पर्यावरण अध्ययन • कक्षा 3

हमारी अद्भुत दुनिया

NCERT पाठ्यपुस्तक12 अध्याय

अध्याय नोट्स

हमारी अद्भुत दुनिया में आप क्या सीखेंगे

हमारी अद्भुत दुनिया का त्वरित रिवीज़न मैप — हर अध्याय का मूल विचार और पाँच मुख्य बातें। पूरा NCERT PDF और विस्तृत नोट्स पढ़ने के लिए किसी भी अध्याय पर टैप करें।

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मेरा परिवार और मित्र

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 1, "मेरा परिवार और मित्र", बेला और उसके परिवार के रोज़मर्रा के जीवन के माध्यम से परिवार के सदस्यों के आपसी प्रेम, सहयोग और मिलकर खेलने-गाने के आनंद को दर्शाता है।

  • 1बेला के परिवार में माँ, पिताजी, दादाजी, दादीजी, बड़े भाई बंकू भैया, छोटे भाई बिशु और पालतू कुत्ता शीरू हैं।
  • 2परिवार छोटे और बड़े दोनों प्रकार के होते हैं — सभी विशेष हैं; अध्याय बच्चों से अपने परिवार के सदस्यों के नाम और रिश्ते लिखवाता है।
  • 3पारंपरिक खेल जैसे छुपन-छुपाई, पीका-बू, अंत्याक्षरी और साँप-सीढ़ी पीढ़ियों के बीच साझे आनंद का ज़रिया हैं।
  • 4दादा-दादी बच्चों को पुराने खेल और गीत सिखाते हैं — बड़ों से सीखने का महत्त्व इस अध्याय का मूल संदेश है।
  • 5घर के हर काम में परिवार के सभी सदस्य भाग लेते हैं — अध्याय बच्चों से यह पता लगाने को कहता है कि घर में कौन कौन-सा काम करता है।
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मेले में हम

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 2, "मेले में हम", नीता, राधा और उनके पड़ोसियों स्नेहा और रोहित की बस-यात्रा और स्थानीय मेले की सैर के माध्यम से यातायात सुरक्षा, बड़ों की देखभाल, सामुदायिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक स्थान पर व्यवहार जैसे विषय प्रस्तुत करता है।

  • 1नीता, राधा, स्नेहा और रोहित 401 नंबर की बस से मेले जाते हैं; दादीजी को वृद्धों के लिए आरक्षित सीट मिलती है।
  • 2सड़क सुरक्षा नियम: दोनों दिशाओं से आते वाहनों पर ध्यान दें, बस की खिड़की से हाथ या सिर बाहर न निकालें।
  • 3मेले के प्रवेश पर नक्शा और खोया-पाया बूथ होता है जहाँ स्वयंसेवी (वॉलंटियर) बैठते हैं।
  • 4एम्बुलेंस, पुलिस जीप और आग बुझाने वाली गाड़ी मेले के मैदान में तैनात रहती है।
  • 5बच्चे खाना खाने से पहले हाथ धोते हैं और खाने के बाद कूड़ा कूड़ेदान में डालते हैं — स्वच्छता का पाठ।
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त्योहार मनाएँ एक साथ

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 3, "त्योहार मनाएँ एक साथ", जम्मू के ऋषि की हिमालय-यात्रा के माध्यम से दिखाता है कि भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में वसंत का उत्सव फूलों, विशेष पकवानों और स्थानीय परंपराओं के साथ अनेक रूपों में मनाया जाता है।

  • 1ऋषि जम्मू से हिमालय के पास एक छोटे गाँव में मामा-मामी और ममेरी बहनों चिया और नोनिका के घर जाता है।
  • 2कश्मीर में वसंत में ट्यूलिप के फूल खिलते हैं और लोग ट्यूलिप महोत्सव मनाते हैं।
  • 3ऋषि के घर में वसंत पर बुरांश और सरसों के फूल हर घर के द्वार पर सजाए जाते हैं; बड़े बच्चों को आशीर्वाद देते हैं और टॉफियाँ-मिठाई देते हैं।
  • 4चिया की सहेली — केरल से — विशु पर अमलताश के पीले फूलों, सब्जियों और फलों से 'विशु किनी' बनाती है; सूर्योदय के समय शुभ वस्तुएँ देखना मंगलकारी माना जाता है।
  • 5सरहुल झारखंड का वसंत त्योहार है जिसमें लोग साल के वृक्ष तक जुलूस में जाते हैं, साल के फूल और नव-अंकुरित अनाज लेकर पृथ्वी और सूर्य को अर्पित करते हैं।
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कुछ खोज पेड़-पौधों की

