सारांश
कक्षा 3 पर्यावरण अध्ययन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (हमारी अद्भुत दुनिया) का अध्याय 6, "निर्भरता एक-दूसरे पर", बताता है कि मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे भोजन, आश्रय, देखभाल और साथ के लिए एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं, और कहानियों व गतिविधियों के माध्यम से दिखाता है कि जीवित प्राणी परस्पर सहयोग से प्रकृति में सामंजस्य बनाए रखते हैं।
- पशु-पक्षी और पेड़-पौधे एक-दूसरे की सहायता करते हैं — पशु-पक्षी बीजों को एक जगह से दूसरी जगह बिखेरकर और अपनी विष्ठा से भूमि को उपजाऊ बनाकर पेड़-पौधों की सहायता करते हैं। पेड़-पौधे पशु-पक्षियों को भोजन और आश्रय देते हैं। इस तरह प्रकृति में सामंजस्य बना रहता है।
- पेड़-पौधों के उपयोग — पेड़-पौधों से हमें फल, सब्जियाँ, दवाएँ, वस्त्रों के लिए रेशे, घर बनाने के लिए लकड़ियाँ, छाया और ताज़ी हवा मिलती है। शंभु और उसके पिता की आम के पेड़ के नीचे बैठने की कहानी इसी बात को सरल रूप में समझाती है।
- हमें एक-दूसरे की ज़रूरत है — हम पशु-पक्षियों और पौधों को सुरक्षा, भोजन और रहने का स्थान देते हैं; बदले में वे हमें दूध, साथ, भोजन, वस्त्र और सुरक्षा देते हैं। गाय, भैंस और बकरियाँ दूध देती हैं; हम उनसे दया और करुणा से व्यवहार करते हैं।
- जीवित प्राणियों की देखभाल करना — अध्याय में बच्चों को किसी पशु या पक्षी — जैसे बकरी, गाय, कुत्ता, बिल्ली, कौआ, कबूतर, गौरैया, तोता या बत्तख — को ध्यान से देखकर उसका संक्षिप्त विवरण लिखने के लिए प्रेरित किया जाता है। पक्षियों के लिए कटोरे में पानी और दाना रखने की सलाह भी दी जाती है।
मुख्य बिंदु और सूत्र
- 01पशु-पक्षी बीजों को बिखेरकर और भूमि को उपजाऊ बनाकर पेड़-पौधों की सहायता करते हैं; पेड़-पौधे पशु-पक्षियों को भोजन और आश्रय देते हैं।
- 02हज़ारों पेड़ अनजाने में गिलहरियों द्वारा लगाए गए हैं — वे बीज और मेवे ज़मीन में दबाकर भूल जाती हैं।
- 03पेड़-पौधों से हमें छाया, लकड़ी, दवाएँ, रेशे, फल और ताज़ी हवा मिलती है।
- 04गाय, भैंस और बकरियाँ हमें दूध और प्यारा साथ देती हैं; हम उनका सम्मान करते हैं।
- 05जानवरों से डर लगने या उन्हें पसंद न करने पर भी उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए — वे तभी हानि पहुँचाते हैं जब खतरा महसूस करें।
- 06बच्चों से आस-पास के किसी पशु या पक्षी को ध्यान से देखकर उसकी आवाज़, चाल और व्यवहार का संक्षिप्त विवरण लिखने की गतिविधि करवाई जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
01अध्याय 6 'निर्भरता एक-दूसरे पर' किस बारे में है?
यह अध्याय बताता है कि मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे भोजन, आश्रय, बीज-प्रसार और साथ के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं और परस्पर सहयोग से प्रकृति में सामंजस्य बनाते हैं।
02पशु-पक्षी पेड़-पौधों की सहायता कैसे करते हैं?
पशु-पक्षी बीजों को एक जगह से दूसरी जगह बिखेरते हैं और अपनी विष्ठा से भूमि को उपजाऊ बनाते हैं, जिससे पौधों को दूर-दूर तक उगने में सहायता मिलती है। उदाहरण के लिए, बंदर के आम की गुठली फेंकने से नया पौधा उग सकता है।
03गिलहरियाँ पेड़ लगाने में कैसे मदद करती हैं?
गिलहरियाँ अपने भोजन के लिए बीज और मेवे ज़मीन में दबाकर रखती हैं और बाद में भूल जाती हैं कि उन्हें कहाँ छिपाया था। इस तरह अनजाने में हज़ारों पेड़ गिलहरियों द्वारा लगाए जाते हैं।
04इस अध्याय में पेड़-पौधों के कौन-कौन से उपयोग बताए गए हैं?
पेड़-पौधों से हमें छाया, पशु-पक्षियों के लिए आश्रय, लकड़ी, दवाएँ, वस्त्रों के लिए रेशे, फल और ताज़ी हवा मिलती है।
05शंभु और उसके पिता की कहानी इस अध्याय में क्या सिखाती है?
शंभु और उसके पिता जंगल से जा रहे थे और आम के एक विशाल पेड़ की छाया में बैठे। बंदर के आम की गुठली फेंकने पर पिता ने बताया कि उससे नया पौधा उगेगा — इस तरह पशु-पक्षी और पौधे एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
06हम पशु-पक्षियों का ध्यान कैसे रखते हैं?
हम उन्हें भोजन, पानी और रहने का स्थान देते हैं। अध्याय में कहा गया है कि जानवरों से डर लगने या उन्हें पसंद न करने पर भी हमें उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए; हम पक्षियों के लिए कटोरे में पानी और दाना भी रख सकते हैं।
07पशु-पक्षी हम पर किस तरह निर्भर हैं?
पशु-पक्षी भोजन और आवास के लिए हम पर निर्भर हैं। हम उन्हें सुरक्षा, भोजन और रहने का स्थान देते हैं और बदले में गाय, भैंस, बकरियाँ हमें दूध और साथ देती हैं।
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