड़ी गई वायु में CO₂ लगभग 4–5% होती है जबकि ली गई वायु में लगभग 0.04%।
  10. 10श्वसन (रासायनिक प्रक्रम): ग्लूकोज + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा। विभिन्न जंतुओं में श्वसन-अंग: पक्षी/स्तनधारी/सरीसृप — फेफड़े; मछली — क्लोम; वयस्क मेंढक — फेफड़े (स्थल पर) और त्वचा (जल में); टैडपोल — क्लोम; केंचुआ — नम त्वचा।
प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

01

अध्याय 9 'जंतुओं में जैव प्रक्रम' किस विषय पर है?

यह अध्याय दो मुख्य जैव प्रक्रमों — पोषण (भोजन का पाचन और पोषक-अवशोषण) और श्वसन (ऑक्सीजन से ऊर्जा प्राप्ति) — का अध्ययन करता है। मानव पाचन और श्वसन तंत्र को विस्तार से समझाने के बाद जुगाली करने वाले जंतुओं, पक्षियों, मछलियों और मेंढक से तुलना की गई है।

02

पाचन क्या है और मानव शरीर में यह कहाँ होता है?

पाचन जटिल भोजन-घटकों (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा) को सरल रूपों में विघटित करने की प्रक्रिया है। मनुष्य में यह आहार नाल में होता है — एक लंबी नलिका जो मुख से आरंभ होकर ग्रासनली, आमाशय, क्षुद्रांत्र, बृहदांत्र से होते हुए गुदा तक जाती है।

03

पाचन में लार की क्या भूमिका है?

लार में पाचक रस होता है जो मंड (स्टार्च) को शर्करा में विघटित करता है। यही कारण है कि रोटी को अधिक समय तक चबाने पर वह मीठी लगने लगती है। लार भोजन को मुलायम और निगलने योग्य भी बनाती है।

04

आमाशय में भोजन के साथ क्या होता है?

आमाशय की भित्तियाँ सिकुड़ती-फैलती हैं और भोजन को पाचक रस, अम्ल तथा श्लेष्म के साथ मिश्रित करती हैं। पाचक रस प्रोटीन को तोड़ता है, अम्ल हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है, और श्लेष्म आमाशय की भित्ति की रक्षा करता है। भोजन यहाँ से अर्धतरल अवस्था में क्षुद्रांत्र में जाता है।

05

क्षुद्रांत्र पाचन का सबसे महत्वपूर्ण स्थल क्यों है?

क्षुद्रांत्र (लगभग 6 मीटर लंबी) में यकृत से पित्त (वसा का पाचन, अम्ल को उदासीन करना) और अग्न्याशय से अग्न्याशयी रस (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा तीनों का पाचन) पहुँचता है। इसकी अंदरूनी भित्ति पर हजारों अंगुलीनुमा उभार होते हैं जो सतह क्षेत्र बढ़ाकर पचे हुए पोषकों को कुशलतापूर्वक रक्त में अवशोषित करते हैं।

06

क्षुद्रांत्र और बृहदांत्र में क्या अंतर है?

क्षुद्रांत्र लगभग 6 मीटर लंबी है और अधिकांश पाचन व पोषक-अवशोषण यहीं होता है। बृहदांत्र केवल लगभग 1.5 मीटर लंबी है किंतु चौड़ाई में अधिक है — इसीलिए इसे 'बृहद' (बड़ी) कहते हैं। यह अपचित भोजन से जल और कुछ लवण अवशोषित करती है और अर्धठोस मल बनाती है जो मलाशय से गुदा द्वारा बाहर निकाला जाता है।

07

श्वास लेना और श्वसन में क्या अंतर है?

श्वास लेना एक भौतिक प्रक्रम है — वायु को अंदर लेना और बाहर छोड़ना। श्वसन एक रासायनिक प्रक्रम है जो शरीर के अंदर होता है: ग्लूकोज + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा। श्वास लेना, श्वसन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन लाता है और उत्पादित कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर करता है।

08

डायाफ्राम श्वास लेने में कैसे सहायता करता है?

डायाफ्राम फेफड़ों के नीचे एक गुंबदनुमा पेशी है। श्वास लेते समय यह नीचे जाता है और पसलियाँ ऊपर-बाहर जाती हैं जिससे वक्ष-गुहा फैलती है और वायु फेफड़ों में प्रवेश करती है। श्वास छोड़ते समय डायाफ्राम ऊपर और पसलियाँ अंदर जाती हैं जिससे वक्ष-गुहा सिकुड़ती है और वायु बाहर निकलती है।

09

फेफड़ों में गैस-विनिमय कहाँ होता है?

गैस-विनिमय कूपिकाओं में होता है — फेफड़ों की सूक्ष्म शाखाओं के सिरों पर स्थित पतली भित्ति वाली गुब्बारेनुमा थैलियाँ। इनकी भित्तियों के निकट रक्त केशिकाएँ होती हैं जिनमें कूपिकाओं से ऑक्सीजन रक्त में और रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड कूपिकाओं में स्थानांतरित होती है।

10

जुगाली क्या है और कौन-से जंतु जुगाली करते हैं?

जुगाली वह प्रक्रम है जिसमें गाय, भैंस जैसे जंतु घास को आंशिक रूप से चबाकर आमाशय में भेजते हैं, फिर आंशिक रूप से पचे भोजन को वापस मुख में लाकर पुनः अच्छी तरह चबाते हैं। ऐसे जंतुओं को जुगाली करने वाले (रूमिनेंट) कहते हैं। गाय लगभग 8 घंटे प्रतिदिन चबाने में बिताती है।

11

पक्षी दाँत न होने पर भोजन कैसे पचाते हैं?

पक्षियों में दाँत नहीं होते। उनके पाचन-तंत्र में पेषणी (गिज़र्ड) नामक एक कक्ष होता है जिसकी भित्तियाँ सिकुड़-फैलकर और अंदर मौजूद कंकड़/बालू के कणों की सहायता से भोजन को यांत्रिक रूप से पीसती हैं।

12

मछली और मेंढक मनुष्य से अलग तरह से कैसे श्वसन करते हैं?

मछलियाँ क्लोम (गिल्स) से श्वसन करती हैं जो जल में घुली ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का विनिमय करते हैं। मेंढक (उभयचर) जीवन की विभिन्न अवस्थाओं में अलग-अलग अंगों का उपयोग करते हैं: टैडपोल क्लोम से, वयस्क मेंढक स्थल पर फेफड़ों से और जल में त्वचा से श्वसन करते हैं। केंचुआ अपनी नम त्वचा से गैस-विनिमय करता है।

13

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