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 4, "कुछ खोज पेड़-पौधों की", गोपू, सिम्मी और राज की कहानी के ज़रिए पाँच प्रकार के पौधों — पेड़, झाड़ी, जड़ी-बूटी व घास, लताएँ और बेलें — से परिचय कराता है और पौधों के विभिन्न भागों तथा हमारे रोज़मर्रा के भोजन में पौधों की भूमिका को समझाता है।

  • 1पौधे पाँच प्रकार के होते हैं: पेड़, झाड़ी, जड़ी-बूटी व घास, लताएँ और बेलें।
  • 2पेड़ों में एक बड़ा लकड़ी का तना और उस पर फैली शाखाएँ होती हैं; जड़ें धरती में बहुत गहराई तक जाती हैं — आम, नारियल, बरगद, पीपल, चिनार उदाहरण हैं।
  • 3झाड़ियाँ मध्यम आकार के पौधे हैं जिनमें कई तने होते हैं जो धरती के पास फैले रहते हैं — गुड़हल, गुलाब, तुलसी और मीठा नीम इसके उदाहरण हैं।
  • 4जड़ी-बूटियों के तने हमेशा कोमल और हरे रहते हैं, कभी लकड़ी जैसे सख्त नहीं बनते; घास भी जड़ी-बूटी का एक प्रकार है जिसके तने खोखले होते हैं।
  • 5चावल, गेहूँ, बाजरा, ज्वार, रागी बड़ी घासों के बीज हैं; गन्ना और बाँस भी घास के प्रकार हैं।
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पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हैं साथ

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 5, "पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हैं साथ", यह समझाता है कि पशु-पक्षी और कीट पेड़-पौधों के ऊपर, आस-पास और नीचे — मिट्टी में भी — रहते हैं, भोजन, आश्रय और विश्राम के लिए उन पर निर्भर करते हैं, और मिट्टी पृथ्वी की सबसे ऊपरी परत है जिसमें चींटियाँ, दीमक, केंचुए जैसे अनेक जीव-जंतु बसते हैं।

  • 1पशु-पक्षी और कीट पेड़-पौधों के ऊपर, आस-पास और मिट्टी के नीचे — भोजन, आश्रय और विश्राम के लिए रहते हैं।
  • 2मिट्टी पृथ्वी की सतह की सबसे ऊपरी परत है; यह चट्टानों के टुकड़ों, सूखी पत्तियों, जड़ों और मृत कीटों से बनती है।
  • 3चींटियाँ, दीमक, छोटे कॉकरोच और टिड्डे मिट्टी की ऊपरी परत में रहते हैं; बारिश के बाद केंचुए और कनखजूरे दिखते हैं।
  • 4दर्जिन चिड़िया पत्तियाँ सिलकर घोंसला बनाती है; बसंत गौरी चिड़िया पेड़ के कोटर को घर बनाती है।
  • 5बारिश के बाद मिट्टी गीली होने पर अधिक घास और अनेक प्रकार के पौधे उगते हैं।
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निर्भरता एक-दूसरे पर

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 6, "निर्भरता एक-दूसरे पर", बताता है कि मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे भोजन, आश्रय, देखभाल और साथ के लिए एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं, और कहानियों व गतिविधियों के माध्यम से दिखाता है कि जीवित प्राणी परस्पर सहयोग से प्रकृति में सामंजस्य बनाए रखते हैं।

  • 1पशु-पक्षी बीजों को बिखेरकर और भूमि को उपजाऊ बनाकर पेड़-पौधों की सहायता करते हैं; पेड़-पौधे पशु-पक्षियों को भोजन और आश्रय देते हैं।
  • 2हज़ारों पेड़ अनजाने में गिलहरियों द्वारा लगाए गए हैं — वे बीज और मेवे ज़मीन में दबाकर भूल जाती हैं।
  • 3पेड़-पौधों से हमें छाया, लकड़ी, दवाएँ, रेशे, फल और ताज़ी हवा मिलती है।
  • 4गाय, भैंस और बकरियाँ हमें दूध और प्यारा साथ देती हैं; हम उनका सम्मान करते हैं।
  • 5जानवरों से डर लगने या उन्हें पसंद न करने पर भी उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए — वे तभी हानि पहुँचाते हैं जब खतरा महसूस करें।
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पानी है अनमोल

