सारांश
कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 12, "क्या और कैसे करें इसका?", बच्चों को यह सिखाता है कि रोजमर्रा की गतिविधियों से कचरा कैसे बनता है और कचरे को कम करना (Reduce), पुन: उपयोग (Reuse), तथा हरे और नीले कूड़ेदानों में अलग-अलग करके खाद और पुनर्चक्रण द्वारा इसका सही प्रबंधन कैसे करें।
- कचरा कैसे इकट्ठा होता है — पुराने कपड़े, प्लास्टिक के रैपर, फलों-सब्जियों के छिलके, कागज, पेंसिल की छीलन और पुरानी बैटरियाँ — प्रतिदिन के कामों से इस तरह का बहुत-सा कचरा इकट्ठा होता है। कचरे का सही प्रबंधन न होने पर ढेर लग जाते हैं, मच्छर पैदा होते हैं और बीमारियाँ फैलती हैं। गायें प्लास्टिक खाने से मर सकती हैं और जलाने पर हानिकारक गैसें निकलती हैं।
- कचरा कम करना और पुन: उपयोग — पहला नियम है कचरा कम करना — केवल जरूरी वस्तुएँ खरीदें, प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपड़े के थैले काम में लें। दूसरा है पुन: उपयोग — पुरानी साड़ियों से रजाइयाँ, पुराने कपड़ों से थैले बनें, पुराने अखबार उपहार लपेटने के काम आएँ और एक तरफ से लिखे कागज का उपयोग रफ कार्य में हो।
- हरा और नीला कूड़ेदान — हरे कूड़ेदान में गीला/प्राकृतिक कचरा डाला जाता है — सूखी पत्तियाँ, फल-सब्जियों के छिलके, अंडों के छिलके — जो सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं और खाद बन जाते हैं। नीले कूड़ेदान में धातु, काँच, प्लास्टिक और कागज से बनी चीजें डाली जाती हैं जिनका पुनर्चक्रण हो सकता है।
- स्वच्छ गाँव और शहर — सिल्लुक गाँव (अरुणाचल प्रदेश) को कचरा-मुक्त गाँव का पुरस्कार मिला है — वहाँ की सड़कें इतनी साफ हैं कि घूमना किसी बगीचे में घूमने जैसा लगता है। छोटा नरेना देश का पहला कचरा-मुक्त गाँव था। मैसूरु और इंदौर जैसे शहर भी स्वच्छता के लिए जाने जाते हैं।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01रोजमर्रा की गतिविधियों से पुराने कपड़े, प्लास्टिक रैपर, छिलके और बोतलें जैसा कचरा इकट्ठा होता है।
- 02प्लास्टिक जलाने से हानिकारक गैसें निकलती हैं; सड़कों पर गंदा पानी बहने से मच्छर और बीमारियाँ पैदा होती हैं।
- 03कचरा कम करने का पहला नियम — केवल जरूरी वस्तुएँ खरीदें और प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपड़े के थैले उपयोग करें।
- 04पुन: उपयोग — पुरानी साड़ियों से रजाइयाँ, पुराने अखबार से उपहार-लपेटन, और इस्तेमाल की बोतल को बार-बार भरकर काम में लें।
- 05हरे कूड़ेदान में सड़ने वाला कचरा (छिलके, पत्तियाँ) डालते हैं जो खाद बनती है; नीले कूड़ेदान में धातु, काँच, प्लास्टिक और कागज डालते हैं जिनका पुनर्चक्रण होता है।
- 06सिल्लुक (अरुणाचल प्रदेश) को 'कचरा-मुक्त गाँव' का पुरस्कार मिला; छोटा नरेना देश का पहला कचरा-मुक्त गाँव था; इंदौर और मैसूरु स्वच्छ शहरों के उदाहरण हैं।
- 07राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस 30 जनवरी को मनाया जाता है — उस दिन आस-पास को स्वच्छ रखने की प्रतिज्ञा लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01कक्षा 3 हमारी अद्भुत दुनिया का अध्याय 12 किस विषय पर है?
अध्याय 12 'क्या और कैसे करें इसका?' बताता है कि रोजमर्रा की गतिविधियों से कचरा कैसे बनता है और इसे कम करने, पुन: उपयोग करने तथा सही कूड़ेदान में डालने से इसका प्रबंधन कैसे करें।
02रोजमर्रा की जिंदगी में कचरा कैसे बनता है?
डिब्बाबंद खाना खाने, प्लास्टिक की बोतलें और थैलियाँ उपयोग करने, पेंसिल छीलने और नई चीजें खरीदने से कचरा बनता है — फलों के छिलके, कागज, पुराने कपड़े और प्लास्टिक रैपर सब कचरा बन जाते हैं।
03कचरे का सही प्रबंधन न होने पर क्या खतरे हैं?
कचरे के ढेर से मच्छर पैदा होते हैं जिनके काटने से बीमारियाँ होती हैं। प्लास्टिक जलाने से हानिकारक गैसें निकलती हैं। गंदे पानी में जीवाणु होते हैं जो बीमार करते हैं। गायें प्लास्टिक खाने से मर सकती हैं।
04कचरा कम करने का क्या अर्थ है?
कचरा कम करना यानी पहले ही कम कचरा पैदा करना। जैसे कपड़े का थैला उपयोग करें, रैपर में पैक खाना और प्लास्टिक की बोतलें लेने से बचें, और केवल जरूरी वस्तुएँ खरीदें।
05हरे और नीले कूड़ेदान में क्या अंतर है?
हरे कूड़ेदान में प्राकृतिक/सड़ने वाला कचरा डालते हैं — फलों-सब्जियों के छिलके, सूखी पत्तियाँ, अंडों के छिलके — जो खाद बन जाते हैं। नीले कूड़ेदान में धातु, काँच, प्लास्टिक और कागज डालते हैं जिनका पुनर्चक्रण होता है।
06खाद क्या होती है और यह किस काम आती है?
हरे कूड़ेदान के कचरे जैसे सब्जियों के छिलके और पत्तियाँ सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं — यही खाद है। यह पौधों के लिए भोजन का काम करती है और मिट्टी में रहने वाले छोटे-छोटे जीवों को भी भोजन मिलता है।
07कौन-सा गाँव 'कचरा-मुक्त गाँव' कहलाता है?
सिल्लुक गाँव (अरुणाचल प्रदेश) को कचरा-मुक्त गाँव का पुरस्कार मिला है। वहाँ की सड़कें इतनी साफ हैं कि घूमना किसी बगीचे में घूमने जैसा लगता है।
08क्या अध्याय में और भी स्वच्छ स्थानों का उल्लेख है?
हाँ। छोटा नरेना देश का पहला कचरा-मुक्त गाँव था। मैसूरु और इंदौर जैसे शहर भी अपनी स्वच्छता के लिए जाने जाते हैं।
09राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस कब मनाया जाता है?
राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस 30 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन बच्चों को अपने आस-पास को स्वच्छ रखने और कचरे का सही प्रबंधन करने की प्रतिज्ञा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
10बच्चे जन्मदिन की पार्टी में कचरा कैसे कम कर सकते हैं?
अध्याय बच्चों को यह सोचने के लिए कहता है कि जन्मदिन की पार्टी में कौन-सा कचरा (प्लास्टिक की सजावट, रैपर) पैदा हो सकता है और इसे कैसे रोका या कम किया जाए — इस तरह पार्टी को कचरा-रहित बनाया जा सकता है।
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