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 7, "पानी है अनमोल", बताता है कि बारिश का पानी धरती पर कैसे पहुँचता है, मिट्टी में समाकर और बहकर कुओं, तालाबों, नदियों और भूमिगत स्रोतों में कैसे इकट्ठा होता है, पाइपों और टंकियों के ज़रिए घरों तक कैसे पहुँचता है, मिट्टी, ताँबे, पीतल, स्टील, एल्युमीनियम और प्लास्टिक के बर्तनों में कैसे संग्रहीत किया जाता है, और क्यों हमें इस अनमोल उपहार को बचाकर रखना चाहिए।

  • 1बारिश मुख्य जल-स्रोत है; पानी मिट्टी में समाकर कुएँ और भूजल भरता है, और बहकर तालाबों, नदियों व महासागरों में मिलता है।
  • 2पानी पाइपों व छत की टंकी, कुओं-हैंडपंप, या टैंकर के ज़रिए घरों तक पहुँचता है।
  • 3पानी मिट्टी के घड़े, ताँबे, पीतल, स्टील, एल्युमीनियम, काँच और प्लास्टिक के बर्तनों में संग्रहीत किया जाता है।
  • 4उपयोग के बाद बचा गंदा पानी पीने-खाने के लिए नहीं, लेकिन पौधों को देने या फ्लश करने के लिए पुन: उपयोग किया जा सकता है।
  • 5पानी बहुत पवित्र और अनमोल है; कुछ स्थानों पर लोग रोज़ बहुत दूर चलकर पानी लाते हैं।
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हमारा भोजन

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 8, "हमारा भोजन", समझाता है कि हमें भोजन की आवश्यकता क्यों होती है, संतुलित आहार में सब्जियाँ, फल, अनाज जैसे चावल, रागी, ज्वार, गेहूँ, बाजरा, दालें और सूखे मेवे शामिल हैं, भोजन पेड़-पौधों के अलग-अलग भागों और जानवरों से मिलता है, और मौसम व भारत के अलग-अलग भागों में भोजन की विविधता होती है।

  • 1तरह-तरह का भोजन खाना — सब्जियाँ, फल, अनाज, दालें, सूखे मेवे और दूध से बनी चीजें — स्वस्थ और मज़बूत शरीर के लिए ज़रूरी है।
  • 2शीरीन की कहानी बताती है कि कड़ी मेहनत के साथ-साथ संतुलित आहार खाने से ही लक्ष्य पाया जा सकता है।
  • 3छप्पन भोग एक विशेष पर्व-भोग है जिसमें 56 प्रकार के व्यंजन और छह रस — मीठा, तीखा, कसैला, खट्टा, नमकीन और कड़वा — होते हैं।
  • 4हम पेड़-पौधों की पत्तियाँ, फल, जड़ें और तने खाते हैं; जानवरों से दूध, दही, घी, पनीर, शहद और अंडे मिलते हैं।
  • 5गर्मियों में पसीने के कारण शरीर से पानी निकलता है, इसलिए खूब पानी, छाछ, नींबू पानी, आम पन्ना और नारियल पानी पिया जाता है।
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स्वस्थ रहो, प्रसन्न रहो

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 9, "स्वस्थ रहो, प्रसन्न रहो", स्वच्छता की सरल दैनिक आदतों, परंपरागत और पर्यावरण-अनुकूल सफाई के तरीकों, व्यायाम और बाहरी खेलों तथा सुरक्षित खेल और अनजान लोगों से सावधान रहने के बारे में बताता है।

  • 1दिन में दो बार दाँत साफ करें — सुबह उठने पर और सोने से पहले; भोजन के बाद कुल्ला करें।
  • 2शौचालय जाने के बाद और बाहर से घर आने पर साबुन से हाथ धोएँ।
  • 36–8 गिलास पानी पिएँ और कम से कम 8 घंटे सोएँ।
  • 4नीम, बबूल और करंज की दातून — यही भारतीय परंपरागत तरीका था जिससे आधुनिक टूथ ब्रश का विचार विकसित हुआ।
  • 5व्यायाम से हृदय अधिक कार्य करता है; दौड़ना, कूदना और रस्सी कूदना शरीर को चुस्त रखते हैं।
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वस्तुओं की दुनिया

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 10, "वस्तुओं की दुनिया", बच्चों को आस-पास की वस्तुओं को ध्यान से देखना, उनकी सामग्री और स्रोत पहचानना, तथा पारदर्शी/पारभासी/अपारदर्शी, ठोस/द्रव/गैस और प्राकृतिक/कृत्रिम जैसे गुणों के आधार पर उन्हें वर्गीकृत करना सिखाता है।

  • 1धातुएँ धरती के भीतर चट्टानों और तलछट (अयस्क) से खोदकर निकाली जाती हैं।
  • 2काँच मुख्यतः रेत से बनता है और पारदर्शी होता है — इसके आर-पार स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
  • 3सामग्री पारदर्शी (स्वच्छ काँच), पारभासी (धुँधला) या अपारदर्शी (जैसे लकड़ी) हो सकती है।
  • 4लकड़ी कठोर और दृढ़ होती है; कपड़ा मुलायम और लचीला — इसीलिए दोनों का उपयोग अलग-अलग वस्तुओं में होता है।
  • 5वस्तुएँ ठोस (अपना आकार बनाए रखती हैं), द्रव (बहती हैं) या गैस (स्वतंत्र रूप से फैलती हैं) हो सकती हैं।
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कैसे बनीं ये वस्तुएँ?

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 11, "कैसे बनीं ये वस्तुएँ?", बच्चों को मिट्टी के बर्तन और ईंटें बनाने की प्रक्रिया, प्रकृति और मिट्टी के बर्तनों में प्रतिरूप (पैटर्न), तथा भारत में विभिन्न सामग्रियों से बने घरों के बारे में सिखाता है।

  • 1मिट्टी में पानी मिलाकर, गूँधकर और चाक पर आकार देकर बर्तन बनाए जाते हैं।
  • 2बर्तन और ईंटों को पकाने की भट्टी को किल्न (भट्टी) कहते हैं — इसमें बहुत तेज आग से मिट्टी कठोर हो जाती है।
  • 3ईंटें साँचों में बनाई जाती हैं और भट्टी में पकाई जाती हैं; इनसे घर, विद्यालय और अस्पताल बनते हैं।
  • 4तेंदुए के धब्बे, गिलहरी की धारियाँ और नीम की पत्तियों का प्रतिरूप — ये सब कलाकारों को मिट्टी के बर्तनों पर डिज़ाइन बनाने की प्रेरणा देते हैं।
  • 5गर्म स्थानों पर मिट्टी, घास और लकड़ी से बने परंपरागत घर भीतर से ठंडे रहते हैं और कीड़ों को दूर रखते हैं।
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क्या और कैसे करें इसका?

कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 12, "क्या और कैसे करें इसका?", बच्चों को यह सिखाता है कि रोजमर्रा की गतिविधियों से कचरा कैसे बनता है और कचरे को कम करना (Reduce), पुन: उपयोग (Reuse), तथा हरे और नीले कूड़ेदानों में अलग-अलग करके खाद और पुनर्चक्रण द्वारा इसका सही प्रबंधन कैसे करें।

  • 1रोजमर्रा की गतिविधियों से पुराने कपड़े, प्लास्टिक रैपर, छिलके और बोतलें जैसा कचरा इकट्ठा होता है।
  • 2प्लास्टिक जलाने से हानिकारक गैसें निकलती हैं; सड़कों पर गंदा पानी बहने से मच्छर और बीमारियाँ पैदा होती हैं।
  • 3कचरा कम करने का पहला नियम — केवल जरूरी वस्तुएँ खरीदें और प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपड़े के थैले उपयोग करें।
  • 4पुन: उपयोग — पुरानी साड़ियों से रजाइयाँ, पुराने अखबार से उपहार-लपेटन, और इस्तेमाल की बोतल को बार-बार भरकर काम में लें।
  • 5हरे कूड़ेदान में सड़ने वाला कचरा (छिलके, पत्तियाँ) डालते हैं जो खाद बनती है; नीले कूड़ेदान में धातु, काँच, प्लास्टिक और कागज डालते हैं जिनका पुनर्चक्रण होता है।